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    हलवाई की वो 'भूल' जिसने भारत को दी पहली बेक्ड मिठाई, आज भगवान जगन्नाथ को भी लगता है इसी का भोग

    Updated: Wed, 03 Jun 2026 02:22 PM (IST)

    इस आर्टिकल में आप ओडिशा की प्रसिद्ध मिठाई 'छेना पोड़ा' की दिलचस्प कहानी के बारे में जानेंगे। ...और पढ़ें

    कैसे एक हलवाई की गलती से हुआ 'छेना पोड़ा' का जन्म (Image Source: AI-Generated)

    कैसे एक हलवाई की गलती से हुआ 'छेना पोड़ा' का जन्म (Image Source: AI-Generated) 

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अक्सर कहा जाता है कि दुनिया की कुछ सबसे बेहतरीन चीजें इत्तेफाक या गलती से बन जाती हैं। भारत की एक बहुत ही स्वादिष्ट मिठाई के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था।

    जी हां, यह मिठाई कोई और नहीं, बल्कि ओडिशा की शान 'छेना पोड़ा' है, जिसे भारत की पहली बेक्ड मिठाई या देसी चीजकेक भी कहा जाता है।

    traditional Chhena Poda

    (Image Source: Magnific) 

    ऐसे हुआ सबसे अनोखी मिठाई का जन्म

    इस लाजवाब मिठाई की कहानी ओडिशा के नयागढ़ से शुरू होती है। बात बीसवीं सदी के बीच की है। सुदर्शन साहू नाम के एक हलवाई की दुकान थी। एक दिन रात के समय उनके पास काफी सारा ताजा छेना बच गया। उस जमाने में फ्रिज तो होते नहीं थे, इसलिए छेने को खराब होने से बचाने के लिए उन्होंने एक तरकीब सोची।

    उन्होंने उस बचे हुए छेने में चीनी, इलायची और काजू मिलाए और उस बर्तन को कोयले की भट्टी पर छोड़ दिया। भट्टी बुझ चुकी थी, लेकिन उसमें अभी भी काफी गर्माहट बाकी थी।

    स्वाद ऐसा कि बनाने वाला खुद रह गया हैरान

    सुदर्शन जी ने बस इतना सोचा था कि हल्की गर्माहट से छेना रात भर में खराब नहीं होगा, लेकिन अगली सुबह जब उन्होंने भट्टी से बर्तन बाहर निकाला, तो नजारा कुछ और ही था। जी हां, रात भर की धीमी आंच ने चीनी को कैरामेलाइज कर दिया था, जिसकी वजह से छेने के बाहर एक सुनहरा, भूरा और हल्का क्रिस्पी क्रस्ट बन गया था।

    जब उन्होंने इसे काटकर चखा, तो इसका स्वाद इतना अद्भुत था कि वह खुद हैरान रह गए। अंदर से बिल्कुल नरम और बाहर से सोंधी खुशबू वाला- यह एक अनजाने जादू जैसा था।

    भगवान जगन्नाथ का प्रिय भोग

    देखते ही देखते सुदर्शन साहू की दुकान की यह नई मिठाई पूरे इलाके में मशहूर हो गई। आज यह ओडिशा की संस्कृति और परंपरा का एक बेहद अहम हिस्सा बन चुकी है। यह मिठाई इतनी शुद्ध और स्वादिष्ट होती है कि इसे पुरी के भगवान जगन्नाथ को बड़े ही प्रेम से भोग के रूप में चढ़ाया जाता है।

    Lord Jagannath prasad sweet

    (Image Source: Magnific) 

    'छेना पोड़ा' बनाने की पारंपरिक विधि

    छेना पोड़ा की अनजाने में हुई खोज की कहानी जितनी दिलचस्प है, इसे बनाने की पारंपरिक विधि उतनी ही सोंधी और खुशबूदार है। पुराने समय में इसे लकड़ी की आग और साल के पत्तों का इस्तेमाल करके बनाया जाता था, जो इसके स्वाद में एक जादुई महक भर देते थे। आइए जानते हैं कि इसे पारंपरिक तौर पर कैसे पकाया जाता है।

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    जरूरी सामग्री

    • ताजा छेना: 2 लीटर फुल क्रीम दूध से फटा हुआ (पानी अच्छी तरह निकला हुआ)
    • चीनी या गुड़: आधा कप (स्वादानुसार)
    • सूजी: 2 चम्मच (छेने को बांधने के लिए)
    • इलायची पाउडर: 1 छोटी चम्मच
    • देसी घी: 1-2 चम्मच (बर्तन को चिकना करने के लिए)
    • सूखे मेवे: थोड़े से कटे हुए काजू और किशमिश
    • साल के पत्ते: बर्तन में बिछाने के लिए (यही पारंपरिक स्वाद का सबसे बड़ा राज है)

    बनाने का पारंपरिक तरीका

    • सबसे पहले दूध को उबालकर उसमें नींबू या सिरका डालकर फाड़ लिया जाता है। इसके बाद इसे सूती कपड़े में छानकर सारा पानी निकाल दिया जाता है। स्वादिष्ट छेना पोड़ा के लिए छेने का ताजा और बिल्कुल पानी-रहित होना बहुत जरूरी है।
    • एक बड़े बर्तन में ताजा छेना लें। इसमें चीनी, सूजी और इलायची पाउडर डाल दें। अब इसे हल्के हाथों से तब तक मसलें जब तक कि चीनी पूरी तरह घुल न जाए और छेना थोड़ा चिकना न हो जाए। ध्यान रहे, इसे बहुत ज्यादा आटे की तरह नहीं गूंथना है, बल्कि इसका हल्का दानेदार होना जरूरी है। आखिर में इसमें कटे हुए काजू और किशमिश मिला लें।
    • पारंपरिक तरीके में एक एल्युमीनियम या पीतल के गहरे बर्तन का इस्तेमाल किया जाता है। बर्तन के अंदर घी लगाया जाता है और फिर उसमें 'साल के पत्ते' बिछा दिए जाते हैं। पत्तों के ऊपर भी हल्का सा घी लगाया जाता है। इसके बाद छेने के तैयार मिश्रण को इन पत्तों के ऊपर सावधानी से डाल दिया जाता है।
    • अब बर्तन को अच्छी तरह ढक दिया जाता है। पुराने समय में इसे कोयले की भट्टी या लकड़ी के चूल्हे पर पकाया जाता था। बर्तन को सुलगते हुए गर्म कोयलों के ऊपर रखा जाता है और बर्तन के ढक्कन के ऊपर भी कुछ गर्म कोयले रख दिए जाते हैं। इससे बर्तन को ओवन की तरह ऊपर और नीचे दोनों तरफ से बराबर गर्माहट मिलती है।
    • इसे बिल्कुल धीमी आंच पर पकाया जाता है। जब पत्तों के जलने की हल्की-हल्की सोंधी खुशबू आने लगे और छेने के ऊपर कैरामेलाइज्ड चीनी का गहरा भूरा रंग बन जाए, तो इसे आंच से उतार लिया जाता है।
    • अगर आपके पास लकड़ी का चूल्हा या साल के पत्ते नहीं हैं, तो निराश न हों। आप इसे साधारण बेकिंग टिन में बटर पेपर लगाकर, ओवन में 180°C पर लगभग 40-45 मिनट तक बेक कर सकते हैं।
    • इसे पूरी तरह ठंडा होने दिया जाता है और फिर बर्तन से बाहर निकाला जाता है। बाहर से क्रिस्पी और अंदर से रुई जैसा मुलायम, यह पारंपरिक छेना पोड़ा मुंह में जाते ही घुल जाता है।

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