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    डायन-बिसाही : कुमारडुंगी दोहरे हत्याकांड की वो दास्तां, जिसे सुनकर गांव वालों ने बच्चों को स्कूल भेजना छोड़ा

    Updated: Thu, 19 Feb 2026 08:05 PM (GMT+05:30)

    पश्चिमी सिंहभूम के कुमारडुंगी में डायन बिसाही के शक में एक महिला और उसके मासूम बेटे को पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया गया। इस क्रूर घटना से कुदासाई टोला ...और पढ़ें

    चाईबासा में दोहरे हत्‍याकांड के बाद कलईया गांव पहुंचे डीसी-एसपी और पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता का दिया भरोसा।

    चाईबासा में दोहरे हत्‍याकांड के बाद कलईया गांव पहुंचे डीसी-एसपी और पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता का दिया भरोसा।

    HighLights

    1. मां और मासूम बेटे को पेट्रोल डालकर जिंदा जलाया।

    2. डायन बिसाही के अंधविश्वास में हुई क्रूर वारदात।

    3. गांव में दहशत, पुलिस कर रही गहन जांच।

    जागरण संसू, कुमारडुंगी झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में डायन बिसाही के नाम पर दोहरे हत्‍याकांड ने मानवता को शर्मसार कर दिया है। कुमारडुंगी थाना क्षेत्र के कलाईया गांव (कुदासाई टोला) में एक महिला और उसके मासूम बेटे को पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया गया। 
     
    अंधविश्वास की आग में झुलसी इस क्रूरता ने दो जिंदगियां लील लीं। इस घटना के बाद पूरे जिले में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। 

    दिल दहला देने वाली वारदात 

    मंगलवार की काली रात कुदासाई टोला के लिए कयामत बनकर आई। मिली जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने कोल्हान सिंकु की दूसरी पत्नी ज्योति और उनके मासूम बेटे पीयूष को निशाना बनाया।  
     
    अंधविश्वास में डूबे हमलावरों ने क्रूरता की सारी हदें पार कर सोते हुए मां-बेटे पर पेट्रोल छिड़का और आग लगा दी। आग की लपटों में घिरे मां-बेटे की चीखें आज भी गांव में गूंज रही हैं। 
     
    इस हमले में कोल्हान सिंकु भी गंभीर रूप से झुलस गए। इनका इलाज फिलहाल सदर अस्पताल चाईबासा में चल रहा है। 

    दहशत में ग्रामीण: घरों में कैद हुए लोग, स्कूल बंद 

    घटना के दो दिन बीत जाने के बाद भी कुदासाई टोला में सन्नाटा पसरा है। 55 परिवारों वाले इस टोले में गुरुवार को एक भी बच्चा स्कूल नहीं गया। 
     
    बाजार जाने से लेकर दैनिक कार्यों तक, सब कुछ ठप पड़ा है। ग्रामीणों के मन में इस कदर खौफ है कि गांव में किसी गाड़ी की आवाज सुनते ही लोग अपने घरों के दरवाजे बंद कर अंदर दुबक जा रहे हैं।

    डर के कारण ग्रामीणों ने साध रखी है चुप्‍पी 

    पुलिस की जांच टीम जब गांव पहुंची, तो शुरुआती घंटों में कोई भी ग्रामीण मुंह खोलने को तैयार नहीं था। काफी मान-मनौव्वल के बाद कुछ लोगों ने दबी जुबान में अपनी बात रखी। 
     
    हालांक‍ि ज्‍यादातर लोग आरोपियों के डर से चुप ही रहे। कोल्हान सिंकु के घर के पास से गुजरने में भी लोग अब कतरा रहे हैं।

    सोमवारी सिंकु की आपबीती: नींद नहीं आती, बच्चों की सुरक्षा का डर है 

    घायल कोल्हान सिंकु की भाभी सोमवारी सिंकु की आंखों में खौफ साफ देखा जा सकता है। उन्होंने बताया क‍ि उस रात के बाद से हम सो नहीं पा रहे हैं। 
     
    डर लगता है कि कहीं कोई सोते समय हमारे घर में भी पेट्रोल डालकर आग न लगा दे। मेरे पति एक साल से बाहर काम करने गए हैं और मैं यहां पांच छोटे बच्चों के साथ अकेली हूं। 
     
    वर्तमान में सोमवारी के ऊपर एक बड़ी जिम्मेदारी आ गई है। कोल्हान की पहली पत्नी जानी सिंकु अस्पताल में पति की देखभाल कर रही हैं।
     
    ऐसे में कोल्हान की तीन बेटियां और बड़े बेटे समेत कुल नौ बच्चों की देखरेख सोमवारी ही कर रही हैं। इन मासूमों का भविष्य और सुरक्षा अब एक बड़ा सवाल बन गया है। 

    प्रशासनिक हलचल और फोरेंसिक जांच 

    घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला मुख्यालय से उपायुक्त (DC) चंदन कुमार और पुलिस अधीक्षक (SP) अमित रेणु कुदासाई टोला पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और उन्हें सुरक्षा व न्याय का भरोसा दिलाया।

    फोरेंसिक साक्ष्य:
    राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) रांची की टीम ने घटनास्थल का सूक्ष्मता से निरीक्षण किया है। थाना प्रभारी मीलन करमाली के अनुसार, टीम ने निम्नलिखित साक्ष्य एकत्र किए हैं:

    •     जले हुए कपड़े और बिस्तर के अवशेष। 
    •     घटनास्थल से मिली राख और मिट्टी के नमूने।
    •     खून के धब्बे और पेट्रोल की गंध वाले साक्ष्य।


    पुलिस का कहना है कि फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद आग लगाने के तरीके और रसायनों की स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। फिलहाल फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।

    पारिवारिक पृष्ठभूमि और तनाव के संकेत 

    पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि कोल्हान सिंकु के परिवार में आंतरिक कलह भी थी। कोल्हान की दो पत्नियां थीं। बड़ी पत्नी जानी सिंकु और छोटी पत्नी ज्योति के बीच अक्सर विवाद होता रहता था। 
     
    कोल्हान दूसरी पत्नी ज्योति के साथ ईंट भट्ठे में मजदूरी करने जाता था, जबकि पहली पत्नी बच्चों को पालने के लिए ट्रैक्टर में मजदूरी करती थी। 
     
    दूसरी शादी के बाद से ही घर में तनाव था। पुलिस अब इस कोण से भी जांच कर रही है कि क्या अंधविश्वास के इस मामले के पीछे कोई गहरी पारिवारिक रंजिश तो नहीं थी। 

    कब थमेगा अंधविश्वास का तांडव?

    यह घटना झारखंड के ग्रामीण इलाकों में जड़ें जमाए बैठे अंधविश्वास की भयावह तस्वीर पेश करती है। प्रशासन भले ही मुआवजा और न्याय की बात कर रहा है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि एक मासूम और उसकी मां को जिंदा जला देने वाली इस मानसिकता का अंत कब होगा? कुदासाई टोला के लोग आज भी इंसाफ और सुरक्षा की गुहार लगा रहे हैं।

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