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क्या आपने चखी है कर्नाटक की ये ‘चिरोटी’? ढेर सारी परतों और लाजवाब स्वाद से बनती है खास मिठाई

Published: Sat, 05 Sep 2026 10:00 AM (IST)

चिरोटी कर्नाटक की एक मशहूर पारंपरिक मिठाई है, जो अपनी पतली, कुरकुरी परतों और लाजवाब स्वाद के लिए जानी जाती है।

कर्नाटक की पारंपरिक मिठाई चिरोटी (AI Generated Image)

कर्नाटक की पारंपरिक मिठाई चिरोटी (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। दक्षिण भारत के व्यंजनों की बात करते हैं, तो आमतौर पर हमारी जुबान पर डोसा, इडली, सांभर या वड़ा जैसी डिशेज का नाम आता है। ये डिशेज स्वादिष्ट होती हैं, लेकिन वहां की पारंपरिक मिठाइयों का स्वाद भी लाजवाब होता है। इनमें चिरोटी भी शामिल है, काफी मशहूर और लजीज मिठाई है। 

दक्षिण भारत में भी यह मुख्य रूप से कर्नाटक की मशहूर मिठाई है, जो अपनी खास बनावट और स्वाद के लिए जानी जाती है। आइए जानें आखिर इस मिठाई में ऐसा क्या है, जो इसे इतना खास बनाती है।  

कई पतली परतों से बनी मिठाई

चिरोटी की सबसे बड़ी खासियत और इसकी पहचान है बहुत महीन, कुरकुरी और ढेर सारी पतली परतें। एक अच्छी तरह से बनी चिरोटी की सबसे बड़ी खूबी ये होती है कि वह बाहर से देखने में कुरकुरी लगे, लेकिन जैसे ही मुंह में जाए, उसकी परतें तुरंत घुलने लगें। कुरकुरेपन और सॉफ्टनेस का ये बैलेंस ही इसे दूसरी मिठाइयों से अलग और खास बनाता है। 

चिरोटी बनाने की सामग्री और तरीका

इस स्वादिष्ट मिठाई को बनाने के लिए मैदा, घी और चीनी का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन सामग्रियों के संतुलन का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। इसे बनाने की विधि भी काफी दिलचस्प है। 

सबसे पहले मैदे की बहुत पतली-पतली रोटियां बेली जाती हैं। फिर इन रोटियों पर घी या घी और आटे की मिश्रण की परत लगाकर उन्हें एक-दूसरे के ऊपर रखा जाता है। इसके बाद इन्हें रोल किया जाता है और फिर दोबारा टुकड़ों में काटकर और बेलकर गर्म घी या तेल में तला जाता है। इसे तब तक तला जाता है, जब तक यह पूरी तरह से कुरकुरी न हो जाए। 

परोसने का अंदाज और खास मौके

तलकर तैयार की गई चिरोटी के ऊपर बारीक पिसी हुई चीनी छिड़की जाती है और स्वाद बढ़ाने के लिए कई जगहों पर इसे गर्म या ठंडे दूध के साथ परोसने का चलन भी है।

कर्नाटक की विरासत का हिस्सा

चिरोटी एक ऐसी मिठाई है, जो कर्नाटक के पारंपरिक खान-पान का अहम हिस्सा है। यही वजह है कि शादी-ब्याह, त्योहारों और अलग-अलग धार्मिक कार्यक्रमों व शुभ अवसरों पर इसे खासतौर से बनाया जाता है। कर्नाटक के अलावा, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के कुछ इलाकों में भी इस मिठाई के अलग-अलग रूप देखने को मिलते हैं।