JPSC के पूर्व चेयरमैन ने काम देने के बदले दो करोड़ रुपये में किया था सौदा, CID के सामने TDPL मैनेजर बड़ा खुलासा
सीआईडी जांच में खुलासा हुआ है कि जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांगते ने टीडीपीएल को परीक्षा संचालन का ठेका देने के बदले 2 करोड़ रुपये और 20% कमीशन ...और पढ़ें

गोड्डा से गिरफ्तार टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर ने अपने स्वीकारोक्ति बयान में किया है खुलासा।
HighLights
पूर्व अध्यक्ष एल. खियांगते ने 2 करोड़ रुपये का सौदा किया।
टीडीपीएल को ठेका देने के बदले 20% कमीशन मांगा।
मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी ने सीआईडी को खुलासा किया।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं में अनियमितता की जांच कर रही सीआईडी को अब तक की छानबीन में कई अहम जानकारियां मिली है। जेपीएससी की परीक्षाओं को संचालित करने की जिम्मेदारी जिस मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) को दी गई थी उसमें रिश्वत और कमीशन का बड़ा खेल हुआ था।
टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी के अनुसार टीडीपीएल को ठेका दिलाने के एवज में जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष सह झारखंड सरकार के पूर्व मुख्य सचिव सेवानिवृत आइएएस अधिकारी एल. खियांगते ने दो करोड़ रुपये में सौदा किया था।
इतना ही नहीं उन्होंने टीडीपीएल को इस शर्त के साथ परीक्षा संचालित करने की जिम्मेदारी सौंपी थी की एजेंसी को सभी भुगतान के एवज में 20 प्रतिशत का कमीशन भी देना होगा। यह पूरा खुलासा टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी ने सीआइडी के सामने अपनी स्वीकारोक्ति बयान में किया है।
जेपीएससी मेधा घोटाला मामले में प्राथमिकी दर्ज करने के बाद सीआईडी ने 22 जुलाई को टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी को गोड्डा से गिरफ्तार किया था। वह गोड्डा के पोड़ैयाहाट प्रखंड के प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के रूप में कार्यरत था।
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घोटाले का सूत्रधार है मुख्य सचिव का कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र कुमार
सीआईडी ने पिछले दिनों मुख्य सचिव के आवासीय कार्यालय के कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र कुमार को गिरफ्तार किया था। उसकी गिरफ्तारी अभय तिवारी के स्वीकारोक्ति बयान के बाद हुई थी। अभय तिवारी के अनुसार धर्मेंद्र कुमार ने उससे कहा था कि वह टीडीपीएल को जेपीएससी में ओटीआर, ओएमआर, एडमिट कार्ड तैयार करने, उपस्थिति पंजी तैयार करने वा प्रिंटिंग का काम दिला देगा।
इसके लिए उसने 20 से 25 लाख रुपये का कमीशन मांगा। धर्मेंद्र ने टीडीपीएल के कुछ अभ्यर्थियों को भी जेपीएससी परीक्षा पास कराने का आश्वासन दिया था। अभय ने टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह को यह जानकारी दी और वे इस शर्त को मान लिए। इसके बाद रामवीर सिंह ने अपनी एजेंसी के पेपर धर्मेंद्र को दे दिया।
टीडीपीएल के निदेशकों व जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष की हुई मुलाकात
धर्मेंद्र से बातचीत के बाद जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल खियांगते से टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह व सत्यपाल सिंह, मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी, आनंद उर्फ सानंद प्रकाश की मुलाकात हुई। यह मुलाकात रांची के प्रसिद्ध होटल रेडिशन ब्लू में हुई थी। उन्होंने आश्वस्त किया था कि वे एजेंसी की स्ट्रेंथ को देखेंगे, तब कोई निर्णय लेंगे।
फिर दो दिनों के बाद एजेंसी ने जेपीएससी अध्यक्ष व सदस्यों के सामने प्रस्तुति दी। इसके बाद एल. खियांगते ने टीडीपीएल निदेशक रामवीर सिंह को धर्मेंद्र कुमार से मिलने को कहा और एजेंसी की फाइल परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता को दे दिया।
धर्मेंद्र ने कहा, अध्यक्ष एल खियांगते को देने होंगे दो करोड़ रुपये
सीआईडी की अभय तिवारी ने बताया है कि एजेंसी के प्रस्तुति के बाद उसकी और धर्मेंद्र के साथ टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह की मोराबादी मैदान में मुलाकात हुई। तब धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि अध्यक्ष एल. खियांगते को दो करोड़ रुपये व काम दिलवाने के एवज में उसे 20 से 25 लाख रुपये कमीशन के रूप में देने होंगे।
परीक्षा संचालित कराने के एवज में एजेंसी की जो बिलिंग होगी उसकी 20 प्रतिशत राशि अलग से एल खियांगते को देना होगा। एजेंसी ने इस शर्त को भी मान लिया था। अभय के अनुसार जेपीएससी की एक सीट के एवज में 30 से 40 लाख रुपये तक मिलने थे, इसलिए शर्त मानने के कोई नुकसान नहीं था।
मोरहाबादी मैदान में मुलाकात के बाद सबने स्टेट गेस्ट हाउस में एल खियांगते के साथ भी बैठक की जिसमें खियांगते ने सबको धर्मेंद्र के संपर्क में रहने को कहा।
जून 2025 में टीडीपीएल को मिला था परीक्षा संचालन का ठेका
जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष से मुलाकात के बाद जून 2025 में टीडीपीएल को जेपीएससी की परीक्षाओं को संचालित कराने का ठेका मिला था। 27 फरवरी 2026 14वीं सिविल सेवा परीक्षा 2026 के लिए पंजीयन की आखिरी तारीख बढ़ाकर 9 मार्च कर दी गई थी।
इसमें कुल 103 पद पर भर्ती निकला था। 8 अप्रैल 2026 को प्रारंभिक परीक्षा का प्रवेश पत्र जारी हुआ। 19 अप्रैल 2026 को 14वीं सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा हुई थी।
दो जुलाई को परीक्षाफल का प्रकाशन हुआ था जिसमें कुल 2,204 अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा के लिए उत्तीर्ण घोषित हुए थे। मुख्य परीक्षा की तारीख 18 से 20 जुलाई तय की गई थी। प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम आते ही विवाद शुरू हो गया था।