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    क्या पूरी तरह सेफ है आपका सनस्क्रीन? खरीदने से पहले चेक करें ये जरूरी बात

    Updated: Wed, 03 Jun 2026 01:15 PM (IST)

    धूप से त्वचा को बचाने के लिए सनस्क्रीन लगाना जरूरी है, लेकिन सुरक्षा के नाम पर कहीं बड़ी-बड़ी कंपनियां आपको बेवकूफ तो नहीं बना रहीं? ...और पढ़ें

    क्या आपका सनस्क्रीन सुरक्षित है? (AI Generated Image)

    क्या आपका सनस्क्रीन सुरक्षित है? (AI Generated Image)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। गर्मी के मौसम में तेज धूप के कारण टैनिंग की समस्या काफी आम है। इससे बचने के लिए सनस्क्रीन सबसे बेहतरीन उपाय है। यह न सिर्फ टैनिंग से बचाता है, बल्कि यूवी किरणों से भी स्किन को प्रोटेक्ट करता है। इसलिए सनस्क्रीन लगाना काफी जरूरी है, लेकिन आप जो सनस्क्रीन लगा रहे हैं, क्या वह वाकई सुरक्षित है या नहीं? 

    दरअसल, एक अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में बिकने वाली लगभग 80% सनस्क्रीन सुरक्षा के तय मानकों पर खरे नहीं उतरते। इस रिपोर्ट में करीब 2,784 सनस्क्रीन की बारीकी से जांच की गई, जिसमें केवल 500 प्रोडक्ट्स की सुरक्षित और असरदार पाए गए। यानी सिर्फ 20% सनस्क्रीन सुरक्षा मानकों पर खरे उतरते हैं। इसलिए यह जानना बेहद जरूरी है कि आपका सनस्क्रीन सुरक्षित है या नहीं।

    कंपनियों के बढ़ा-चढ़ाकर किए गए दावे

    इस जांच में एक बड़ा खुलासा यह हुआ है कि कई कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स पर एसपीएफ फैक्टर काफी बढ़ा-चढ़ाकर लिखती हैं, लेकिन हकीकत यह है कि लिखे गए एसपीएफ के मुकाबले ये सनस्क्रीन केवल एक-चौथाई यूवीए और 59% यूवीबी सुरक्षा देते हैं।  

    इतना ही नहीं, रिपोर्ट में यह भी साफ हुआ है कि महंगे एसपीएफ 100+, जो 99% सुरक्षा का दावा करते हैं और बजट में आने वाले सस्ते एसपीएफ 50+, जो 98% सुरक्षा देते हैं, के असर में कोई बहुत बड़ा या खास अंतर नहीं होता है।

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    Sunscreen (5)

    (AI Generated Image)

    केमिकल या मिनरल: कौन सा सनस्क्रीन है आपके लिए बेहतर?

    बाजार में मुख्य रूप से दो तरह के सनस्क्रीन मिलते हैं, जिन्हें समझना आपके लिए बेहद जरूरी है-

    • मिनरल ऑक्साइड सनस्क्रीन- इस तरह के सनस्क्रीन में जिंक और टाइटेनियम डाइऑक्साइड जैसे जरूरी मिनरल्स मौजूद होते हैं। ये त्वचा के ऊपर एक सुरक्षित परत बना देते हैं और धूप की किरणों को वहीं से रिफ्लेक्ट कर देते हैं। एक्सपर्ट्स इस कैटेगरी के सनस्क्रीन को त्वचा के लिए पूरी तरह सुरक्षित मानते हैं।
    • केमिकल सनस्क्रीन- ये सनस्क्रीन त्वचा के ऊपर रहने के बजाय उसके भीतर तक सोख लिए जाते हैं। ये स्पंज की तरह काम करते हैं और हानिकारक यूवी किरणों को अपने अंदर सोख लेते हैं। 

    सिर्फ सनस्क्रीन के भरोसे न रहें

    अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी के अनुसार, त्वचा को धूप से बचाने के लिए सिर्फ सनस्क्रीन लगा लेना ही काफी नहीं है। इसके लिए आपको कुछ और जरूरी आदतों को अपनाना होगा-

    • धूप में कदम रखने से ठीक 15 मिनट पहले सनस्क्रीन जरूर लगाएं।
    • लंबे समय तक धूप में रहने पर हर दो घंटे में सनस्क्रीन को दोबारा लगाएं।
    • सफर के दौरान फुल स्लीव्स के कपड़े, धूप का चश्मा और चौड़ी पट्टी वाली टोपी का इस्तेमाल करें।
    • कोशिश करें कि सुबह 10 बजे से लेकर शाम 4 बजे के बीच सीधे तेज धूप में निकलने से बचें

    भारतीय मानकों को कैसे पहचानें?

    अगर आप भारत में सनस्क्रीन खरीद रहे हैं, तो उसकी सुरक्षा और शुद्धता की जांच करना बहुत आसान है। हमेशा प्रोडक्ट को खरीदते समय उसके लेबल को ध्यान से देखें। भारतीय सुरक्षा मानकों के अनुसार, जिन प्रोडक्ट्स पर ISO 24444 या ISO 2442 लिखा हो, केवल उन्हीं सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें।