पश्चिमी सिंहभूम: 7 साल से लापता मां को जिंदा देख फफक कर रो पड़े बच्चे, मरा हुआ मानकर कर ली थी अंतिम संस्कार की तैयारी
पश्चिमी सिंहभूम के बड़ाजाम्बनी गांव में सात साल पहले लापता हुई चंदू सिंकु जीवित घर लौट आईं, जिसे परिवार मृत मान चुका था। ...और पढ़ें

7 साल से लापता मां लौटी
HighLights
सात साल बाद जीवित घर लौटी लापता महिला चंदू सिंकु।
बच्चों और पति से भावुक मिलन, गांव वाले भी हुए भावुक।
एनजीओ और पुलिस के सहयोग से हुआ परिवार का पुनर्मिलन।
संवाद सूत्र, कुमारडुंगी। पश्चिमी सिंहभूम जिले के कुमारडुंगी थाना क्षेत्र के बड़ाजाम्बनी गांव में एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने पूरे गांव को भावुक कर दिया। जिस महिला को परिवार और समाज सात वर्षों से लापता रहने के कारण मृत मान चुका था और जिसका कई बार अंतिम संस्कार व शुद्धिकरण करने की तैयारी की गई थी, वह बुधवार को अचानक जीवित अपने घर लौट आई।
मां को सामने देखकर उसके तीनों बच्चे और पति फफक-फफक कर रो पड़े। यह दृश्य देखकर गांव वालों की भी आंखें नम हो गईं।
परिवार ने लंबे समय तक तलाश की
बड़ाजाम्बनी निवासी राजेंद्र सिरका की पत्नी चंदू सिंकु करीब सात वर्ष पहले मानसिक स्थिति खराब होने के कारण घर से बिना बताए निकल गई थी। परिवार ने लंबे समय तक उसकी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
धीरे-धीरे लोगों ने उसे मृत मान लिया। सामाजिक परंपराओं के अनुसार तीन बार उसका दाह संस्कार और शुद्धिकरण संस्कार कराने की तैयारी की गई, लेकिन हर बार किसी न किसी कारण से कार्यक्रम टल गया।
छत्तीसगढ़ में मिली, एनजीओ ने कराया इलाज
बुधवार को चक्रधरपुर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ), छत्तीसगढ़ की श्रद्धावान एनजीओ और कुमारडुंगी पुलिस के सहयोग से चंदू सिंकु को सकुशल उसके परिवार से मिलवाया गया।
जानकारी के अनुसार, चंदू भटकते हुए छत्तीसगढ़ के बिलासपुर पहुंच गई थी। वहां उसकी दयनीय मानसिक स्थिति को देखकर श्रद्धावान एनजीओ ने उसे अपने संरक्षण में लिया और इलाज शुरू कराया। बाद में बेहतर उपचार के लिए उसे महाराष्ट्र के नागपुर भेजा गया।
इलाज के बाद जब उसकी मानसिक स्थिति सामान्य हुई तो उसने अपना नाम और झारखंड का पता बताया। इसके बाद संस्था ने चक्रधरपुर एसडीपीओ से संपर्क किया। पुलिस ने विभिन्न थानों के माध्यम से महिला की पहचान कराई, जिसके बाद पता चला कि वह कुमारडुंगी प्रखंड के बड़ाजाम्बनी गांव की निवासी है।
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मां को देखकर बच्चों की आंखों से छलक पड़े आंसू
घर पहुंचते ही चंदू सिंकु अपने पति और तीनों बच्चों से लिपटकर रोने लगी। पति राजेंद्र सिरका और बच्चों की आंखों से भी आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। यह भावुक दृश्य देखकर गांव के लोग भी अपने आंसू नहीं रोक सके।
ग्रामीणों ने पुलिस और एनजीओ के इस मानवीय प्रयास की जमकर सराहना की। परिजनों ने पुलिसकर्मियों और संस्था के प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनके पैर तक छू लिए।
मां के बिना संघर्ष में बीता बचपन
राजेंद्र सिरका ने बताया कि जब उनकी पत्नी घर छोड़कर गई थी, उस समय सबसे छोटा बेटा कुशनु सिरका मां का दूध भी नहीं छोड़ा था। पत्नी के गायब होने के बाद तीनों बच्चों की परवरिश करना बेहद कठिन हो गया था। तमाम परेशानियों के बावजूद उन्होंने बच्चों को पाल-पोसकर बड़ा किया। वर्तमान में उनकी बेटी अनीता सिरका (14 वर्ष), बेटा कुशनु सिरका (12 वर्ष) और सागर सिरका (10 वर्ष) हैं।
राजेंद्र ने बताया कि तीन वर्षों तक लगातार खोजबीन करने के बाद भी पत्नी का कोई पता नहीं चला तो समाज के दबाव में उसे मृत मान लिया गया। कई बार अंतिम संस्कार और शुद्धिकरण की तैयारी भी हुई, लेकिन हर बार किसी कारणवश वह टलती रही। उन्होंने भावुक होकर कहा, “आज मेरी पत्नी सात साल बाद जीवित मेरे सामने खड़ी है। यह किसी चमत्कार से कम नहीं है।
मानवीय संवेदना की मिसाल
इस पूरे घटनाक्रम में छत्तीसगढ़ की श्रद्धावान एनजीओ, चक्रधरपुर अनुमंडल पुलिस और कुमारडुंगी पुलिस की सक्रिय भूमिका ने एक बिछड़े परिवार को फिर से मिला दिया। सात वर्षों बाद मां की घर वापसी पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग इसे किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहे हैं।