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    सारंडा में लाल आतंक का अंत : 3 दशक तक माओवादी का धुरी रहा मिसिर बेरसा गिरफ्तार, हत्या से UAPA तक केस दर्ज

    Updated: Wed, 29 Jul 2026 11:56 AM (IST)

    एक करोड़ का इनामी और पूर्वी भारत में माओवादी नेटवर्क का प्रमुख रणनीतिकार मिसिर बेसरा झारखंड में गिरफ्तार कर लिया गया है। ...और पढ़ें

    मिसिर बेसरा (फाइल फोटो)

    मिसिर बेसरा (फाइल फोटो)

    HighLights

    1. एक करोड़ का इनामी माओवादी मिसिर बेसरा गिरफ्तार।

    2. तीन दशक से सक्रिय, 130 से अधिक मामले दर्ज।

    3. माओवादी संगठन के रणनीतिक तंत्र को बड़ा नुकसान।

    सुधीर पांडेय, चाईबासा। एक करोड़ रुपये का इनामी, पोलित ब्यूरो सदस्य, केंद्रीय सैन्य नेतृत्व का हिस्सा और पूर्वी भारत में माओवादी नेटवर्क का सबसे बड़ा रणनीतिकार। यह पहचान है मिसिर बेसरा उर्फ सागर दा उर्फ भास्कर दा उर्फ सुनिर्मल दा उर्फ प्रधान दा की।

    झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के जंगलों में तीन दशक तक सक्रिय रहे मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी को सुरक्षा एजेंसियां माओवादी संगठन के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका मान रही हैं। पुलिस प्रोफाइल बताती है कि वह केवल एक उग्रवादी नहीं, बल्कि संगठन का रणनीतिक दिमाग था।

    छात्र राजनीति से माओवादी नेतृत्व तक

    गिरिडीह जिले के पीरटांड़ थाना क्षेत्र के मदनाडीह गांव में जन्मे मिसिर बेसरा स्नातक शिक्षित है। छात्र जीवन के दौरान वह तत्कालीन माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर (एमसीसी) के नेता किशन दा के संपर्क में आया। 1985 में संगठन के राष्ट्रीय सम्मेलन में वालंटियर बना और 1986 में औपचारिक सदस्यता मिली। इसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

    misir besra

    ऐसे चढ़ता गया संगठन की सीढ़ियां

    • 1985 : एमसीसी सम्मेलन में वालंटियर।
    • 1986 : संगठन की प्राथमिक सदस्यता।
    • 1990 : प्रचार-प्रसार एवं प्रेस कार्य की जिम्मेदारी।
    • 1992 : रांची एवं आसपास के जिलों में संगठन विस्तार।
    • 1997 : दक्षिण छोटानागपुर कमेटी के गठन में भूमिका।
    • 2000 : झारखंड रीजनल कमेटी के गठन में प्रमुख भूमिका।
    • 2003 : केंद्रीय समिति सदस्य बना।
    • 2004 : सीपीआई (माओवादी) गठन के बाद केंद्रीय सैन्य नेतृत्व और पोलित ब्यूरो स्तर तक पहुंच गया।

    130 से ज्यादा केस, हत्या से लेकर यूएपीए तक

    देश के सबसे बड़े माओवादी नेताओं में शामिल मिसिर बेसरा के खिलाफ पुलिस रिकॉर्ड में 130 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या, हत्या का प्रयास, पुलिस पर हमले, आपराधिक साजिश, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, आर्म्स एक्ट, यूएपीए, सीएलए एक्ट और हाल के वर्षों में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत दर्ज मामले शामिल हैं।

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    पुलिस प्रोफाइल के अनुसार उसके खिलाफ सबसे अधिक मामले पश्चिमी सिंहभूम के गोइलकेरा, टोंटो, छोटानागरा, जराइकेला, सोनुआ, गुवा, किरीबुरू, टेबो और मुफस्सिल थाना क्षेत्रों में दर्ज हैं। इसके अलावा कई अन्य थाना क्षेत्रों में भी संगठन से जुड़े मामलों में उसका नाम दर्ज है। प्रोफाइल बताती है कि वर्ष 2020 के बाद से उसके खिलाफ दर्ज मामलों में लगातार बढ़ोतरी हुई।

    2023, 2024 और 2025 में भी उसके नाम से कई नए मामले दर्ज किए गए, जिनमें पुलिस बल पर हमले, हत्या, विस्फोटक का इस्तेमाल, लेवी वसूली और प्रतिबंधित संगठन से जुड़ी गतिविधियों के आरोप शामिल हैं।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार इतने बड़े आपराधिक रिकॉर्ड के बावजूद वह लंबे समय तक सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ से बचता रहा और सारंडा-कोल्हान के जंगलों से संगठन का संचालन करता रहा। उसकी गिरफ्तारी को इसी कारण माओवादी नेटवर्क के खिलाफ सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जा रहा

    कोल्हान-सारंडा बना सबसे बड़ा गढ़

    पुलिस प्रोफाइल के अनुसार उसका वर्तमान ऑपरेशन एरिया सारंडा-कोल्हान के घनघोर जंगल में बसे जराइकेला, छोटानागरा और मनोहरपुर थाना क्षेत्र थे। इसके अलावा सारंडा के तुंबाहाका, पाटाटोरोप, रेंगड़ाहातु, अंजेदबेड़ा, मुरुमबुरु, चिरियाबेड़ा, जोरोयुली, सारजामबुरु, बलिबा, थोलकोबाद, तिरिलपोसी, राधापोड़ा, होलोंगुली, रेडा, समता, रातामाटी और बाटीदिरी जैसे दर्जनों गांव उसके सुरक्षित ठिकाने माने जाते थे।

    जंगल में नहीं, रणनीति के केंद्र में था मिसिर बेसरा, इसी वजह से बना देश का सबसे बड़ा माओवादी नेता

    माओवादी संगठन में मिसिर बेसरा की पहचान केवल हथियार लेकर जंगलों में घूमने वाले कमांडर की नहीं थी। पुलिस प्रोफाइल के अनुसार वह संगठन के सबसे बड़े रणनीतिकारों में शामिल था।

    पोलित ब्यूरो और केंद्रीय सैन्य नेतृत्व में रहने के कारण उसकी भूमिका संगठन की पूरी सैन्य और प्रशासनिक रणनीति तय करने की थी। प्रोफाइल के अनुसार मिसिर बेसरा विभिन्न माओवादी दस्तों के बीच समन्वय स्थापित करता था।

    किस इलाके में कौन-सा दस्ता सक्रिय रहेगा, किस क्षेत्र में संगठन का विस्तार किया जाएगा और नए कैडरों को किस तरह प्रशिक्षित किया जाएगा, इसकी निगरानी भी उसके जिम्मे थी। संगठन की भर्ती प्रक्रिया से लेकर सैन्य प्रशिक्षण तक में उसकी अहम भूमिका थी।

    पुलिस दस्तावेज में यह भी उल्लेख है कि माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में सड़क निर्माण कार्य करने वाले ठेकेदारों से लेवी वसूली संगठन का प्रमुख आर्थिक स्रोत था। इसी धन से हथियारों की खरीद, कैडरों के प्रशिक्षण और संगठन के संचालन का खर्च चलता था। पुलिस के अनुसार इस वित्तीय नेटवर्क की निगरानी भी शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर होती थी।

    सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी से केवल एक कमांडर नहीं, बल्कि संगठन का रणनीतिक और संचालन तंत्र भी कमजोर हुआ है।

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