Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    जगन्नाथपुर रथमेला में मिठाइयों की गुणवत्ता पर उठे सवाल, बासी और मिलावटी सामान बेचने का आरोप

    Updated: Mon, 20 Jul 2026 01:11 AM (IST)

    जगन्नाथपुर रथमेला में बिक रही मिठाइयों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, ग्राहक सस्ते तेल और डालडा के उपयोग की शिकायत कर रहे हैं। ...और पढ़ें

    मिठाइयों की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल।

    मिठाइयों की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल।

    HighLights

    1. मेले में मिठाइयों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठे।

    2. ग्राहक सस्ते तेल और डालडा के उपयोग की शिकायत कर रहे।

    3. खाद्य सुरक्षा विभाग की निष्क्रियता पर भी प्रश्नचिह्न लगा।

    जागरण संवाददाता, रांची। जगन्नाथपुर मंदिर परिसर में आयोजित नौ दिवसीय रथमेला में श्रद्धालुओं और खरीदारों की भीड़ उमड़ रही है, लेकिन मेले में बिक रही मिठाइयों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    मेला के तीसरे दिन कई दुकानों में गाजा, बालूशाही, बर्फी, लड्डू और अन्य मिठाइयों की बिक्री जोरों पर रही, लेकिन इनमें इस्तेमाल हो रही सामग्री को लेकर ग्राहकों ने चिंता जताई है।

    वहीं, मेले में मिठाई तैयार कर रहे कुछ दुकानदारों ने बताया कि वे हर वर्ष इसी प्रकार के तेल, मैदा और चीनी का उपयोग कर मिठाइयां बनाते हैं।

    कई दुकानदारों ने यह भी स्वीकार किया कि रथमेला को ध्यान में रखते हुए मिठाइयों का निर्माण एक सप्ताह पहले ही शुरू कर दिया जाता है। ऐसे में ताजगी और गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

    ग्राहकों का आरोप है कि मिठाइयों में शुद्ध घी या गुणवत्तापूर्ण तेल का उपयोग नहीं किया जा रहा, बल्कि सस्ते तेल और डालडा का इस्तेमाल किया जा रहा है।

    स्वाद और गुणवत्ता से ग्राहक निराश

    मेले में खरीदारी करने पहुंचे कई लोगों ने बताया कि मिठाइयों का स्वाद पहले जैसा नहीं रहा। उनका कहना है कि अधिकांश मिठाइयां अत्यधिक सख्त हैं और उनमें सिर्फ चीनी की परत होने के कारण मिठास महसूस होती है।

    ग्राहकों के अनुसार मिठाइयों की गुणवत्ता में लगातार गिरावट आ रही है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़ सकते हैं।

    खाद्य सुरक्षा विभाग की भूमिका पर सवाल

    मेले में हजारों लोग प्रतिदिन पहुंच रहे हैं, लेकिन खाद्य सुरक्षा विभाग की सक्रियता नजर नहीं आ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विभाग आमतौर पर मेले के अंतिम दिनों में ही जांच अभियान चलाता है, जबकि शुरुआती दिनों में गुणवत्ता की निगरानी नहीं होने से मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री बढ़ जाती है। लोगों ने नियमित जांच और नमूना परीक्षण की मांग की है।

    टेंडर शुल्क का असर कारोबार पर भी कायम

    दुकानदारों का कहना है कि इस बार मेला में स्टाल लगाने के लिए अधिक राशि देनी पड़ रही है। उनका दावा है कि बढ़े हुए खर्च का असर सीधे मिठाइयों की कीमत और गुणवत्ता पर पड़ रहा है।

    कई व्यापारियों का मानना है कि पहले की तुलना में इस वर्ष मेले में ग्राहकों की खरीदारी भी कम हुई है। मिठाइयों के अलावा अन्य घरेलू और मनोरंजन संबंधी सामानों की बिक्री पर भी इसका असर दिखाई दे रहा है।

    खबरें और भी

    स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मेले में बिक रहे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच कराने और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

    यह भी पढ़ें- जगन्नाथपुर रथ मेला में पार्किंग शुल्क पर फूटा गुस्सा, दोपहिया के ₹60 और कार के वसूले जा रहे ₹120