क्या आप जानते हैं? भारत में एक ही दिन अलग-अलग तरीकों से मनाई जाती है मकर संक्रांति, पढ़ें अनोखी परंपराएं
क्या आप जानते हैं जनवरी के महीने में सिर्फ मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2026) ही नहीं, बल्कि फसलों की कटाई ...और पढ़ें

भारत के अलग-अलग हिस्सों में कैसे मनाते हैं मकर संक्रांति? (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। मकर संक्रांति का त्योहार भारत में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। खास बात यह है कि इस त्योहार को देश के हर हिस्से में अलग-अलग नामों और तरीके से मनाया जाता है। दरअसल, मकर संक्रांति का त्योहार सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।
साथ ही, यह नई फसल की कटाई का प्रतीक भी माना जाता है। जनवरी के महीने में फसलों की कटाई से जुड़े त्योहार पूरे भारत में इस त्योहार को बड़े ही उत्साह से मनाया जाता है, लेकिन इनके नाम और रिवाज काफी अलग होते हैं। आइए जानें भारत के अलग-अलग राज्यों में मकर संक्रांति मनाने के अनूठे तरीकों के बारे में।
उत्तर भारत- खिचड़ी

(Picture Courtesy: Freepik)
उत्तर प्रदेश और बिहार में मकर संक्रांति को मुख्य रूप से 'खिचड़ी' के नाम से जाना जाता है। इस दिन गंगा स्नान करना और दान देना बेहद शुभ माना जाता है। प्रयागराज में मकर संक्रांति के दौरान 'माघ मेला' भी लगा होता है। इस त्योहार पर खाने में उड़द की दाल और चावल की खिचड़ी, तिल के लड्डू और गुड़ का खास महत्व है। बिहार में खिचड़ी के त्योहार पर दही-चूड़ा खाने का भी काफी महत्व है।
गुजरात और राजस्थान- उत्तरायण

(Picture Courtesy: Freepik)
गुजरात में इसे 'उत्तरायण' कहा जाता है, जहां यह एक भव्य पतंग महोत्सव का रूप ले लेता है। आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से पट जाता है। यहां उत्तरायण में 'उंधियू' और 'चिक्की’ जैसे खास व्यंजन खाए जाते हैं। राजस्थान में भी पतंगबाजी के साथ-साथ सुहागिन महिलाएं अपनी सास या बड़ों को 'सीधा' (कच्चा अनाज और दक्षिणा) देकर उनका आशीर्वाद लेती हैं।
दक्षिण भारत- पोंगल

(Picture Courtesy: Freepik)
तमिलनाडु में इसे 'पोंगल' के रूप में चार दिनों तक मनाया जाता है।
- भोगी पोंगल- पुराने सामान को जलाकर नई शुरुआत की जाती है।
- थाई पोंगल- सूर्य देव को दूध और नए चावल से बनी 'पोंगल' अर्पित की जाती है।
- मट्टू पोंगल- खेती में सहायक पशुओं, खासकर बैलों की पूजा की जाती है।
- कानुम पोंगल- इस दिन परिवार के लोग मिलकर जश्न मनाते हैं।
कर्नाटक में इसे 'सुग्गी' कहते हैं, जहां लोग एक-दूसरे को 'एल्लु-बेल्ल' (तिल, गुड़ और नारियल का मिश्रण) बांटते हैं।
पंजाब और हरियाणा- लोहड़ी और माघी
-1768295598394.jpg)
(Picture Courtesy: Freepik)
पंजाब में संक्रांति से एक दिन पहले 'लोहड़ी' मनाई जाती है। लोग अलाव जलाकर उसके चारों ओर घूमते हैं और मूंगफली, रेवड़ी और फुल्ले चढ़ाते हैं। अगले दिन इसे 'माघी' के रूप में मनाया जाता है, जहां नदियों में स्नान और दान की परंपरा है।
असम- माघ बिहू

(Picture Courtesy: Freepik)
असम में इसे 'भोगली बिहू' कहा जाता है, जिसका मतलब है भोज या आनंद का त्योहार। यहां लोग बांस और घास से 'भेलाघर' और 'मेजी' बनाते हैं, जिसे उत्सव के अंत में जला दिया जाता है। पारंपरिक बीहू नृत्य और खास रूप से तिल और चावल के बने 'पीठा' यहां की खासियत हैं।
पश्चिम बंगाल- पौष संक्रांति
बंगाल में इसे 'पौष संक्रांति' कहते हैं। इस दिन गंगासागर में स्नान के लिए देश भर से श्रद्धालु उमड़ते हैं। घरों में दूध, चावल और खजूर के गुड़ से बने 'पातिसापता' और 'पीठे' जैसे पकवान बनाए जाते हैं।
भले ही इसके नाम अलग हों, चाहे वह खिचड़ी हो, पोंगल, बिहू या उत्तरायण, लेकिन इस पर्व का मूल संदेश एक ही है- प्रकृति का आभार व्यक्त करना, सूर्य की उपासना और आपसी प्रेम।
झारखंड- तुसु पर्व
झारखंड के आदिवासी क्षेत्रों में संक्रांति को 'तुसु पर्व' (Tusu Parab) के रूप में मनाया जाता है। यह फसल कटाई का उत्सव होता है, जो अपनी कलात्मकता के लिए जाना जाता है। इसकी तैयारियां दिसंबर से ही शुरू हो जाती है। यहां की लड़कियां मिट्टी से 'तुसु' की मूर्तियां बनाना शुरू कर देती हैं, जो उम्मीद और उर्वरता का प्रतीक मानी जाती हैं। यहा पतंगबाजी या अलाव जलाने की जगहग, लोकगीतों और लोककथाओं का महत्व ज्यादा है। 14 जनवरी को नाच-गाने और सामूहिक भोज के बाद नदी में मूर्तियों का विसर्जन किया जाता है।
उत्तराखंड- उत्तरायणी
उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में यह पर्व 'उत्तरायणी' के नाम से मशहूर है। यहां बागेश्वर इस उत्सव का मुख्य केंद्र होता है, जहां भव्य मेला लगता है। अन्य जगहों की तरह यह केवल घरों तक सीमित त्योहार नहीं है, बल्कि यह घाटों और बाजारों में मनाया जाने वाला एक सामुदायिक उत्सव है। कड़ाके की ठंड के बावजूद, लोग सूर्योदय से पहले पवित्र नदियों में डुबकी (माघ स्नान) लगाने आते हैं।
पश्चिम भारत (महाराष्ट्र और राजस्थान)- संक्रांत
महाराष्ट्र और राजस्थान में इसे 'सक्रात' या संक्रांत कहा जाता है। यहां यह पर्व सादगी और सामाजिक मेल-जोल का प्रतीक माना जाता है। शोर-शराबे के बिना इस त्योहार को बनाते हुए यहां 'तिल-गुड़' बांटने की परंपरा है। लोग एक-दूसरे को तिल और गुड़ की मिठाइयां देते हैं और कहते हैं- "तिल-गुड़ खाओ और मीठा-मीठा बोलो।" यह दिन पुराने गिले-शिकवे भुलाकर रिश्तों को नया आयाम देने का होता है।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।