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    भुट्टे का कीस हो या गराडू चाट, मध्यप्रदेश का रॉयल स्वाद जो कहीं और नहीं मिलेगा

    Updated: Sat, 11 Apr 2026 08:41 PM (IST)

    पोहा-जलेबी के अलावा मध्य प्रदेश में समृद्ध पाक विरासत है, जिसे होलकर, नवाब और बघेलखंड के शाही घरानों ने आकार दिया है। ...और पढ़ें

    होलकर, नवाबी और बघेलखंडी जायकों का अनोखा संगम (Picture Credit- AI Generated)

    होलकर, नवाबी और बघेलखंडी जायकों का अनोखा संगम (Picture Credit- AI Generated)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। जब बात भारत के 'दिल' यानी मध्य प्रदेश की होती है, तो सिर्फ इसके ऐतिहासिक मंदिर या जंगल ही याद नहीं आते, बल्कि जुबान पर यहां के लाजवाब व्यंजनों का स्वाद भी आ जाता है। मध्य प्रदेश का खानपान किसी एक शैली में बंधा हुआ नहीं है; यह उन कई शाही घरानों की विरासत है, जिन्होंने सदियों तक यहां राज किया। 

    मालवा के होलकर, भोपाल के नवाब और बघेलखंड के राजाओं की रसोइयों से निकले स्वाद आज भी यहां की गलियों में महकते हैं। आइए, आपको मध्य प्रदेश के ऐसे अनोखे स्वादों की सैर कराते हैं, जो आपको पूरे भारत में कहीं और नहीं मिलेंगे।

    इंदौर के होलकर घराने का स्वाद 

    जब जिक्र मध्य प्रदेश के खाने का हो, तो इंदौर का नाम जरूर आता है। इंदौर के जायकों को विकसित करने का श्रेय 'होलकर राजघराने' को जाता है। रानी अहिल्याबाई होलकर के समय से ही यहां के रहन-सहन और खानपान में एक खास असर देखने को मिलता। होलकर राजाओं का विदेश आना-जाना लगा रहता था, जिससे इंदौर में विदेशी व्यंजनों को हिंदुस्तानी मसालों के साथ खूबसूरती से पेश करने की कला विकसित हुई।

    • भुट्टे का कीस: होलकर घराने की सबसे अनोखी देन है 'भुट्टे का कीस'। यह मालवा की खासियत है जो शायद ही कहीं और मिले। इसमें ताजे भुट्टे को कद्दूकस करके घी या तेल में सेंका जाता है।
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    (Picture Credit- AI Generated)
    • गराडू की चाट: होलकरों ने इंदौर को सोने-चांदी के गहनों का 'सराफा बाजार' दिया, जो रात होते ही चटोरों की जन्नत बन जाता है। सर्दियों में यहां का खास स्नैक 'गराडू की चाट' खाने लोग दूर-दूर से आते हैं। यह जिमीकंद जैसी जड़ होती है, जिसे डीप फ्राई करके एक खास मसाले (अमचूर, काला नमक और अन्य गरम मसालों का मिश्रण) के साथ परोसा जाता है।

    जमींदारों की खास मिठास

    रसाल इंदौर के पुराने जमींदार परिवारों के यहां बनने वाली एक बेहद शाही मीठी डिश है। इसे बनाने के लिए चावल को गन्ने के रस में तीन-चार घंटे तक धीमी आंच पर उबाला जाता है और फिर मेवों से सजाकर परोसा जाता है। इसके अलावा, मध्य प्रदेश का सफर 'दाल-बाफले' के बिना अधूरा है। गेहूं और मक्के के आटे से बने बाफले राजस्थान की बाटी जैसे दिखते हैं, लेकिन ये अंदर से काफी नर्म होते हैं। इसे अरहर या उदड़ की दाल के साथ खाया जाता है।

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    भोपाल का नवाबी स्वाद

    अगर मालवा का खाना शाकाहारी जायकों से भरा है, तो राजधानी भोपाल का खानपान जाहनुमा घराने (जिनकी जड़ें अफगानिस्तान से थीं) और मुगलों से प्रभावित है।

    • भोपाली पसंदे: उत्तर भारत के पसंदे (जिसमें ग्रेवी होती है) से अलग, भोपाली पसंदे बिना हड्डी के गोश्त से बनते हैं और इनमें ग्रेवी नहीं होती।
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    (Picture Credit- AI Generated)
    • यखनी पुलाव: गोश्त के सूप (यखनी) में चावल को धीमी आंच (दम) पर पकाकर यह खुशबूदार पुलाव बनाया जाता है। दिल्ली सल्तनत से आया 'दाल गोश्त' भी भोपाल की शान है।

    रीवा का राजसी स्वाद

    मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से यानी बघेलखंड में रीवा रियासत का असर दिखता है। यहां का 'बघेली चिकन' बहुत मशहूर है, जिसे देसी घी और भुने हुए खड़े गरम मसालों में पकाया जाता है। इसके अलावा 'इंद्रहार' यहां का एक खास व्यंजन है, जो पांच अलग-अलग दालों को मिलाकर बनाया जाता है। इसका स्वाद राजस्थान की पंचमेल दाल की याद दिलाता है।

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