पिता की उंगली पकड़कर खेली हॉकी, आज टीम की कप्तान; अर्जुन अवॉर्डी सलीमा टेटे की संघर्ष की कहानी
सलीमा टेटे ने बांस की स्टिक से अपना हॉकी सफर शुरू किया और आज वे भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान हैं। उनकी यह कहानी उनके बेमिसाल संघर्ष और अर्जुन अवार् ...और पढ़ें

महिला हॉकी टीम की कप्तान सलीमा टेटे
HighLights
बांस की स्टिक से शुरू हुआ सलीमा टेटे का सफर।
आज भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान हैं सलीमा।
अर्जुन अवॉर्डी सलीमा टेटे की प्रेरणादायक संघर्ष गाथा।
डिजिटल डेस्क, सिमडेगा। झारखंड के लिए एक बार फिर गर्व का अवसर सामने आया है। हॉकी इंडिया ने 15 से 30 अगस्त तक नीदरलैंड्स और बेल्जियम में आयोजित होने वाले एफआईएच महिला हॉकी विश्व कप के लिए 20 सदस्यीय भारतीय टीम की घोषणा कर दी है।
इस टीम में झारखंड की 4 बेटियों को शामिल किया गया है, जिसमें सिमेडेगा की सलीमा टेटे, ब्यूटी डुंगडुंग, दीपिका सोरेंग और निक्की प्रधान खूंटी निवासी को शामिल किया गया है।
वहीं इस टीम की कप्तानी सिमडेगा की स्टार मिडफील्डर सलीमा टेटे को सौंपी गई है। उनके नेतृत्व में भारतीय टीम विश्व कप में पदक जीतने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरेगी। सलीमा के कप्तान बनने की खबर से पूरे झारखंड, खासकर सिमडेगा जिले में उत्साह और खुशी का माहौल है।

बांस की स्टिक से शुरू हुआ सफर
सिमडेगा जिले के सदर प्रखंड स्थित छोटे से गांव बड़कीछापर की रहने वाली सलीमा टेटे का सफर संघर्ष और मेहनत की मिसाल है। बचपन में वह अपने पिता की उंगली थामकर गांव के उबड़-खाबड़ मैदानों में हॉकी खेलने जाया करती थीं। हाथ से बनाई गई बांस की स्टिक और साधारण गेंद से उन्होंने हॉकी खेलना शुरू किया।
ग्रामीण स्तर के टूर्नामेंटों में अपनी प्रतिभा दिखाने के बाद उनका चयन राज्य स्तरीय प्रशिक्षण केंद्र में हुआ। इसके बाद उन्होंने झारखंड टीम का प्रतिनिधित्व किया और अपनी शानदार प्रतिभा के दम पर भारतीय महिला हॉकी टीम में जगह बनाई।
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2016 में भारतीय टीम का किया प्रतिनिधित्व
सलीमा टेटे ने पहली बार साल 2014 में झारखंड टीम का प्रतिनिधित्व किया। अपनी प्रतिभा के दम पर उन्होंने साल 2016 में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया। वहीं साल 2018 में जूनियर भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तानी संभाली। इसके बाद साल 2024 में भारतीय महिला टीम की कमान संभालने की जिम्मेदारी मिली।
सलीमा टेटे ने अपने करियर में ओलंपिक, हॉकी विश्व कप, राष्ट्रमंडल खेल, एशियाई खेल और एशिया कप समेत लगभग सभी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। वर्ष 2021 में उन्होंने टोक्यो ओलंपिक में भारतीय टीम का हिस्सा बनकर देश का गौरव बढ़ाया। उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन को देखते हुए वर्ष 2025 में उन्हें देश के प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
आज भी गांव में रहता है परिवार
सलीमा की सफलता के बावजूद उनका परिवार आज भी बड़कीछापर गांव में सादगी भरा जीवन जी रहा है। वर्ष 2021 में जब सलीमा टोक्यो ओलंपिक के लिए चुनी गई थीं, तब उनके घर में टीवी तक नहीं था। उनके पिता सुलक्सन टेटे और भाई अनमोल लकड़ा आज भी खेती-किसानी करते हैं। परिवार ने हाट में दुकान लगाने और मनरेगा में मजदूरी कर सलीमा के सपनों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाई।

परिवार से मिला मजबूत समर्थन
सलीमा की चार बहनें इलिसन, अनिमा, सुमंती और महिमा टेटे हैं। इनमें उनकी छोटी बहन महिमा टेटे भी अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी हैं। पिता सुलक्सन टेटे बताते हैं कि सलीमा ने कठिन परिस्थितियों में लगातार मेहनत की और कभी हार नहीं मानी। बचपन में वह उनके साथ मैदान जाती थीं और वहीं से उनके खेल जीवन की नींव पड़ी।