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    झारखंड में फिर 'भीड़' का तांडव: मामूली विवाद पर पलामू में सब्जी विक्रेता की लाठी-डंडों से पीटकर हत्या

    Updated: Tue, 07 Apr 2026 04:28 PM (IST)

    झारखंड के पलामू में एक सब्जी विक्रेता, अब्दुल बारीक मियां, की मामूली विवाद के चलते भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। यह घटना पिपराटांड़ थाना क्षेत ...और पढ़ें

    पलामू में भीड़ हिंसा सब्जी विक्रेता की लाठी-डंडों से हत्या। (फोटो: सांकेतिक)

    पलामू में भीड़ हिंसा सब्जी विक्रेता की लाठी-डंडों से हत्या। (फोटो: सांकेतिक)

    HighLights

    1. सब्जी विक्रेता अब्दुल बारीक मियां की पीट-पीटकर हत्या।

    2. मामूली विवाद के बाद भीड़ ने लाठी-डंडों से हमला किया।

    संवाद सूत्र, मेदिनीनगर (पलामू)। झारखंड के पलामू जिले से दिल दहला देने वाली एक घटना सामने आई है, जहां कानून का खौफ एक बार फिर भीड़ के तंत्र के सामने बौना साबित हुआ।

    जिले के पिपराटांड़ थाना क्षेत्र में एक सब्जी विक्रेता को महज आपसी विवाद के कारण लाठी-डंडों से इस कदर पीटा गया कि उसकी जान चली गई।इस वारदात ने न केवल इलाके में सनसनी फैला दी है, बल्कि राज्य में लगातार भीड़ की हिंसा (Mob Violence) पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।

    बाजार में सरेआम दी गई वारदात को अंजाम

    घटना की पृष्ठभूमि बेहद सामान्य और मामूली विवाद से जुड़ी बताई जा रही है। मृतक की पहचान 40 वर्षीय अब्दुल बारीक मियां के रूप में हुई है, जो केलहवा बाजार में सब्जी बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे।

    जानकारी के मुताबिक, मंगलवार को बाजार में काम के दौरान ही कुछ स्थानीय लोगों के साथ अब्दुल का किसी बात को लेकर विवाद हो गया। चश्मदीदों का कहना है कि शुरू में यह बहस साधारण लग रही थी, लेकिन देखते ही देखते वहां मौजूद कुछ लोग उग्र हो गए। 

    आरोपियों ने बिना सोचे-समझे अब्दुल पर लाठी-डंडों से हमला बोल दिया। मौके पर मौजूद भीड़ मूकदर्शक बनी रही और हमलावर तब तक प्रहार करते रहे जब तक कि वे अचेत होकर गिर नहीं पड़े।

    आनन-फानन में स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें इलाज के लिए एमएमसीएच मेदिनीनगर ले जाया गया, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया। चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया, जिसके बाद परिजनों में चीख-पुकार मच गई।

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    झारखंड में मॉब लिंचिंग का बढ़ता खतरा

    पलामू की यह घटना कोई इकलौती वारदात नहीं है। पिछले कुछ समय से झारखंड के अलग-अलग हिस्सों से भीड़ द्वारा कानून हाथ में लेने की खबरें लगातार आ रही हैं। चाहे चोरी का शक हो या मामूली कहासुनी, लोग पुलिस और अदालत के बजाय मौके पर ही 'न्याय' करने पर उतारू हो जाते हैं।

    सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि लोगों के भीतर कानून का डर कम होना और छोटी-छोटी बातों पर हिंसक हो जाने की प्रवृत्ति इस तरह की घटनाओं को बढ़ावा दे रही है। सब्जी विक्रेता की इस तरह हत्या होना यह दर्शाता है कि समाज में असहिष्णुता किस कदर घर कर चुकी है।

    दहशत के साये में केलहवा बाजार और आसपास का क्षेत्र

    इस हत्याकांड के बाद से पिपराटांड़ थाना क्षेत्र के केलहवा बाजार और आसपास के गांवों में सन्नाटा पसरा हुआ है। स्थानीय व्यापारियों और ग्रामीणों में दहशत है कि मामूली विवाद में किसी की जान लेना अब आम होता जा रहा है।

    घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुंचा और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

    पुलिस की जांच और आरोपियों की तलाश

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने आरोपियों की धरपकड़ के लिए विशेष अभियान शुरू कर दिया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, कुछ संदिग्धों की पहचान कर ली गई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।

    थाना प्रभारी ने बताया कि किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी और इस मामले में शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या इस हिंसा के पीछे कोई पुरानी रंजिश थी या यह अचानक उपजा आक्रोश मात्र था।

    फिलहाल, अब्दुल बारीक मियां के परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव वाले सरकार और प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि पीड़ित परिवार को न्याय मिले और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए ताकि भविष्य में कोई ऐसी हिमाकत न कर सके।

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