3000 साल पुराना स्वाद, जिसे आज भी मांगता है हर भारतीय दिल! जानिए अचार का अनोखा इतिहास
आज स्वाद बढ़ाने वाला अचार पहले था खाना बचाने की एक पारंपरिक तकनीक।

अचार का 3000 साल पुराना इतिहास (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय व्यंजनों में खाने का स्वाद बढ़ाने वाले अचार के तो क्या ही कहने। वो अचार जो छोले-भटूरे की प्लेट में कॉम्प्लिमेंट्री है, नापसंद डिश को खाने की हिम्मत देता है तो कभी-कभी चटपटा खाने की क्रेविंग को शांत भी करता है। वहीं, शाही थालियों और पारंपरिक व्यंजनों में भी इसे खासतौर से शामिल किया जाता है।
कभी सोचा है कि यह अचार हमारी थाली का इतना अहम हिस्सा कैसे बना? क्या है इसके बनने से जुड़ा इतिहास? अगर नहीं तो चलिए आज आपको अचार की कहानी सुनाते हैं।
खीरे के अचार से शुरू हुई थी कहानी
कहते हैं अचार की खोज आज से करीब 3000 साल हुई थी, जब वायनाड की टिगरिस घाटी में भारत के देसी खीरे का अचार बनता था। इतना ही नहीं, अचार का जिक्र मोरक्को के प्रसिद्ध यात्री और मोहम्मद-बिन-तुगलक की जीवन के बारे में लिखने वाले इब्न बतूता ने भी किया है। उनके शब्द कुछ ऐसे थे कि ‘अगर कोई कच्चा आम किसी रोज पेड़ से गिर जाता है तो लोग उसमें नमक डालकर प्रिजर्व करते हैं, ठीक वैसे ही जैसे हम नींबू के साथ करते हैं।’
आपको जानकर हैरानी होगी कि साल 1594 की गुरुलिंग देसिका के कन्नड़ पाठ लिंग पुराण में एक दो नहीं पचास से ज्यादा अचार के बारे में बताया गया है। पहले के समय में अचार खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि खाने को सुरक्षित रखने का एक तरीका था। उस समय शिकार न मिलने, ज्यादा ठंड पड़ने या सूखे जैसी स्थिति में लोगों ने भोजन सहेजने की तकनीक के तौर पर अचार बनाया था।
भारत में तीन तकनीक से बनते हैं अचार
भारत में अचार को तीन तरह की तकनीक से बनाया जाता है, एक तो सिरके में सरंक्षित करके, दूसरा नमक में सरंक्षित करके और तीसरी तकनीक तेल में सरंक्षित करके। इसमें भी आज भारत में अचार बनाने के लिए तेल का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। यह अचार को लंबे समय तक सुरक्षित रखने और उसे फंगस बचाने के लिए बेस्ट तरीका है।
फल-सब्जियों और नॉन वेज तक के बनते हैं अचार
हमने ज्यादातर आम, नींबू, आंवला, गोभी, अदरक, कटहल, हरी मिर्च और गाजर के अचार ही खाएं हैं। वहीं, भारत के कुछ राज्य ऐसे हैं जहां नॉन वेज अचार भी बनाए जाते हैं। खासकर कि दक्षिण भारत में चिकन, मछली, झींगा के अचार बनाए जाना आम बात है। इसमें भी कर्नाटक के कोडागु (कुर्ग) इलाके में सूअर के मांस का अचार तक खाया जाता है। जबकि उत्तर भारत में फलों और सब्जियों के ही अचार व्यंजन का हिस्सा हैं।
