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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 07, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    केले के नाम पर जहर तो नहीं खा रहे आप? कार्बाइड केमिकल से पके केले की 5 ट्रिक्स से करें पहचान

    Updated: Mon, 07 Oct 2024 01:29 PM (IST)

    कार्बाइड का इस्तेमाल केले को आर्टिफिशियल रूप से पकाने के लिए किया जाता है जो आपकी सेहत के लिए किसी जहर की तरह होता है। मार्केट में इन दिनों तीज-त्योहा ...और पढ़ें

    आप जो केला खा रहे हैं, वो जहरीले कार्बाइड केमिकल से तो नहीं पका? ऐसे करें पता (Image Source: jagran.com)
    आप जो केला खा रहे हैं, वो जहरीले कार्बाइड केमिकल से तो नहीं पका? ऐसे करें पता (Image Source: jagran.com)

    HighLights

    1. कार्बाइड से पका हुआ केला सेहत के लिए बेहद हानिकारक होता है।
    2. मार्केट में इन दिनों आर्टिफिशियल रूप से केले खूब बिक रहे हैं।
    3. कुछ आसान तरीकों से आप केमिकल से पके केले का पता लगा सकते हैं।

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। कार्बाइड (Carbide) एक जहरीला केमिकल है जिसके संपर्क में आने से सेहत से जुड़ी कई समस्याएं जैसे कि सिरदर्द, चक्कर आना, मतली, और यहां तक कि कैंसर भी हो सकता है। केला एक स्वादिष्ट और पौष्टिक फल है, जो हर मौसम में लोकल मार्केट में आसानी से मिल जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन दिनों आप जो केला खरीद रहे हैं वह नेचुरल तरीके से पकाया गया है या फिर उसे पकाने के लिए जहरीले कार्बाइड का इस्तेमाल किया गया है? जी हां, बाजार में कार्बाइड नामक केमिकल से पके केले (Carbide Banana) खूब बिक रहे हैं जिन्हें खाना आपके लिए बेहद नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे में, आइए इसकी पहचान की 5 ट्रिक्स (How To Identify Carbide Banana) जानते हैं।

    कार्बाइड से पके केले को कैसे पहचानें (How to Identify a Banana Ripened with Carbide)

    असली केला पहचानें

    क्या आप जानते हैं कि आप जो केला खा रहे हैं, वो नेचुकल तरीके से पका हुआ है या फिर कार्बाइड जैसे खतरनाक केमिकल से? दरअसल, नेचुरल तरीके से पका हुआ केला स्वादिष्ट होने के साथ-साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है। ऐसे केले पर काले धब्बे होते हैं और ये हल्के भूरे रंग के होते हैं। इसका छिलका दागदार होता है और गहरा पीला रंग लिए होता है।

    रंग पर ध्यान दें

    कार्बाइड से पका हुआ केला आपकी सेहत के लिए काफी नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे केले का छिलका एकदम चिकना और हल्के पीले रंग का होता है। इसके अंदर का हिस्सा हल्का हरा होता है, जबकि नेचुकल केले में ये हिस्सा काला होता है। कार्बाइड से पके केले की शेल्फ लाइफ भी बहुत कम होती है और ये जल्दी खराब हो जाते हैं।

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    पानी से करें टेस्ट

    केले की क्वालिटी को परखने का एक आसान तरीका है पानी का प्रयोग। जी हां, आपने सही सुना! पानी से आप आसानी से पता लगा सकते हैं कि आप जो केला खरीद रहे हैं वो नेचुकल तरीके से पका हुआ है या फिर कार्बाइड जैसी हानिकारक रसायनों से। इसके लिए आपको एक बर्तन में पानी लेना है और फिर उसमें केले को डालकर कुछ समय के लिए ऐसे ही छोड़ देना है। अगर केला पानी में डूब जाता है, तो यह मुमकिन है कि वह नेचुरली पका हुआ है, लेकिन अगर केला पानी के ऊपर तैरने लगता है, तो यह संकेत हो सकता है कि उसे कार्बाइड या फिर ऐसे ही किसी केमिकल से पकाया गया हो।

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    कहीं से कच्चा, कहीं से पका

    कार्बाइड से पके केले हर तरफ से एक जैसे नहीं पके होते हैं। ऐसे में, आप देखेंगे कि केले के कुछ हिस्से ज्यादा पके हुए लगते हैं, जबकि कुछ हिस्से अभी भी कच्चे या कम पके हुए होते हैं। इसलिए यह भी इस बात का साफ संकेत है कि आपके घर मौजूद केला नेचुरल तरीके से पकाया नहीं गया है।

    छूकर पता लगाएं

    जब हम नेचुरल तरीके से पका हुआ केला छूते हैं, तो हमें एक मुलायमपन महसूस होता है। यह मुलायमपन केले के अंदर से आता है, जबकि केले का बाहरी हिस्सा थोड़ा मजबूत रहता है। यानी केला मुलायम होने के बावजूद अपना आकार बनाए रखता है। दूसरी ओर, अगर आपने कभी ऐसा केला देखा हो जो पूरी तरह से पीला हो गया हो लेकिन छूने पर बहुत सख्त हो, तो यह संभव है कि उसे कार्बाइड जैसे किसी हानिकारक रसायन से पकाया गया हो। इस तरह के केले का बाहरी हिस्सा अंदर की तुलना में ज्यादा सख्त होता है।

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