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    अंग्रेजों की 'Tea' कैसे बनी हमारी कड़क देसी 'चाय'? रेलवे स्टेशनों पर 'फ्री' में पिलाकर लगाई गई थी लत!

    Updated: Tue, 14 Jul 2026 07:00 PM (IST)

    चाय भारतीयों के लिए सिर्फ एक ड्रिंक नहीं, बल्कि एक भावना है, जिसकी शुरुआत चीन में हुई थी। ...और पढ़ें

    कैसे चाय बनी भारतीयों की फेवरेट ड्रिंक? (AI Generated Image)

    कैसे चाय बनी भारतीयों की फेवरेट ड्रिंक? (AI Generated Image)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीयों के लिए चाय सिर्फ एक ड्रिंक नहीं है, बल्कि एक इमोशन है। कई लोगों के तो दिन की शुरुआत ही चाय की चुस्की के साथ होती है, लेकिन क्या आप जानते हैं भारतीय हमेशा से चाय के दीवाने नहीं थे। दरअसल, चाय की शुरुआत चीन के राजघरानों से हुई थी और अंग्रेजों के समय चाय का स्वाद भारत पहुंचा। आइए जानें भारतीयों की फेवरेट ड्रिंक चाय का इतिहास और कैसे ये भारत के हर घर तक पहुंच गया।

    गलती से हुई थी चाय की खोज

    चाय का इतिहास लगभग 5 हजार साल पुराना माना जाता है। एक मशहूर कहानी के अनुसार, 2737 ईसा पूर्व में चीन के एक राजा शेन नुंग एक पेड़ के नीचे बैठे थे और उनके सेवक उनके लिए पानी उबाल रहे थे। तभी हवा के झोंके से उस पेड़ की कुछ पत्तियां उबलते पानी में गिर गईं। 

    शेन नुंग को जड़ी-बूटियों का काफी ज्ञान था, तो जब उन्होंने पानी में गलती से गिरी पत्तियों के काढ़े को चखा, तो उन्हें इसका स्वाद काफी पसंद आया। कहा जाता है कि वो पत्तियां चाय की थीं और इसी तरह चाय की खोज चीन में हुई। धीरे-धीरे चीन में चाय का चलन बढ़ने लगा और तांग राजवंश के दौरान ये पूरे चीन में काफी मशहूर हो गई।

    China tea history

    (AI Generated Image)

    भारत में शुरू हुई चाय की खेती

    हालांकि, भारत के उत्तर-पूर्वी हिस्सों में जनजातियां सदियों से चाय की जंगली पत्तियों का इस्तेमाल काढ़े और दवा के रूप में रही थीं, लेकिन इसकी खेती नहीं की जाती थी और न ही ये रोजमर्रा की कोई ड्रिंक थी। भारत के घर-घर तक चाय पहुंचाने का क्रेडिट अंग्रेजों को जाता है। 

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    19वीं शताब्दी की शुरुआत में चाय के व्यापार पर चीन की मोनोपोली खत्म होने के बाद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में चाय के उत्पादन की शुरुआत की। 1830 के दशक में अंग्रेजों ने असम और दार्जिलिंग में बड़े पैमाने पर चाय के बागान लगाए गए। हालांकि, शुरुआत में इस चाय का उत्पादन केवल ब्रिटेन में निर्यात के लिए किया जाता था।

    कैसे बनी भारतीयों की पसंदीदा ड्रिंक?

    20वीं सदी की शुरुआत तक चाय सिर्फ इलीट वर्ग और अंग्रेजों की ड्रिंक बन गई, लेकिन आम लोगों को इसकी आदत लगवाने के लिए ब्रिटिशर्स ने कमाल की मार्केटिंग कैंपेन का इस्तेमाल किया। अब भारत में चाय का काफी उत्पादन होने लगा था, तो ब्रिटिशर्स ने रेलवे स्टेशन्स और कारखानों के पास फ्री टी स्टॉल्स चालू करवाए, जहां लोगों को मुफ्त में चाय पिलाई जाती थी। 

    हालांकि, अंग्रेजों की चाय बिना दूध और मसालों की होती थी और भारतीयों को ये स्वाद ज्यादा पसंद नहीं आया। तो जब आम भारतीयों तक चाय पहुंची, तो इसका देसी वर्जन बनाया गया। स्वाद के लिए इसमें दूध, चीनी और इलायची, अदरक जैसे मसाले डाले गए और इसे आज की इंडियन चाय का रूप मिला और धीरे-धीरे चाय भारत के हर घर का हिस्सा हो गई।