जागरण संवाददाता, चाईबासा। झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगलों में नक्सलियों के विरुद्ध अब तक का सबसे बड़ा प्रहार किया गया है। Operation megaburu के तहत सुरक्षा बलों ने पिछले 48 घंटों में 18 नक्सलियों को मार गिराया है। इस मुठभेड़ में शीर्ष माओवादी नेताओं का सफाया होना संगठन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।(OPERATION MEGABURU)
सारंडा में दूसरे दिन भी जारी रही जंग
गुरुवार से शुरू हुई इस भीषण मुठभेड़ के दूसरे दिन शुक्रवार को सुरक्षा बलों ने एक और बड़ी सफलता हासिल की। सर्च ऑपरेशन के दौरान हुई फायरिंग में सुरक्षा बलों ने हार्डकोर नक्सली रापा मुंडा और एक महिला माओवादी को ढेर कर दिया। (OPERATION MEGABURU)
कुमडीह गांव के पास के जंगलों में शुक्रवार को भी रुक-रुक कर फायरिंग होती रही, जिससे पूरा इलाका थर्रा उठा।
यह ऑपरेशन इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि इसमें माओवादियों के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाया गया है। गुरुवार सुबह छोटानागरा थाना क्षेत्र के कुमडीह गांव के समीप घने जंगलों में हुई पहली मुठभेड़ में ही 15 माओवादी मारे गए थे। मारे गए नक्सलियों में अनल उर्फ पतिराम मांझी, अनमोल उर्फ सुशांत, अमित मुंडा, पिंटू लोहरा, लालजीत उर्फ लालू, राजेश मुंडा, बुलबुल अयदा, बबीता, पूर्णिमा और सुरजमुनी जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
सर्च ऑपरेशन के दौरान फिर हुई मुठभेड़
घटनास्थल का मंजर बेहद खौफनाक है। जानकारी के अनुसार, मुठभेड़ इतनी भीषण थी कि मारे गए नक्सलियों के शव घने जंगल में लगभग एक से डेढ़ किलोमीटर के दायरे में अलग-अलग स्थानों पर बिखरे पड़े हैं।
शुक्रवार को जब सुरक्षा बल शवों को उठाने के लिए ट्रैक्टरों के साथ पहुंचे, तो जंगल में छिपे अन्य माओवादियों ने दोबारा गोलीबारी शुरू कर दी। इस अप्रत्याशित फायरिंग के कारण फिलहाल शवों को घटनास्थल से बाहर लाने और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया को टालना पड़ा है।
जंगल में अब भी कुछ सशस्त्र माओवादी छिपे हैं
चाईबासा के सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल टीम गठित कर दी गई थी, लेकिन दोपहर 12 बजे दोबारा शुरू हुई मुठभेड़ ने योजना को बाधित किया। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि जंगल में अब भी कुछ सशस्त्र माओवादी छिपे हो सकते हैं जो अपने साथियों के शवों के पास घेराबंदी किए हुए हैं। (OPERATION MEGABURU)
हेलीकॉप्टर से निगरानी, भारी फोर्स तैनात
सारंडा के इस दुर्गम इलाके में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है। सीआरपीएफ (CRPF), कोबरा (CoBRA) और झारखंड पुलिस के जवान चप्पे-चप्पे पर नजर रखे हुए हैं। (OPERATION MEGABURU)
पूरे क्षेत्र की हेलीकॉप्टर के जरिए हवाई निगरानी की जा रही है ताकि नक्सलियों के किसी भी संभावित भागने के रास्ते को बंद किया जा सके। Operation megaburu ने यह साफ कर दिया है कि सरकार और सुरक्षा बल सारंडा से माओवाद को पूरी तरह खत्म करने के मिशन पर हैं।