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    रिम्स में चूहों ने काट दिए कई विभागों के संपर्क, चट कर गए दवाएं

    Updated: Sat, 18 Jul 2026 05:29 AM (GMT+05:30)

    रांची के रिम्स अस्पताल में चूहों का आतंक गंभीर समस्या बन गया है, जिससे टेलीफोन तार, दवाएं, राशन और चिकित्सा उपकरण क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। ...और पढ़ें

    आंकाेलॉजी विभाग के स्टोर रूम में चूहों का आतंक। (जागरण)

    आंकाेलॉजी विभाग के स्टोर रूम में चूहों का आतंक। (जागरण)

    HighLights

    1. रिम्स में चूहों ने टेलीफोन तार, दवाएं और राशन कुतरे।

    2. डेढ़ साल बाद अस्पताल में पेस्ट कंट्रोल की तैयारी शुरू।

    3. चूहों से अस्पताल की सुरक्षा और उपकरणों को खतरा।

    जागरण संवाददाता, रांची। राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में चूहों का आतंक एक बार फिर गंभीर समस्या बन गया है। स्थिति यह है कि चूहे अस्पताल के कंट्रोल रूम, निदेशक कार्यालय, रेडियोलाजी, आंकोलाजी विभाग, बीएसएनएल टेलीफोन नेटवर्क, किचन और स्टोर रूम तक में नुकसान पहुंचा रहे हैं।

    कहीं टेलीफोन के तार कुतर दिए गए हैं तो कहीं मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होने वाले सिरिंज, ग्लव्स और अन्य चिकित्सा सामग्री खराब हो रही है।

    लगातार बढ़ रही समस्या को देखते हुए रिम्स प्रबंधन ने डेढ़ वर्ष बाद फिर से पेस्ट कंट्रोल कराने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए एजेंसी चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

    पहले चरण में उन भवनों और विभागों में पेस्ट कंट्रोल कराया जाएगा, जहां चूहों का सबसे अधिक प्रकोप है। इसके बाद अन्य विभागों में भी अभियान चलाया जाएगा।

    अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल की सुरक्षा, उपकरणों और दवाओं को बचाने के लिए यह कदम जरूरी हो गया है। रिम्स प्रबंधन का कहना है कि पहले चरण में सबसे अधिक प्रभावित विभागों में पेस्ट कंट्रोल कराया जाएगा।

    इसके बाद पूरे अस्पताल परिसर का सर्वे कर अन्य भवनों को भी अभियान में शामिल किया जाएगा, ताकि अस्पताल में मरीजों, कर्मचारियों और चिकित्सा उपकरणों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    आंकोलॉजी विभाग में दवाओं का स्टाक किया खराब 

    हाल में आंकोलॉजी विभाग के चौथे तल स्थित स्टोर रूम की जांच में कई कार्टन चूहों द्वारा कुतरे हुए मिले। इनमें सिरिंज, ग्लव्स और अन्य चिकित्सा सामग्री शामिल थी।

    विभाग की सिस्टर इंचार्ज ने बताया कि क्षतिग्रस्त सामान हटाकर दोबारा नई सामग्री मंगानी पड़ी। उनका कहना है कि स्टोर रूम में चूहों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन सामान रखने के लिए कोई वैकल्पिक स्थान उपलब्ध नहीं है। इससे हर समय महंगे चिकित्सा उपकरण और दवाएं खराब होने का खतरा बना रहता है। यही हाल अन्य विभागों के स्टोर रूम का है।

    कंट्रोल रूम और संचार व्यवस्था भी प्रभावित 

    चूहों का असर केवल दवाओं तक सीमित नहीं है। अस्पताल के कंट्रोल रूम और बीएसएनएल नेटवर्क बाक्स में भी चूहों ने केबल और टेलीफोन तार कुतर दिए हैं।

    इसके कारण कई टेलीफोन लाइनें बंद हो गई हैं, जबकि कुछ सर्वर और संचार उपकरण भी प्रभावित हुए हैं। इससे विभिन्न विभागों के बीच समन्वय में परेशानी हो रही है। सूत्रों के अनुसार कई जगह बिजली और नेटवर्क के केबलों की बार-बार मरम्मत करानी पड़ रही है, जिससे अतिरिक्त खर्च भी बढ़ रहा है।

    किचन में राशन तक नहीं सुरक्षित

    रिम्स के केंद्रीय किचन में भी चूहे बड़ी समस्या बने हुए हैं। यहां रखे राशन और खाद्य सामग्री को लगातार नुकसान पहुंच रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि कई बार खाद्यान्न को फेंकना पड़ जाता है, क्योंकि चूहे उसे कुतर देते हैं। इससे खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता दोनों प्रभावित होती हैं।

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    निदेशक कार्यालय भी नहीं बचा

    चूहों का आतंक केवल वार्ड और स्टोर तक सीमित नहीं है। निदेशक कार्यालय में भी कर्मचारी चूहों की आवाजाही से परेशान हैं। कई बार कार्यालय में रखी फाइलों और अन्य सामान को भी नुकसान पहुंचने की शिकायत सामने आई है। जिसके बाद अब पेस्ट कंट्रोल एजेंसी की तलाश शुरू कर दी गई है।

    दो साल से बंद था पेस्ट कंट्रोल

    रिम्स में पिछले करीब दो वर्ष से नियमित पेस्ट कंट्रोल नहीं कराया गया है। अधिकारियों का मानना है कि इसी कारण चूहों की संख्या तेजी से बढ़ी है।

    इससे पहले भी अस्पताल में चूहों का इतना आतंक था कि मरीजों के पैर और हाथ कुतरने की घटनाएं राष्ट्रीय स्तर तक चर्चा में रही थीं। उसके बाद नियमित पेस्ट कंट्रोल शुरू किया गया था, जिससे स्थिति कुछ हद तक नियंत्रित हुई थी।

    क्यों बढ़ रहे हैं चूहे?

    • मरीजों के स्वजन वार्डों में ही भोजन करते हैं।
    • खाने-पीने की सामग्री वार्ड और बेड के पास रखी जाती है।
    • बचा हुआ भोजन और कचरा समय पर नहीं हटाया जाता।
    • स्टोर रूम में लंबे समय तक कार्टन और पैकिंग सामग्री जमा रहती है।
    • भवनों के बेसमेंट, पाइपलाइन और फाल्स सीलिंग में चूहों के बिल बन जाते हैं।
    • नियमित पेस्ट कंट्रोल और निगरानी का अभाव रहता है।

    पेस्ट कंट्रोल के अलावा क्या करना होगा?

    • सभी वार्डों के अंदर स्वजनों के भोजन करने पर सख्ती से रोक।
    • खाद्य सामग्री को एयरटाइट कंटेनर में सुरक्षित रखना।
    • प्रतिदिन बायोमेडिकल और सामान्य कचरे का समय पर निस्तारण।
    • स्टोर रूम की नियमित सफाई और पुराने कार्टनों का निष्पादन।
    • पाइपलाइन, केबल डक्ट और दीवारों के छिद्रों को सील करना।
    • हर तीन से छह माह के अंतराल पर नियमित पेस्ट कंट्रोल।

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