चाईबासा हवाई सेवा का मुद्दा संसद में गूंजा, उड़ान योजना में शामिल होने पर भी नहीं मिली बोली
पश्चिमी सिंहभूम के चाईबासा में हवाई सेवा की कमी का मुद्दा संसद में उठा। सांसद जोबा माझी ने लोकसभा में बताया कि औद्योगिक केंद्र होने के बावजूद चाईबासा ...और पढ़ें

सांसद जोबा माझी (फाइल फोटो)

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जागरण संवाददाता, चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा को हवाई सेवा से जोड़ने का मुद्दा अब संसद तक पहुंच गया है। क्षेत्र की सांसद जोबा माझी ने लोकसभा में लिखित प्रश्न के माध्यम से इस गंभीर समस्या को उठाया।
सांसद ने अपने प्रश्न में कहा कि लौह अयस्क खनन और बड़े औद्योगिक केंद्र होने के बावजूद चाईबासा आज भी सीधे हवाई संपर्क से वंचित है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि यहां के लोगों को हवाई यात्रा के लिए दुर्गम रास्तों से करीब 200 किलोमीटर दूर रांची जाना पड़ता है।
इस पर जवाब देते हुए नागर विमानन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने बताया कि चाईबासा की हवाईपट्टी वर्तमान में केवल हेलीपैड के रूप में उपयोग में है और वहां नियमित उड़ान संचालन के लिए आवश्यक रनवे उपलब्ध नहीं है।
उड़ान योजना में शामिल, पर नहीं मिली बोली
मंत्री ने बताया कि चाईबासा हवाईपट्टी को सरकार की ‘उड़ान’ क्षेत्रीय संपर्क योजना के तहत असेवित हवाईपट्टियों की सूची में शामिल किया गया है।
इसके बावजूद अब तक किसी भी एयरलाइन कंपनी ने यहां से उड़ान सेवा शुरू करने के लिए कोई प्रस्ताव (बोली) नहीं दी है।
प्रस्ताव मिलने पर ही होगा विकास
सरकार ने स्पष्ट किया कि उड़ान योजना के तहत किसी भी हवाई अड्डे का विकास और उन्नयन तभी किया जाता है, जब कोई एयरलाइन बोली प्रक्रिया में हिस्सा लेकर सेवा शुरू करने की इच्छा जताती है। मंत्री के अनुसार, यदि भविष्य में कोई एयरलाइन चाईबासा को जोड़ने के लिए प्रस्ताव देती है, तो उस पर योजना के प्रावधानों के अनुसार विचार किया जाएगा।
उद्योग और पर्यटन को मिल सकती है रफ्तार
चाईबासा और सारंडा क्षेत्र में खनन, इस्पात उद्योग और पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। हवाई सेवा शुरू होने से न केवल उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि क्षेत्रीय विकास को भी नई गति मिल सकती है।