झारखंड के इस जिले में खनिज संपदा का अकूत भंडार, फिर भी आज तक नहीं लगा एक भी स्टील प्लांट
पश्चिमी सिंहभूम के मनोहरपुर में लौह अयस्क की प्रचुरता के बावजूद स्टील प्लांट स्थापित नहीं हो पाया है। राज्य की पुनर्वास और भूमि अधिग्रहण नीतियों की कम ...और पढ़ें
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पश्चिमी सिंहभूम में खनिज संपदा की भरमार

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
दिनेश शर्मा, चक्रधपुर। लौह अयस्क और सारंडा वन से पश्चिमी सिंहभूम जिले के मनोहरपुर की पहचान सिर्फ इस राज्य में ही नहीं बल्कि विश्व स्तर पर है। लौह अयस्क के अकूत भंडार के बावजूद इस क्षेत्र में एक अदद स्टील प्लांट अब तक नहीं बन पाया। जो इस जिले के लिए सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है।
झारखंड राज्य की स्थापना के दीर्घ ढाई दशक बीत जाने के बावजूद राज्य में स्थायी पुनर्वास नीति व भूमि अधिग्रहण को ठोस नीति नहीं बनने के कारण कई कंपनियां आई और चली गई। राजनेताओं ने भी खनिज संपदा से भरे क्षेत्र में स्टील प्लांट स्थापित करने को लेकर ठोस पहल नहीं की, जबकि अविभाजित बिहार के समय से इस क्षेत्र की जनता स्टील प्लांट की मांग करती रही है।
पिछड़ा व आदिवासी बहुल क्षेत्र में रोजगार की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण क्षेत्र से रोजगार को लेकर आदिवासियों का बड़ा तबका अन्य राज्यों व शहरों की ओर पलायन करता रहा है। जबकि इस क्षेत्र में कम से कम एक स्टील प्लांट की स्थापना होती, तो जिला में खासकर नोवामुंडी, जगन्नाथपुर व मनोहरपुर प्रखंड क्षेत्र के हजारों लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मुहैया होता।
ऐसा न होने के कारण सारंडा सहित तीनों प्रखंड क्षेत्र की जनता में इसे लेकर काफी नाराजगी है। वे इसे लेकर सीधे-सीधे नेता व सरकार को दोषी मानते हैं। ऐसा नहीं कि बड़ी-बड़ी कंपनियां इस क्षेत्र में स्टील प्लांट नहीं लगाना चाहती। स्टील प्लांट लगाने को लेकर बड़ी कंपनियां मित्तल, जिंदल, टाटा स्टील, एस्सार, वीएस डेम्पो आदि कई कंपनियों ने मनोहरपुर का दौरा कर प्लांट के लिए स्थल का भी चयन किया।
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वीएस डेम्पो ने तो लगभग सवा सौ एकड़ भूमि स्टील प्लांट के लिए रैयतों से खरीद भी ली, परंतु प्लांट स्थापना को लेकर कंपनियों को जनप्रतिनिधि व सरकार से सहयोग नहीं मिलने के कारण लगभग सभी ने अपने पांव पीछे कर लिए। लौह अयस्क के भंडार पर बैठा पश्चिमी सिंहभूम जिला आज भी एक अदद स्टील प्लांट को तरस रहा है।
लौह अयस्क के भंडार पर बैठक सारंडा व आसपास के क्षेत्र में बसे लोग वर्षो से लौह अयस्क की धूल फांक फांकाकशी को मजबूर हैं। इस क्षेत्र के लौह अयस्क से देश ही नहीं विदेशों में भी कई शहर चमक रहे हैं, जबकि लौह अयस्क के भंडार पर बैठक इस क्षेत्र के लोगों के सामने बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, पलायन व रोजगार जैसी समस्या जस की तस खड़ी है।
पूर्व में झारखंड सरकार द्वारा मोमेंटम झारखंड में बड़े-बड़े कंपनी के मालिक रांची आए थे। उसी दिन वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने डिम्बुली, नंदपुर आदि इलाके का सर्वे किया। साथ ही पांच हजार करोड़ रुपये निवेश करने की इच्छा जाहिर की थी। कंपनी ने मनोहरपुर में 110 एकड़ जमीन भी खरीद रखी है। यहां के लोग अब भी वेदांता से कंपनी खोलने की आस लगाए बैठे हुए हैं।