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    साहिबगंज: संसाधनों की कमी से 15 साल से बंद ANM प्रशिक्षण केंद्र, निजी नर्सिंग में ट्रेनिंग लेने को मजबूर छात्राएं

    Updated: Fri, 24 Jul 2026 03:22 PM (IST)

    साहिबगंज में 2011 में बना एएनएम प्रशिक्षण केंद्र 15 साल बाद भी संसाधनों के अभाव में शुरू नहीं हो सका, जिससे करोड़ों रुपये बर्बाद हो गए। ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. साहिबगंज में 2011 में बना एएनएम प्रशिक्षण केंद्र।

    2. 15 साल से संसाधनों के अभाव में बंद पड़ा।

    3. करोड़ों रुपये बर्बाद, छात्राएं निजी कॉलेजों में मजबूर।

    जागरण संवादादाता, साहिबगंज। राज्य सरकार ने दूरगामी सोच के साथ जिला सदर अस्पताल में छह अगस्त 2011 में एएनएम प्रशिक्षण केन्द्र का विशाल भवन बनाकर उद्घाटन कराया गया था।

    जिला वासियों खासकर मध्यम वर्ग के लोगो को एक उम्मीद जगी थी कि जो बच्चियां नर्सिंग सेक्टर में जाना चाहती है वो बहुत कम खर्च में प्रशिक्षण लेकर रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकती है। लेकिन सभी के उम्मीद पर पानी फिर गया।

    15 साल बाद भी राज्य सरकार की नींद नहीं खुली। 2011 में भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार थी और आज भी है। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री हेमलाल मुर्मू के पहल पर प्रशिक्षण केन्द्र बनवाया गया था। इस प्रशिक्षण केन्द्र को बनाने में दो करोड आठ लाख 69 हजार लागत आयी थी।

    राज्य सरकार की तरफ से प्रशिक्षक बहाल हुआ न प्रशिक्षण के उपकरण उपलब्ध कराए गए। धीरे धीरे मामला ठंडा बस्ता में चलता गया। जिसकी वजह से जिला की बच्चियां भागलपुर, मालदा, पटना, कटिहार जिला में निजी नर्सिंग कालेजों में जाकर प्रशिक्षण ले रही है।

    निजी संचालक द्वारा मोटी राशि की उगाही किया जा रहा है। छात्रों व उसके स्वजनों का आर्थिक दोहन होता है। कुछ छात्राओं ने बताया कि चार से पांच लाख एएनएम प्रशिक्षण के नाम पर वसूला जाता है लेकिन रसीद कम राशि का थमा दिया जाता है।

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    यदि यह संस्थान सरकारी स्तर पर संचालित होता तो संभवत: गरीब मेधावी बच्चियों का दाखिला आसानी से हो जाता और अस्पताल में मरीजों के सेवा देने के साथ काफी कुछ सीखने को मौका मिलता।

    धरोहर के तौर देखा जाएगा एएनएम प्रशिक्षण केन्द्र

    15 साल पहले एएनएम प्रशिक्षण केन्द्र का भवन बनाया गया था। आज यह भवन पुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका है। छज्जा टूटकर गिरने लगा है। छज्जा का लोहा का ग्रिल जंग लगकर गिरने लगा है।

    भवन का रख रखाव सही तरह से नहीं होने के कारण भवन का खिड़की, दरवाजा, बिजली का वायरिंग, पाइप लाइन आदि क्षतिग्रस्त हो गया है। भवन के खिड़की व दीवालों पर जंगल झाड़ उग आये हैं।

    यह भवन अब धरोहर के तौर पर बनकर रह गया है। आने जाने वाले नए लोग बोर्ड पढ़कर यह समझा जाते है कि कभी प्रशिक्षण केन्द्र के लिए यह भवन बनाया गया था। लेकिन लापरवाह सरकार की वजह से करोड़ो रुपया पानी में बर्बाद हो गया। जनता का पैसा का दूरूपयोग किया गया है। फिलहाल इस भवन को स्वास्थ्य विभाग द्वारा दवाई स्टाक के तौर पर काम लिया जा रहा है।

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    नर्सिंग के क्षेत्र में नौकरी पाना आसान है बसर्ते प्रशिक्षण आसानी व कम शुल्क के साथ मिल जाए। सरकारी व्यवस्था में एएनएम प्रशिक्षण केन्द्र का भवन बना लेकिन 15 साल बीतने के बाद भी केन्द्र की शुरूवात नहीं किया गया। यदि यह केन्द्र खुलता को हम लड़कियों को काफी राहत मिलती। जिला प्रशासन को चाहिए कि संज्ञान लेकर शुभारंभ कराए।

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    राखी रक्षित, छात्रा

    15 साल में सरकार ने एएनएम प्रशिक्षण केन्द्र में संसाधन की पूर्ति नहीं करना सवालिया निशान है। जब संसाधन की आपूर्ति नहीं करना था तो करोड़ो की लागत से भवन क्यों बना दिया गया। देखा जाए तो जिला में कई भवन बनाए गए जो दूसरे कार्य में उपयोग किया जा रहा है। ऐसा काम राज्य सरकार व मंत्री को बंद कर देना चाहिए। जो बच्चियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करे।

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    कुमारी आस्था, छात्रा

    जिला में मेडिकल कालेज प्रस्तावित है। मेडिकल कालेज खुलने के बाद सरकारी व्यवस्था में बच्चियों को प्रशिक्षण मिलनी शुरू हो जाएगी। जिला सदर अस्पताल में बने एएनएम प्रशिक्षण केन्द्र क्यों नहीं खुला, इसकी जानकारी हमें नहीं है। इसकी जानकारी विभाग से ली जाएगी।

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    डॉ. रामदेव पासवान, सीएस