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    कुमारडुंगी हत्याकांड: मां-बेटे को जिंदा जलाने वाली मुख्य साजिशकर्ता सुखमारी गिरफ्तार, अब तक 5 पहुंचे जेल

    Updated: Fri, 20 Feb 2026 09:43 PM (IST)

    कुमारडुंगी में अंधविश्वास के नाम पर मां-बेटे को जिंदा जलाने के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। मुख्य साजिशकर्ता सुखमारी हेस्सा को गिरफ्तार कर ल ...और पढ़ें

    फाइल फोटो।

    फाइल फोटो।

    HighLights

    1. अंधविश्वास के कारण मां और छह माह के बच्चे की मौत।

    2. इस मामले में अब तक कुल पांच आरोपी जेल भेजे गए।

    जागरण संस, कुमारडुंगी। झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले के कुमारडुंगी थाना अंतर्गत कलाईया गांव में अंधविश्वास के नाम पर हुई जघन्य वारदात में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। डायन के शक में मां और छह माह के मासूम बच्चे को पेट्रोल डालकर जिंदा जलाने के मामले में पुलिस ने मुख्य साजिशकर्ता सुखमारी हेस्सा को गिरफ्तार कर लिया है। इस दोहरे हत्याकांड में अब तक कुल 5 आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं। 

    अंधविश्वास ने ली दो जानें, पति अभी भी अस्पताल में 

    विदित हो कि इस दिल दहला देने वाली घटना में 32 वर्षीय ज्योति सिंकु और उनके 6 महीने के पुत्र पीयूष सिंकु की तड़प-तड़प कर मौत हो गई थी। मृतका के पति कोल्हान सिंकु भी इस हमले में बुरी तरह झुलस गए थे, जिनका इलाज फिलहाल सदर अस्पताल चाईबासा के बर्न यूनिट में चल रहा है। 

    पुलिस की त्वरित कार्रवाई और गिरफ्तारी 

    जगन्नाथपुर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO)रफायलमुर्मु ने बताया कि घटना के बाद से ही पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही थी। 

    •     पूर्व की कार्रवाई: घटना के अगले ही दिन पुलिस ने चार नामजद आरोपियों (रसिका बिरुवा, जेना बिरुवा, डेलगा सिंकु और सोना बिरुवा) को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। 
    •     ताजा गिरफ्तारी: शुक्रवार को गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने जेना बिरुवा के घर दबिश देकर मुख्य साजिशकर्ता सुखमारी हेस्सा को दबोच लिया। आरोपी ने पूछताछ में अपना जुर्म कबूल कर लिया है। 

    बीमारी और मौत के बाद उपजा डायन बिसाही का शक 

    पूछताछ में यह बात सामने आई कि परिवार के एक सदस्य की तबीयत खराब होने और फिर उसकी मृत्यु होने के बाद अंधविश्वास ने जड़पकड़ ली थी। आरोपियों को शक था कि ज्योति सिंकु डायन है और वह परिवार को नुकसान पहुंचा रही है। 

    झाड़-फूंक करने वाले वृद्ध से पूछताछ 

    मामले की गहराई से जांच के दौरान पुलिस मंझारी थाना क्षेत्र के एक 65 वर्षीय वृद्ध (ओझा) को भी पूछताछ के लिए थाना लाई थी। हालांकि, वृद्ध ने स्पष्ट किया कि वह केवल झाड़-फूंक करता है और उसने कभी किसी को डायन नहीं बताया। संलिप्तता का प्रमाण न मिलने पर पुलिस ने आगे की जांच जारी रखी है।

    प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे ओझा-गुणी और अंधविश्वास के चक्कर में न पड़ें। किसी भी विवाद या बीमारी की स्थिति में पुलिस या डॉक्टरों की मदद लें।

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