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    केसरिया भात से लेकर खिचड़ी तक, क्यों 'पीले पकवानों' के बिना फीका है Basant Panchami का त्योहार?

    Updated: Tue, 20 Jan 2026 12:21 PM (IST)

    वसंत पंचमी पर पीले पकवानों का विशेष महत्व है, जो ऋतुराज वसंत के आगमन और मां सरस्वती की पूजा का प्रतीक है। खेतों में लहलहाती सरसों का पीला रंग ऊर्जा और ...और पढ़ें

    Basant Panchami पर क्यों खाए जाते हैं पीले पकवान? (Image Source: AI-Generated)

    Basant Panchami पर क्यों खाए जाते हैं पीले पकवान? (Image Source: AI-Generated) 

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। वसंत पंचमी (Basant Panchami 2026) केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि ऋतुओं के राजा 'वसंत' के आगमन का उत्सव है। इस दिन न सिर्फ ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है, बल्कि यह दिन प्रकृति के रंगों में घुल जाने का भी है। अगर आपने गौर किया हो, तो इस त्योहार पर हर तरफ 'पीला रंग' ही छाया रहता है- चाहे वह कपड़े हों, फूल हों या फिर भोजन, लेकिन क्या आप जानते हैं कि वसंत पंचमी की थाली में केसरिया भात और खिचड़ी जैसे पीले पकवानों का होना इतना जरूरी क्यों माना जाता है (Basant Panchami 2026 Significance)? आइए जानते हैं।

    Yellow food for Saraswati Puja

    (Image Source: Freepik) 

    वसंत और पीले रंग का गहरा नाता

    वसंत पंचमी के आते ही कड़ाके की ठंड विदा लेती है और मौसम सुहावना हो जाता है। इस समय खेतों में सरसों की फसल लहलहाने लगती है, जिससे धरती पर मानो पीले रंग की चादर बिछ गई हो। पीला रंग ऊर्जा, उमंग और नई शुरुआत का प्रतीक है। यही कारण है कि इस दिन पीले रंग को इतना महत्व दिया जाता है और इसे खान-पान में भी शामिल किया जाता है।

    मिठास और खुशबू का संगम

    वसंत पंचमी के सबसे खास पकवानों में से एक है- 'केसरिया भात' या 'मीठे चावल'। इसे विशेष रूप से केसर, चीनी, चावल और सूखे मेवों के साथ तैयार किया जाता है। केसर न केवल इसे एक सुंदर सुनहरा रंग देता है, बल्कि इसकी भीनी-भीनी खुशबू त्योहार के माहौल को और भी पवित्र बना देती है।

    मान्यता है कि मां सरस्वती को पीला रंग अत्यंत प्रिय है। इसलिए, उन्हें प्रसन्न करने के लिए केसरिया भात का भोग लगाया जाता है। यह पकवान समृद्धि और खुशहाली का आशीर्वाद माना जाता है।

    Basant Panchami food

    (Image Source: AI-Generated) 

    सादगी में छिपा स्वाद

    जहां एक तरफ मीठे चावलों की धूम होती है, वहीं दूसरी तरफ कई जगहों पर वसंत पंचमी के दिन कई जगहों पर 'पीली खिचड़ी' बनाने की भी परंपरा है। दाल और चावल से बनी यह खिचड़ी न केवल सुपाच्य होती है, बल्कि इसे भी मां सरस्वती को भोग के रूप में अर्पित किया जाता है। कई स्थानों पर लोग इस दिन भंडारे का आयोजन करते हैं जहाँ प्रसाद के रूप में खिचड़ी ही बांटी जाती है।

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    basant panchami sweets

    (Image Source: Freepik) 

    अन्य पीले पकवानों की बहार

    केसरिया भात और खिचड़ी के अलावा, इस दिन बूंदी के लड्डू, बेसन के लड्डू और राजभोग जैसी मिठाइयां भी खूब खाई और खिलाई जाती हैं। मकसद सिर्फ एक ही होता है- अपने जीवन में मिठास घोलना और प्रकृति के इस पीले रंग के उत्सव में पूरी तरह शामिल हो जाना।

    वसंत पंचमी का त्योहार हमें सिखाता है कि सादगी में भी उत्सव मनाया जा सकता है। चाहे वह केसरिया भात की शाही मिठास हो या खिचड़ी का सादापन, ये 'पीले पकवान' ही इस त्योहार को पूर्ण बनाते हैं। इनके बिना वसंत का यह उत्सव सचमुच फीका-सा लगता है।

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