साहिबगंज में रेलवे के सामान पर डाका: 2 साल में 1621 बेडशीट-कंबल गायब; कोच अटेंडेंट को करनी पड़ रही भरपाई
साहिबगंज से गुजरने वाली ट्रेनों से पिछले दो सालों में 1621 बेडशीट, तौलिया और कंबल जैसे रेलवे के सामान गायब हो गए हैं। ...और पढ़ें
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HighLights
साहिबगंज ट्रेनों से 2 साल में 1621 लिनेन गायब हुए।
बेडशीट, तौलिया, कंबल और तकिया कवर शामिल हैं।
लापता सामान की भरपाई कोच अटेंडेंट कर रहे।
देव आर्यन, साहिबगंज। साहिबगंज से गुजरने वाली ट्रेनों से विगत दो साल में 1621 बेडशीट, तौलिया, कंबल व तकिया कवर गायब हुए हैं। इन ट्रेनों में गया- हावड़ा एक्सप्रेस, वनांचल, हावड़ा जमालपुर एक्सप्रेस, ब्रह्मपुत्र मेल, हावड़ा जयनगर एक्सप्रेस, फरक्का एक्सप्रेस, कामाख्या गया एक्सप्रेस, आनंद विहार एक्सप्रेस, दानापुर इंटरसिटी एक्सप्रेस सहित अन्य ट्रेन शामिल है।
हालांकि, वित्तीय वर्ष 2024-25 की अपेक्षा 2025-26 में चोरी में कुछ कमी आयी है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल 875 आइटम गायब हुए थे। इनमें 243 बेडशीट, 192 तकिया कवर, 183 तौलिया, 59 तकिया और 98 कंबल शामिल हैं।
वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 में 746 आइटम गायब हुए। इनमें 254 बेडशीट, 190 तकिया कवर, 159 तौलिया, 54 तकिया और 89 कंबल शामिल हैं। यानी दो वर्षों में कुल 1,621 लिनेन आइटम रेलवे के रिकार्ड से कम पाए गए। हालांकि, इनमें से कुछ सामान लापरवाही या अन्य कारणों से भी गायब हुए होंगे लेकिन अधिकतर यात्री अपने साथ ले गए।
एसी कोचों में मिलता बेडरोल
रेलवे एसी कोचों में सफर करने वाले यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए बेडरोल किट देती है। इसमें बेडशीट, तकिया, तकिया कवर, हाथ तौलिया और कंबल शामिल होते हैं।
इन वस्तुओं का उपयोग केवल यात्रा के दौरान किया जाना है और यात्रा समाप्त होने पर इन्हें रेलवे को वापस करना होता है। लेकिन कुछ यात्री इसे यात्रा समाप्त होने के बाद बैग में लेकर चले जाते हैं।
अधिकारियों के अनुसार, ट्रेनों के गंतव्य स्टेशन पर पहुंचने के बाद बेड रोल की गिनती की जाती है। यदि कोई सामान कम मिलता है तो कोच एटेंडेंट को इसकी क्षतिपूर्ति करनी होती है।
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ट्रेनों के गंतव्य स्टेशन पर पहुंचने के बाद बेड रोल की गिनती की जाती है। यदि कोई सामान कम मिलता है तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित लिनेन सप्लाई करने वाले ठेकेदार की होती है। ऐसे में कम हुए सामान का आर्थिक भार भी ठेकेदार को उठाना पड़ता है। हालांकि, यह भी आवश्यक है कि यह पता लगाया जाए कि सामान यात्रियों द्वारा साथ ले जाया गया, कहीं रास्ते में गुम हुआ या फिर किसी स्तर पर उसकी चोरी अथवा अनियमितता हुई।
रसराज मांझी, पीआरओ मालदा रेल मंडल