राष्ट्रीय जनजातीय आयोग ने रांची में रिम्स-2 के निर्माण पर लगाई रोक, कहा- आदिवासियों की जमीन पर चल रही सुनवाई
राष्ट्रीय जनजातीय आयोग ने रांची में रिम्स-2 के निर्माण पर सुनवाई पूरी होने तक रोक लगा दी है, क्योंकि यह उपजाऊ भूमि आदिवासियों की आजीविका का एकमात्र सा ...और पढ़ें

डॉक्टर आशा लकड़ा। फाइल फोटो
HighLights
रिम्स-2 निर्माण पर सुनवाई पूरी होने तक रोक।
उपजाऊ भूमि आदिवासियों की आजीविका का मुख्य साधन।
आईआईएम रांची में जनजातीय छात्रा के भेदभाव की शिकायत।
जागरण संवाददाता रांची। राष्ट्रीय जनजातीय आयोग की ओर से रांची, गढ़वा, पलामू, बोकारो, जमाताड़ा, हजारीबाग, अन्य जिलों के 15 मामलों पर आयोग ने सुनवाई की। रांची के सर्किट हाउस में सुबह से ही सुनवाई हुई, जिनमें जिला प्रशासन, राजस्व विभाग के साथ चिकाकर्ता की टीम शामिल थी।
रांची में रिम्स टू के संबंधित मामला 222 एकड़ जमीन पर सुनवाई की हैं। रैयतों के जमीन अधिग्रहण पर रिपोर्ट मांगी। साथ ही, जिन्हें रिम्स टू की जमीन अधिग्रहण पर कितना मुआवजा मिला है, उसकी रिपोर्ट आयोग ने मांगी है। उक्त बातें राष्ट्रीय जनजातीय आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने सुनवाई के पश्चात कहीं।
उन्होंने कहा कि जब तक आयोग में सुनवाई चल रही हैं, तब तक किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं कराया जाए। आयोग ने यह भी कहा कि जिस भूमि पर राज्य सरकार की ओर से रिम्स टू का निर्माण कराने की योजना है, वह उपजाऊ भूमि है।
संबंधित जमीन रैयतों के आजीविका का एकमात्र साधन है। आयोग ने सुझाव देकर कहा कि रिम्म टू केवल रांची ही मांग नहीं राज्य के अन्य जिलों पर भी रिम्स टू बनने चाहिए। खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को इलाज के लिए रांंची आना पड़ता है।
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गुमला खूंटी, पूर्वी सिंहभूम, पश्चमी सिंहभूम, डुमरी ग्रामीण क्षेत्रों के लोग प्रभावित हैं। सुदूर गांव-दराज के गांवों में परिचालन के एंबूलेस, डॉ. स्त्री रोग विशेषज्ञ का अभाव हैं। इन सभी पर ध्यान देते हुए प्लान तैयारी करने की आवश्यकता है।
जनजातीय सुमदाय के जीवनयापन करने वाली उपजाऊ भूमि पर किसी प्रकार का निर्माण न कराएं। आयोग रिम्स आस्पताल की निरीक्षण कर मंगलवार को रिपोर्ट बनाकर सरकार को सौंपेगा।
पेड़ कटाई पर भी हुई सुनवाई
वहीं, दूसरी ओर बोकारो जिले के वैध कारोबार में वन विभाग और जिला प्रशासन की ओर से काटे गए लाखों पेड़ से संबंधित मामले की सुनवाई करते हुए उन्होंने कहा कि तत्कालीन सीओ ने भी पेड़ काटने की कार्रवाई को गलत ठहराया था। इसलिए जब तक इस मामले की जांच से संबंधित कार्रवाई पूरी नहीं हो जाती, खनन संबंधी कार्यों पर रोक लगाई जाए।
इसी प्रकार, नामकुम थाना क्षेत्र में शिकायतकर्ता की भूमि पर जबरन कब्जा किए जाने से संबंधित मामले की जांच कर संबंधित अधिकारी को निर्देश दिया गया कि पूर्व में जिस अधिकारी के माध्यम से संबंधित जमीन की रजिस्ट्री की गई।
उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाए। वहीं, रांची शहरी क्षेत्र में सरना पूजा स्थल, भुईहरि, बकाश्त संबंधित भूमि की खरीद बिक्री करने से संबंधित मामलों को भी आयोग ने गंभीरता से लिया और अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि संबंधित मामलों की जांच कर नियमानुसार उचित कार्रवाई कर
ट्राइबल छात्रों को कमजोर विद्यार्थी बताकर किया जा रहा भेदभाव
आयोग की बैठक के दौरान IIM रांची से पीएचडी कर रही अनुसूचित जनजाति समुदाय की छात्रा प्रियंका कुजूर अपने माता-पिता के साथ सर्किट हाउस पहुंच कर आईआईएम रांची के प्रबंधन की शिकायत दर्ज कराई।
छात्रा का आरोप है कि अनुसूचित जनजाति समुदाय से आने की वजह से विद्यार्थी के अंकों में पक्षपात किया जा रहा है। प्रियंका कुजूर ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा से यह भी कहा कि मेसरा स्थित निजी संस्था से पास आउट होने के बावजूद उसे कमजोर विद्यार्थी बताकर तंज कसा जाता है।
छात्रा ने कहा कि संस्थान में अंक देने में भी भेदभाव किया जाता है। अभिभावक का कहा कि प्रबंधन के रवैये के वजह से चिंतित और परेशान है। इस पर आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने न्याय दिलाने की बात कही।
छात्रा कि शिकायत पर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग मंगलवार को आइआइएम रांची में आयोग की ओर से होने वाली समीक्षा बैठक के दौरान शिकायत पर जानकारी लेकर न्याय करेंगी।
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