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    कहीं देझूर तो कहीं थाली... मंगलसूत्र के ये रूप देखकर आप भी कहेंगे- "यह तो सोचा ही नहीं था!”

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 04:04 PM (IST)

    उत्तर भारत में दुल्हन के सुहाग की निशानी मंगलसूत्र है, पर दूसरे राज्यों में दुल्हन के शृंगार में मंगलसूत्र नहीं बल्कि दूसरे आभूषण शामिल हैं। ...और पढ़ें

    भारत के हर राज्य में अलग है सुहाग की पहचान (Image Source: AI Generated)

    भारत के हर राज्य में अलग है सुहाग की पहचान (Image Source: AI Generated)

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारत की सांस्कृतिक विरासत इतनी समृद्ध है कि यहां पग-पग पर विविधताएं हैं। तीज-त्योहारों और शादियों से जुड़ी भी अनेकों रीति-रिवाज और रस्में हैं जिनके बारे में हम पूरी तरह से शायद कभी जान नहीं पाएंगे। 

    ऐसे में अगर आप अभी भी ऐसा सोचते हैं कि लड़की की शादी होने पर उसे सुहाग की निशानी के तौर पर सिंदूर और मंगलसूत्र ही पहनाया जाता तो आप गलत हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत के हर राज्य में सुहाग की पहचान अलग-अलग है जिसपर हम आज बात करने वाले हैं। 

    कश्मीर का देझूर

    कश्मीर की परंपरा में मंगलसूत्र के तौर पर सोने के देझूर पहने जाने का रिवाज है। यहां कश्मीरी पंडितों के समुदाय में शादियों में दुल्हनों को इसे पहनाया जाना अनिवार्य होता है। बता दें कि यह गले का नहीं बल्कि कान का आभूषण होता है जिसमें लटकता हुआ एक षट्कोणीय पेंडेंट होता है। इस पेंडेंट के बीच में बना बिन्दु शिव और शक्ति का ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। 

    उत्तराखंड की नथुली 

    उत्तराखंड में दुल्हन के शृंगर में नथुली पहनना जरूरी है, यह उनकी परंपरा और स्त्री के सुहाग का प्रतीक माना जाता है। नाक में पहने जाने वाली यह बड़ी सी गोल आकार की नथ सोने की होती है जो दुल्हन के मायके खासकर मामा पक्ष से दी जाती है। 

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    बंगाल और ओडिशा की शंखा-पोला

    बंगाल और ओडिशा में अगर शादीशुदा महिलाओं को पहचानना है तो शंखा-पोला सबसे बड़ी पहचान है। इसमें सफेद शंख से बनी चूड़ियां शंखा और लाल मूंगा से बनी चूड़ियों को पोला कहा जाता है। जहां एक तरफ शंखा पवित्रता, शांति और सकारात्मकता का प्रतीक मानी जाती है तो वहीं पोला को देवी की ऊर्जा, शक्ति और सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है। 

    तमिलनाडु का थिरुमांगल्यम

    तमिलनाडु में मंगलसूत्र को थाली या थिरुमांगल्यम कहा जाता है। इसे पारंपरिक रूप से हल्दी के धागे या सोने में पहने जाने का रिवाज है। इस मंगलसूत्र का आकार तमिलनाडु में जाति के अनुसार अलग-अलग भी देखने को मिल सकता है। 

    केरल की थाली या मिन्नू 

    केरल में जब भी किसी लड़की की शादी होती है तो उसे मंगलसूत्र पहनाए जाने की परंपरा है। हिन्दू धर्म में जिसे थाली कहा जाता है तो वहीं ईसाई धर्म में मिन्नू पहनाया जाता है। शेप की बात करें तो मिन्नू में एक चेन में क्रॉस वाला पेंडेंट होता है, जबकि बरगद के पत्ते के आकार की थाली को धागे में या सोने की चेन में पिरोया जाता है। 

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