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    कहीं ‘पुचका’ तो कहीं ‘फूलकी’! मगध की गलियों से स्ट्रीट फूड तक... 2500 साल पुरानी है गोलगप्पे की कहानी

    Updated: Sun, 26 Jul 2026 01:30 PM (IST)

    कभी सोचा है कि हर गली-मोहल्ले के नुक्कड़ पर मिलने वाले गोलगप्पे आखिर आए कहां से? किसने सबसे पहले इस डिश को बनाया था? ...और पढ़ें

    मगध और महाभारत से जुड़ा है गोल गप्पे का इतिहास (Image Source: AI Generated)

    मगध और महाभारत से जुड़ा है गोल गप्पे का इतिहास (Image Source: AI Generated)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। गोलगप्पे एक ऐसा स्ट्रीट फूड हैं जिसका नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है, पूरे भारत में शायद ही कोई राज्य या शहर हो जहां गोल गप्पे न मिलते हों। हां, वो बात है कि हर जगह इनके नाम अलग देखने को मिल सकते हैं। कहीं फूलकी, कहीं पानी पूरी तो कहीं गोल गप्पे ही कहा जाता है। आज हम इसी स्वादिष्ट स्ट्रीट फूड के इतिहास पर चर्चा करेंग कि आखिर कहां से आए गोलगप्पे? 

    महाभारत से जुड़ा है गोल गप्पे का इतिहास 

    गोल गप्पे का इतिहास अभी का नहीं है इसका नाता पौराणिक कथाओं से बताया जाता है। कहते हैं महाभारत काल में गोलगप्पे द्रौपदी ने पांडवों को बनाकर खिलाए थे। पौराणिक कथाओं के अनुसार, द्रौपदी जब शादी करके पांडवों संग घर पहुंची तो कुंती ने पहली रसोई के दिन द्रौपदी की परीक्षा लेने की सोची। उस समय पांडवों का वनवास जारी था तो घर में खाने-पीने की बहुत कम सामग्री मौजूद थी। 

    थोड़े आटे और सब्जी से बने थे पहली बार गोलगप्पे 

    द्रौपदी को उन थोड़ी सी सब्जियों और आटे से ही पांडवों का पेट भरना था, तब उन्होंने पहली बार एक नई डिश यानी गोलगप्पे बनाए। इससे पांडवों का पेट भी भर गया और द्रौपदी कुंती की परीक्षा में भी सफल हुई। यह तो थी महाभरात काल से जुड़ी कहानी पर एक और कहानी इससे जुड़ी बताई जाती है। 

    मगध से जुड़ी है दूसरी कहानी 

    आज के दक्षिण बिहार को पहले मगध कहा जाता था, यह राज्य उस समय 16 महाजनपद में से एक था और इसकी राजधानी पाटलीपुत्र थी। तब ही करीब 2500 साल पहले फूलकी बनाई गई थीं। कहते हैं उसी समय गोल गप्पे में आलू का चटपटा मसाला डाला जाना शुरू हुआ था। 

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    गोलगप्पे के अलग-अलग नाम 

    दिल्ली में जहां इसे गोलगप्पे के नाम से जाना जाता है तो यूपी में पानी के बताशे, पड़ाके कहते हैं। वहीं, बिहार में फूलकी, ओडिशा में गुपचुप, झारखंड, बंगाल और छत्तीसगढ़ में पुचका, असम में फुस्का, राजस्थान में पताशी, गुजरात में पकोड़ी, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिल नाडु जैसे दक्षिण भारत के क्षेत्रों में पानी पूरी कहते हैं। इस तरह गोलगप्पे के इतिहास को लेकर तो दो कहानियां बताई जाती है, लेकिन इस बात में कोई राय नहीं कि इतिहास जो भी हो, गोल गप्पे आज भी सबका पसंदीदा स्ट्रीट फूड बना हुआ है।