5 घंटे लेट हुई ट्रेन तो यात्री ने कर दिया रेलवे पर केस, कोर्ट ने दिया ₹60000 देने का आदेश
सरायकेला-खरसावां उपभोक्ता आयोग ने दक्षिण-पूर्व रेलवे को ट्रेन में 5 घंटे से अधिक की देरी के कारण एक यात्री को मानसिक और शारीरिक पीड़ा के लिए 60,000 रु ...और पढ़ें

यात्री ने कर दिया रेलवे पर केस ( एआई जेनरेटेड तस्वीर )
HighLights
उपभोक्ता आयोग ने रेलवे पर 60 हजार का जुर्माना लगाया।
ट्रेन 5 घंटे 17 मिनट देरी से गंतव्य पर पहुंची थी।
यात्री को मानसिक और शारीरिक पीड़ा के लिए मुआवजा मिला।
जागरण संवाददाता, चाईबासा। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, सरायकेला-खरसावां ने एक अहम फैसले में दक्षिण-पूर्व रेलवे को ट्रेन के अत्यधिक विलंब से यात्री को हुई मानसिक एवं शारीरिक पीड़ा के लिए 60 हजार रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है।
जानकारी के अनुसार आदित्यपुर निवासी संजय कुमार ने 13 अक्टूबर 2024 को टाटानगर से संबलपुर जाने के लिए इस्पात एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 22861) में आरक्षित टिकट कराया था।
5 घंटे 17 मिनट लेट पहुंची ट्रेन
ट्रेन को निर्धारित समय के अनुसार सुबह 10:18 बजे टाटानगर से प्रस्थान कर अपराह्न 3:50 बजे संबलपुर पहुंचना था, लेकिन ट्रेन लगभग 317 मिनट (5 घंटे 17 मिनट) की देरी से गंतव्य पर पहुंची। इससे यात्री को मानसिक और शारीरिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
इसके बाद संजय कुमार ने रेलवे से 2.50 लाख रुपये क्षतिपूर्ति की मांग करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया। सुनवाई के दौरान रेलवे ने आयोग के अधिकार क्षेत्र पर आपत्ति जताते हुए कहा कि मामला रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल के अधिकार क्षेत्र में आता है तथा आवश्यक पक्षकारों को वाद में शामिल नहीं किया गया है।
यात्रियों का समय अत्यंत मूल्यवान
हालांकि रेलवे ट्रेन के विलंब का कोई संतोषजनक कारण या दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने Northern Western Railway बनाम Sanjay Shukla (SLP (C) No. 13288/2021) मामले में स्पष्ट किया है कि यात्रियों का समय अत्यंत मूल्यवान है।
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यदि रेलवे ट्रेन के विलंब का उचित एवं अपरिहार्य कारण साबित नहीं कर पाता है, तो इसे सेवा में कमी (Deficiency in Service) माना जाएगा और यात्री क्षतिपूर्ति का हकदार होगा।
45 दिनों के भीतर 60 हजार देने का आदेश
आयोग के अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह तथा सदस्य प्रदीप कुमार मिश्रा एवं संजू शाही की पीठ ने उपलब्ध साक्ष्यों और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के आधार पर दक्षिण-पूर्व रेलवे को सेवा में दोषी ठहराया।
आयोग ने रेलवे को निर्देश दिया कि वह परिवादी को मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना के लिए 50,000 रुपये तथा वाद व्यय के रूप में 10,000 रुपये, कुल 60,000 रुपये का भुगतान 45 दिनों के भीतर करे। आदेश का पालन नहीं करने की स्थिति में उक्त राशि पर आदेश की तिथि से 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा।