इंस्टाग्राम पर दोस्ती के शक में पिता-पुत्र ने गला घोंटा, साक्ष्य छिपाने को वाराणसी से पंडित बुला कराई 'शांति पूजा'
रांची के रातू में 12 वर्षीय नाबालिग की हत्या में दुखद व चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुजारी सुबोध कुमार व बेटे राहुल को जेल भेजा गया। इंस्टाग्राम पर द ...और पढ़ें

रांची नाबालिग हत्याकांड: इंस्टाग्राम दोस्ती के शक में हत्या, पिता-पुत्र गिरफ्तार। (फोटो: जागरण)
HighLights
नाबालिग की हत्या कर शव को गया में जलाया गया।
इंस्टाग्राम पर दोस्ती को लेकर राहुल ने गला घोंटा।
पुजारी सुबोध और बेटे राहुल को पुलिस ने भेजा जेल।
जागरण संवाददाता, रांची। रातू इलाके में नाबालिग की हत्या और शव का अंतिम संस्कार करने के आरोप में पुलिस ने आरोपित पुजारी सुबोध कुमार और उसके पुत्र राहुल कुमार को सोमवार को जेल भेज दिया। जांच में सामने आया है कि पारिवारिक विवाद और सामाजिक बदनामी के डर से इस घटना को अंजाम दिया गया।
ग्रामीण एसपी के अनुसार, 2 अप्रैल को सुबोध कुमार के घर में पिछले आठ वर्षों से रह रही नाबालिग लड़की के अचानक लापता होने पर ग्रामीणों ने हंगामा किया था। इसके बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की।
प्रारंभिक जांच में फाॅरेंसिक टीम को कोई ठोस सुराग नहीं मिला, जिससे मामला और पेचीदा हो गया। हालांकि तकनीकी साक्ष्यों और टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज की जांच में बड़ा खुलासा हुआ। फुटेज में देखा गया कि आरोपित पिता और पुत्र नाबालिग को एम्बुलेंस में ले जाते नजर आ रहे हैं।
इसके बाद पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की, जिसमें उन्होंने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि नाबालिग की दोस्ती राहुल के साले से इंस्टाग्राम के माध्यम से हो गई थी और दोनों के बीच लगातार बातचीत हो रही थी।
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इस बात को लेकर राहुल को आशंका थी कि नाबालिग भी उसकी बहन की तरह किसी दिन घर छोड़कर भाग सकती है। इसी शक और सामाजिक लोक लाज के डर से राहुल का नाबालिग से अक्सर विवाद होता रहता था।
झगड़ा होने के बाद राहुल ने घोंट दिया था गला
घटना के दिन भी राहुल और नाबालिग के बीच कहासुनी हुई, जिसके बाद गुस्से में राहुल ने नाबालिग का गला घोंटकर हत्या कर दी। मामले को छिपाने के लिए एक डाक्टर को घर बुलाया गया, जिसने नाबालिग को मृत घोषित कर दिया।
इसके बाद एम्बुलेंस की व्यवस्था कर शव को गया ले जाकर अंतिम संस्कार कर दिया गया। पुलिस ने इस मामले में एम्बुलेंस को जब्त कर लिया है। एम्बुलेंस चालक पिंटू कुमार सिंह ने बताया कि उसे बताया गया था कि 13 वर्षीय बच्ची की मौत हो गई है और उसे अंतिम संस्कार के लिए गया ले जाना है।
पांच वर्ष की उम्र में पुजारी नाबालिग को लेकर आया था घर
जांच में यह भी सामने आया कि नाबालिग की मां का पहले ही निधन हो चुका था, पिता दिव्यांग हैं। पांच वर्ष की उम्र में ही उसे रांची लाकर सुबोध कुमार के घर में रखा गया था। परिवार की परिस्थितियों के कारण वह पूरी तरह उन्हीं पर निर्भर थी।
घटना के बाद आरोपितों ने नाबालिग के पिता को भी गुमराह करने की कोशिश की और उसे यह कहने को कहा कि बेटी आई थी और कुछ देर बाद चली गई। पुलिस के पूछताछ में पिता ने भी शुरुआत में यही बयान दिया, जिससे जांच प्रभावित हुई। हालांकि, बाद में सच्चाई सामने आने पर पूरा मामला स्पष्ट हो गया।
वाराणसी से पुजारी बुलाकर घर में कराई गई थी शांति पूजा
पुलिस के अनुसार नाबालिग की घर में हत्या करने के बाद सुबोध कुमार ने वाराणसी से पुजारी बुलाकर घर में पूजा कराई थी, ताकि शांति बनी रहे। पुलिस का कहना है कि डाॅक्टर की भूमिका की जांच जारी है, जबकि एम्बुलेंस चालक का बयान कोर्ट में दर्ज कराया जाएगा।
अपराध छिपाने के लिए आरोपितों ने शातिराना तरीका अपनाया:
- सबूत मिटाया: हत्या के बाद एक डॉक्टर को बुलाकर उसे मृत घोषित कराया और फिर एम्बुलेंस के जरिए शव को चुपचाप बिहार के गया ले जाकर अंतिम संस्कार कर दिया।
- सीसीटीवी से खुलासा: टोल प्लाजा के फुटेज में पिता-पुत्र शव के साथ एम्बुलेंस में नजर आए, जिससे पुलिस का शक हकीकत में बदल गया।
- पाप छिपाने का जतन: घर में हत्या करने के बाद पुजारी सुबोध कुमार ने वाराणसी से विशेष पुजारी बुलाकर घर में शांति पूजा भी कराई, ताकि किसी को शक न हो।
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