Sunscreen लगाने के बाद भी टैनिंग क्यों हो रही है? हमनें डर्मेटोलॉजिस्ट से पूछी इसकी असल वजह
क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि आप रोज नियम से सनस्क्रीन लगाते हैं, धूप में निकलने से पहले पूरी तैयारी करते हैं, लेकिन फिर भी कुछ दिनों बाद स्किन टैन ...और पढ़ें

सनस्क्रीन लगाने के बाद भी क्यों होती है टैनिंग? जानें डर्मेटोलॉजिस्ट की राय (Image Source: AI-Generated)
HighLights
सनस्क्रीन यूवी किरणों को पूरी तरह ब्लॉक नहीं करता है
गलत तरीके से लगाना और री-एप्लीकेशन न करना मुख्य कारण
ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन चुनें, इनडायरेक्ट धूप से भी नुकसान
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बहुत से लोग इस बात को लेकर अक्सर परेशान रहते हैं कि रोजाना सनस्क्रीन लगाने के बावजूद उनकी स्किन टैन क्यों हो जाती है। हम आम तौर पर यह मान लेते हैं कि सनस्क्रीन धूप से बचने के लिए एक 'कवच' की तरह काम करता है, लेकिन असल में इसका काम करने का तरीका ऐसा नहीं है।
सनस्क्रीन हमारी त्वचा तक पहुंचने वाली हानिकारक अल्ट्रावायलेट (UV) किरणों की मात्रा को कम जरूर करता है, लेकिन यह उन्हें 100 प्रतिशत तक ब्लॉक नहीं कर सकता। इसलिए, नियमित रूप से सनस्क्रीन लगाने के बाद भी टैनिंग होना पूरी तरह से संभव है। कैलाश दीपक अस्पताल की कंसल्टेंट डर्मेटोलॉजिस्ट, डॉ. आरज़ू पाहवा के आधार पर, आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर ऐसा क्यों होता है और हम कहां गलती करते हैं।

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टैनिंग असल में क्या है?
टैनिंग कोई बीमारी नहीं, बल्कि UV किरणों से बचने के लिए हमारी त्वचा का अपना 'डिफेंस रिस्पॉन्स' है। जब ये किरणें त्वचा के अंदर प्रवेश करती हैं, तो हमारा शरीर 'मेलेनिन' का प्रोडक्शन बढ़ा देता है। मेलेनिन ही वह पिगमेंट है जो हमारी त्वचा के रंग को तय करता है। मेलेनिन का बढ़ना असल में त्वचा द्वारा खुद को आगे के गहरे नुकसान से बचाने की एक कोशिश है। इसलिए, अगर आप लंबे समय तक बाहर तेज धूप में रहते हैं, तो सनस्क्रीन लगाने के बाद भी कुछ हद तक टैनिंग हो सकती है।
प्रोडक्ट सही है, लेकिन क्या लगाने का तरीका गलत है?
दिलचस्प बात यह है कि कई बार असली समस्या सनस्क्रीन में नहीं, बल्कि उसे लगाने के तरीके में होती है। ज्यादातर लोग जरूरत से बहुत कम मात्रा में सनस्क्रीन लगाते हैं। त्वचा पर इसकी एक पतली परत लगाने से हमें एक झूठा एहसास होता है कि हम पूरी तरह सुरक्षित हैं। आपको बता दें कि SPF की टेस्टिंग लैब में हमेशा प्रोडक्ट की एक अच्छी-खासी मात्रा का इस्तेमाल करके की जाती है।
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सनस्क्रीन का री-एप्लीकेशन है बेहद जरूरी
हम अक्सर सुबह घर से निकलते समय सनस्क्रीन लगा लेते हैं, लेकिन उसे री-अप्लाई करना भूल जाते हैं। पसीने, त्वचा से निकलने वाले नेचुरल ऑयल, रगड़ और धूप के संपर्क में आने से सनस्क्रीन का असर धीरे-धीरे घटने लगता है। अगर आप बाहर धूप में हैं और हर दो से तीन घंटे में इसे री-अप्लाई नहीं करते हैं, तो आपकी त्वचा की सुरक्षा काफी हद तक कम हो जाती है।

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'ब्रॉड-स्पेक्ट्रम' पर ध्यान दें
सनस्क्रीन खरीदते समय हम अक्सर उसके टाइप को नजरअंदाज कर देते हैं। कुछ सनस्क्रीन मुख्य रूप से केवल UVB किरणों से बचाते हैं, जो 'सनबर्न' का कारण बनती हैं, लेकिन अगर आपके सनस्क्रीन में UVA किरणों से बचने की क्षमता कम है, तो यह आपकी त्वचा को टैनिंग और गहरे नुकसान से नहीं बचा पाएगा। इसलिए हमेशा ऐसे सनस्क्रीन का चुनाव करें जो ब्रॉड-स्पेक्ट्रम हो।
इनडायरेक्ट धूप भी पहुंचाती है नुकसान
हम अक्सर सोचते हैं कि छांव में रहने से हम सुरक्षित हैं, लेकिन UV किरणें कार की खिड़कियों और बादलों के पार भी जा सकती हैं। यहां तक कि ये पानी या कंक्रीट जैसी सतहों से टकराकर वापस हमारी त्वचा तक पहुंच सकती हैं। इसलिए, रोजाना की यह हल्की धूप भी समय के साथ जुड़कर टैनिंग का कारण बनती है।
एक्सपर्ट की मानें, तो सबसे जरूरी बात यह समझना है कि सनस्क्रीन का काम इंसान को पूरी तरह से "सनप्रूफ" बनाना नहीं है। इसकी मुख्य भूमिका आपकी त्वचा को UV डैमेज, समय से पहले बुढ़ापा, पिग्मेंटेशन और स्किन कैंसर जैसे गंभीर और लंबे समय के जोखिमों को कम करना है। थोड़ी बहुत टैनिंग भले ही हो जाए, लेकिन लगातार और सही तरीके से सनस्क्रीन का इस्तेमाल आपकी त्वचा को एक बहुत ही सुरक्षित तरीके से बचाता है।