झारखंड में बदला ट्रेंड: बच्चों की थाली से दूर हुआ 'जंक फूड', पलामू और पश्चिमी सिंहभूम में पोषण की नई लहर
UNICEF Study: यूनिसेफ और आइएचडी के अध्ययन से पता चला है कि झारखंड के पलामू और पश्चिमी सिंहभूम में बच्चों को जंक फूड देने की प्रथा में कमी आई है। आंगनब ...और पढ़ें

झारखंड में बच्चों के पोषण में सुधार, जंक फूड का सेवन घटा। (तस्वीर: सांकेतिक)
HighLights
बच्चों को जंक फूड देने की प्रथा में कमी आई।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के परामर्श से माताओं का व्यवहार बदला।
बच्चों के आहार में विविधता और पोषण में सुधार हुआ।
राज्य ब्यूरो, रांची। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड, यूनिसेफ और इंस्टीट्यूट फार ह्यूमन डवलपमेंट (आइएचडी) के सहयोग से रांची के होटल कोर्टयार्ड में आयोजित एक राज्य स्तरीय बैठक में पश्चिमी सिंहभूम और पलामू जिलों में पूरक आहार (कम्प्लीमेंट्री फीडिंग) प्रथाओं पर किए गए 'व्यवहार अंतर्दृष्टि' (बेहवीयरल इनसाइट्स) अध्ययन के निष्कर्षों को साझा किया गया।
इस अध्ययन में यह बात सामने आई है कि बच्चों को जंक फूड देने की प्रथा में कमी आई है। इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से दिए जाने वाले परामर्श और उससे माताओं के व्यवहार में आने वाले बदलावों का मूल्यांकन करना था।
अध्ययन के अनुसार, पश्चिमी सिंहभूम और पलामू में किए गए इस कार्य के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण से उनके आत्मविश्वास और परामर्श देने की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
इसके परिणामस्वरूप, माताओं ने बच्चों के भोजन की विविधता, मात्रा और गुणवत्ता में सुधार किया है। विशेष रूप से सब्जियों, दालों और अन्य पोषणयुक्त खाद्य पदार्थों के सेवन में बढ़ोतरी देखी गई है, जबकि कम पोषक तत्वों वाले पैकेट बंद खाद्य पदार्थों के उपयोग में कमी आई है।
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अध्ययन के दौरान डिफरेंस-इन-डिफरेंस मेथड का उपयोग किया गया, जिसमें सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। पलामू में छह से आठ महीने के बच्चों की माताओं में विविधतापूर्ण आहार की समझ 38.9 प्रतिशत से बढ़कर 90.5 प्रतिशत हो गई है जबकि पश्चिमी सिंहभूम में यह 100 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
अध्ययन में पाया गया कि बच्चों को जंक फूड देने की प्रथा में कमी आई है। पश्चिमी सिंहभूम में तीन से छह महीने के बच्चों में बिस्किट जैसे जंक फूड के सेवन में भारी गिरावट आई, जो 63.2 प्रतिशत से घटकर मात्र 14.4 प्रतिशत रह गया।
अध्ययन की प्रमुख बातों में यह सामने आया है कि बच्चों के भोजन में पोषक तत्वों को देने संबंधित मामलों में जागरूकता आई है। पलामू में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के बीच हरी पत्तेदार सब्जियों के प्रति जागरूकता 45.7 प्रतिशत से बढ़कर 90.9 प्रतिशत हो गई, जिसका सीधा लाभ माताओं और बच्चों को मिल रहा है।
इस अवसर पर यूनिसेफ झारखंड की प्रमुख डा. कनिनिका मित्रा, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड के आइईसी के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डा. राहुल किशोर सिंह आदि उपस्थित थे।
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