पर्यटन स्थलों से हटेगा अतिक्रमण, टूरिज्म अथॉरिटी के पास नगर निगम जैसी पावर; झारखंड पर्यटन संशोधन अधिनियम 2026 लागू
झारखंड सरकार ने पर्यटन विकास एवं निबंधन (संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत पर्यटन प्राधिकारों को सशक्त किया है। अब ये प्राधिकार सड़कों, नालियों और भूमि से ...और पढ़ें

झारखंड पर्यटन प्राधिकारों को मिली अतिक्रमण हटाने की नगरपालिका जैसी शक्तियां।
HighLights
पर्यटन प्राधिकारों को अतिक्रमण हटाने की शक्ति मिली।
सड़क, नाली, भूमि पर अतिक्रमण हटा सकेंगे प्राधिकार।
प्राधिकारों की संरचना बदली, बैठकें अब मासिक होंगी।
राज्य ब्यूरो, रांची। राज्य के किसी खास पर्यटन स्थल के विकास के लिए गठित या गठित होनेवाले प्राधिकारों के पास सड़कों, नालियों, भूमि आदि पर अतिक्रमण को हटाने के लिए वही शक्तियां प्राप्त होंगी, जो नगरपालिका क्षेत्र में नगरपालिका के सक्षम प्राधिकार के पास होती हैं।
संबंधित प्राधिकार झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011 के तहत निर्धारित शक्तियों का प्रयोग कर सकेगा। झारखंड विधानसभा से पारित झारखंड पर्यटन विकास एवं निबंधन (संशोधन) अधिनियम, 2026 में इसका प्रविधान किया गया है। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार की स्वीकृति के बाद यह संशोधन अधिनियम लागू हो गया है।
इस संशोधन के तहत पर्यटन विकास प्राधिकारों को मजबूत और सक्रिय बनाने के लिए कई नए प्रविधान जोड़े गए हैं। कुछ प्रविधानों में संशोधन भी किए गए हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि प्राधिकार में सभी छह गैर सरकारी निदेशकों का पद समाप्त कर दिया गया है।
जिले के उपायुक्त को अध्यक्ष की जिम्मेदारी
अब प्राधिकार में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, प्रबंधन निदेशक तथा सदस्य सचिव का ही पद होगा। संशोधन से पूर्व प्राधिकार में पर्यटन विभाग के प्रधान सचिव को अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई थी। अब अधिकार को विकेंद्रित करते हुए संबंधित जिले के उपायुक्त को अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।
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वहीं, जिले के डीडीसी प्रबंध निदेशक सह उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालेंगे। जिला पर्यटन नोडल पदाधिकारी या संयुक्त सचिव स्तर का कोई पदाधिकारी सदस्य सचिव की भूमिका निभाएगा। यदि कोई पर्यटन स्थल दो जिलों के क्षेत्र में आता है तो समीप या सुविधा के अनुसार किसी जिले के उपायुक्त और डीडीसी को क्रमश: अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक की जिम्मेदारी दी जाएगी।
तीन माह की जगह अब प्रतिमाह बैठक
प्राधिकार की बैठक अब प्रतिमाह अध्यक्ष द्वारा तय समय और स्थल पर होगी। पूर्व में प्राधिकार की बैठक प्रत्येक तीन माह पर आयोजित किए जाने का प्रविधान किया गया था।
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