Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    ब्रांडेड कपड़ों के शौकीन हैं तो पढ़ लें ये खबर: हुडी से लेकर कैप और जूतों तक, हर तीसरा आइटम है 'फर्जी'

    Updated: Sun, 03 May 2026 08:40 AM (IST)

    एंट्रपी की 'स्टेट ऑफ द फेक 2026' रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक लग्जरी बाजार में 8.1% उत्पाद नकली पाए गए हैं, जिसमें हर तीसरा स्ट्रीटवियर आइटम फर्जी है। ...और पढ़ें

    क्या आपका ब्रांडेड जूता और टीशर्ट असली है? (Image Source: AI-Generated)

    क्या आपका ब्रांडेड जूता और टीशर्ट असली है? (Image Source: AI-Generated)

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आजकल हर कोई महंगे और नामी ब्रांड्स के कपड़े और जूते पहनना पसंद करता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस बड़े ब्रांड के लिए आपने हजारों-लाखों रुपये खर्च किए हैं, वह हकीकत में असली है भी या नहीं?

    एआई तकनीक से उत्पादों की असलियत जांचने वाली कंपनी 'एंट्री' ने अपनी 'स्टेट ऑफ द फेक 2026' रिपोर्ट में एक ऐसा खुलासा किया है, जो लग्जरी बाजार की सच्चाई बयां करता है। इस रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर के लग्जरी बाजार में बिकने वाले कुल उत्पादों में से 8.1 प्रतिशत सामान पूरी तरह से जाली पाया गया है।

    counterfeit luxury trends

    (Image Source: AI-Generated)

    बाजार में हर तीसरा स्ट्रीटवियर आइटम जाली

    आंकड़ों की गहराई में जाएं तो स्थिति और भी हैरान करने वाली लगती है। साल 2025 के दौरान जब 35,090 करोड़ रुपये के महंगे उत्पादों की जांच की गई, तो पता चला कि उनमें से 2,788 करोड़ रुपये का सामान पूरी तरह से नकली था। जालसाजों ने सबसे बड़ी सेंध लग्जरी फुटवियर और रेडी-टू-वियर कपड़ों के बाजार में लगाई है, जिनका कुल हिस्सा 31,676 करोड़ रुपये था। प्रीमियम स्ट्रीटवियर सेगमेंट, जिसमें टीशर्ट, कैप और स्पोर्ट्स जर्सी आते हैं, उसका हाल तो यह है कि बाजार में बिकने वाला लगभग हर तीसरा आइटम फर्जी है।

    नाइकी से लेकर बेप तक में फ्रॉड

    अगर आपको लगता है कि नामी ब्रांड्स का टैग देखकर आंख मूंदकर भरोसा किया जा सकता है, तो रिपोर्ट के आंकड़े आपकी राय बदल सकते हैं। जांच में सामने आया कि 'फियर ऑफ गॉड एसेंशियल्स' ब्रांड के 95.75 प्रतिशत उत्पाद नकली थे।

    खबरें और भी

    इसी तरह 'बेप' के 85.19%, 'नाइकी' के 73.33% और 'स्पाइडर' के 61.02% सामानों में धोखाधड़ी पाई गई। स्क्रूटनी के मामले में सबसे ज्यादा 80.5 प्रतिशत वॉल्यूम नाइकी का और 8.5 प्रतिशत एडिडास का रहा।

    which brands are the most faked

    (Image Source: AI-Generated)

    इन महंगे जूतों में है सबसे बड़ा रिस्क

    आजकल स्नीकर्स का क्रेज युवाओं में सबसे ज्यादा है, और इसी वजह से 2025 में जूतों के बाजार में नकली उत्पादों का ट्रेंड बढ़कर 11.1 प्रतिशत तक पहुंच गया। लुई विटॉन और डियोर जैसे आलीशान ब्रांड्स के स्नीकर्स में नकली होने का रिस्क सबसे ज्यादा (54.1%) है।

    इसके अलावा बलेंसीआगा (36.2%), क्रिस्टियां लुबुटां (27.9%) और अलेक्जेंडर मैकक्वीन (19.2%) के जूतों में भी नकली होने का भारी खतरा बना रहता है।

    गुची-प्रादा पर निशाना, 'ऑफ-व्हाइट' ने बचाई लाज

    नकली सामान बनाने वालों की पहली पसंद लुई विटॉन, गुची और प्रादा जैसे ब्रांड्स हैं। जांचे गए कुल सामानों में इन तीन ब्रांड्स की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 55.42 प्रतिशत रही है। वहीं, अगर कुल वैल्यू के नजरिए से देखें, तो 'शनेल' 9,095 करोड़ रुपये के साथ सबसे ऊपर है, जिसके 5.7 प्रतिशत उत्पाद नकली निकले।

    हालांकि, इस भारी फर्जीवाड़े के बीच 'ऑफ-व्हाइट' और 'सुप्रीम' जैसे ब्रांड्स ने ग्राहकों का भरोसा कायम रखा है। 'ऑफ-व्हाइट' के 94.49% और 'सुप्रीम' के 85.03% उत्पाद पूरी तरह असली और खरे साबित हुए हैं।

    1 लाख करोड़ के बाजार में घुसपैठ

    यह रिपोर्ट भारत जैसे तेजी से बढ़ते बाजार के लिए एक बहुत बड़ी चेतावनी है। यूरोमॉनिटर के आंकड़े बताते हैं कि भारत में स्ट्रीटवियर का बाजार अब 1 लाख करोड़ रुपये का विशाल रूप ले चुका है। इसमें 16.7 प्रतिशत हिस्सा लग्जरी और प्रीमियम सामानों का है, और सबसे बड़ी बात यह है कि भारतीय बाजार हर साल 12 प्रतिशत की तेज दर से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में, लग्जरी हैंडबैग, हुडी या महंगे जूते खरीदते समय ग्राहकों को अब पहले से कहीं ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है।

    यह भी पढ़ें- सिर्फ स्टेटस नहीं, अब पर्सनल कनेक्शन है लग्जरी; क्यों 73% भारतीयों ने बदले अपने पसंदीदा ब्रांड्स?

    यह भी पढ़ें- Rolex घड़ी हो या बिर्किन बैग, लग्जरी सामान के बदले मोटा कर्ज उठा रहे रईस