'साहब का कमीशन देना होगा, वरना बंद कर देंगे श्रम कार्ड'; झारखंड में वायरल ऑडियो से वसूली का खेल उजागर
पश्चिमी सिंहभूम में श्रम विभाग की योजनाओं में बड़े पैमाने पर कमीशनखोरी का खुलासा हुआ है। बिचौलिए, प्रज्ञा केंद्र संचालक और विभागीय कर्मी श्रम कार्ड बन ...और पढ़ें

फोन कॉल करती हुआ व्यक्ति। सांकेतिक फोटो

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संवाद सहयोगी, चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिले में श्रम विभाग से जुड़ी योजनाओं में कमीशनखोरी का बड़ा मामला सामने आया है। श्रम कार्ड बनाने से लेकर विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाने तक कथित रूप से बिचौलियों, प्रज्ञा केंद्र संचालकों और विभागीय कर्मियों की मिलीभगत से गरीब लाभुकों से अवैध वसूली की जा रही है।
इंटरनेट मीडिया पर वायरल एक ऑडियो में चाईबासा के नीमडीह स्थित एक प्रज्ञा केंद्र संचालक को श्रम कार्यालय के नाम पर कमीशन की मांग करते हुए सुना जा सकता है।
ऑडियो में स्पष्ट कहा जा रहा है कि “साहब का कमीशन देना होगा, नहीं देने पर श्रम कार्ड बंद कर दिया जाएगा”, जिससे लाभुकों में भय का माहौल है।
इस प्रकरण से श्रम अधीक्षक कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार की गहराई का अंदाजा लगाया जा सकता है, जहां मोबाइल के जरिए ही सीधे लाभुकों से पैसे की मांग की जा रही है।
लाखों का घोटाला!
जानकारी के अनुसार वर्ष 2016 में जिले में 95 श्रमिक मित्रों की नियुक्ति की गई थी, जिन्हें प्रति आवेदन 12 रुपये मानदेय मिलता था। कम पारिश्रमिक के कारण अधिकांश श्रमिक मित्रों ने काम छोड़ दिया और वर्तमान में केवल 12 ही कार्यरत हैं।
इसी स्थिति का लाभ उठाकर कार्यालय में कथित रूप से कमीशन का खेल शुरू हुआ और लाखों रुपये के घोटाले की आशंका जताई जा रही है। मामले की जानकारी मिलने के बाद उपायुक्त चंदन कुमार के निर्देश पर जांच शुरू कर दी गई है।
जिला श्रम अधीक्षक निशांत तिर्की, जो अवकाश पर थे, वे भी बीच में ही कार्यालय लौट आए हैं। निशांत तिर्की ने बताया कि बिचौलियों द्वारा श्रम अधीक्षक कार्यालय के नाम पर कमीशन वसूली का मामला गंभीर है।
लाभुकों और संबंधित बिचौलियों को जांच के लिए बुलाया गया है। जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
कैसे चलता है कमीशन का खेल?
सूत्रों के अनुसार, बिचौलिये पहले गरीब परिवारों का श्रम कार्ड बनवाने के नाम पर 100 से 200 रुपये लेते हैं। इसके बाद औजार, साइकिल और सिलाई मशीन जैसी योजनाओं में आवेदन कराया जाता है। कार्यालय स्तर पर कथित सेटिंग के तहत आवेदन आगे बढ़ाया जाता है, जिसमें प्रति आवेदन 500 रुपये तक की अवैध वसूली की जाती है।
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योजनाओं की राशि लाभुकों के खाते में आने के बाद भी उनसे कमीशन लिया जाता है। 5000 रुपये की सहायता पर करीब 1200 रुपये, 7000 रुपये की सहायता पर करीब 1500 रुपये तक वसूली और प्रसूता सहायता की 15000 रुपये की राशि में भी करीब 5000 रुपये तक वसूले जाने का आरोप है।
इस पूरे मामले ने जिले में प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है।
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