सेशेल्स की डिश में महका दक्षिण भारत का स्वाद! जानिए क्या है 'कारी कोको' जिसका पीएम मोदी ने भी किया जिक्र
भारत और सेशेल्स के रिश्तों में घुली है देसी मसालों की वो महक, जिसने समंदर की दूरी को मिटाकर दोनों देशों के खाने को एक जैसा बना दिया। ...और पढ़ें

सेशेल्स की कोको कारी का क्या है भारत से नाता? (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब 28 जून 2026 को सेशेल्स की संसद में वहां की खास डिश 'कारी कोको' का नाम लिया, तो उससे मुझे मलयाली जुड़ाव सा महसूस हुआ। मोदी जी ने साफ कहा कि भारत और सेशेल्स के रिश्ते रोजमर्रा की जिंदगी, त्योहारों और हमारे खाने के स्वाद में रचे-बसे हैं।
दरअसल बहुत साल पहले जब भारत के व्यापारी, नाविक और मजदूर जहाज से सेशेल्स के खूबसूरत द्वीपों पर पहुंचे, तो वे अपने साथ पोटलियों में हल्दी, धनिया, जीरा, मेथी और करी पत्ता भी समेटकर ले गए थे। जब हमारे भारतीय मसालों का मिलन सेशेल्स के ताजा नारियल, मछलियों और स्थानीय स्वाद से हुआ, तो जन्म हुआ कारी कोको का। यह व्यंजन इस बात का जीता-जागता सबूत है कि सदियों पहले कैसे दो संस्कृतियां एक ही कड़ाही में मिलकर एक हो गईं।
धीमी आंच का जादू
इस करी (सेशेल्स में प्रचलित भाषा क्रियोल में कारी) को बनाने का तरीका जितना सीधा है, इसका स्वाद उतना ही गहरा और मजेदार है। इसकी शुरुआत बिल्कुल हमारी कालीकट की दक्षिण भारतीय रसोइयों जैसी ही होती है। सबसे पहले बारीक कटी प्याज, लहसुन और अदरक को नारियल के तेल में धीमी आंच पर तब तक पकाया जाता है जब तक कि उसकी सोंधी खुशबू पूरे घर में न फैल जाए।
फिर इसमें करी पाउडर और हल्दी डाली जाती है, जिससे इसका रंग एकदम चमकीला और खूबसूरत पीला हो जाता है। इसके बाद इसमें सेशेल्स की खास दालचीनी और ताजी मिर्च डालकर स्थानीय ट्विस्ट दिया जाता है।
नारियल दूध का मखमली स्पर्श
इस पूरी रेसिपी की असली बात इसके आखिरी हिस्से में छिपी है। जब मसाले और मांस या मछली अच्छी तरह भुन जाते हैं, तब इसमें नारियल का गाढ़ा और मखमली दूध डाला जाता है।
नारियल का दूध गिरते ही मसालों का तीखापन एकदम शांत हो जाता है और करी को एक मलाईदार, रेशमी टेक्सचर मिलता है। इसके बाद इसे धीमी आंच पर तब तक उबाला जाता है जब तक कि मांस या मछली मसालों के रस को पूरी तरह अपने अंदर न सोख ले।
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एक ही धागे से बंधी रसोई
खाना वास्तव में एक ऐसी भाषा है जिसे दुनिया का हर इंसान बिना किसी अनुवाद के समझता है। इसे देखकर कोई भी कह सकता है कि यह भारत के केरल या गोवा के किसी तटीय गांव में बनने वाली करी जैसी ही है। आप भले ही एक-दूसरे की बोली या भाषा न समझ पाएं, लेकिन उबले हुए सफेद चावल के साथ कारी कोको का एक चम्मच मुंह में जाते ही दोनों देशों के लोग आपस में जुड़ जाते हैं। यह स्वाद याद दिलाता है कि भले ही हमारे बीच हजारों मील लंबा समंदर हो, लेकिन हमारा दिल और रसोई एक ही धागे से बंधी है!
आजमा कर देखिए
सामग्री: 500 ग्राम चिकन या मछली, 1 कप नारियल का दूध, 2 चम्मच नारियल तेल, 1 प्याज, 4 लहसुन की कलियां, 1 चम्मच अदरक, 1 चम्मच हल्दी, 1 चम्मच करी पाउडर, 1 छोटा टुकड़ा दालचीनी, करी पत्ता, हरी मिर्च और नमक
इसे कुछ ऐसे बनाएं- कड़ाही में नारियल तेल गर्म करके दालचीनी, करी पत्ता, मिर्च, प्याज, अदरक और लहसुन को 2 मिनट भूनें। हल्दी और करी पाउडर डालकर धीमी आंच पर 15 सेकंड चलाएं। चिकन या मछली के टुकड़े डालें और मसालों के साथ 5 मिनट तक अच्छी तरह भून लें। नारियल का दूध और नमक मिलाएं। ढककर धीमी आंच पर 10 मिनट पकाएं जब तक करी गाढ़ी न हो जाए। अच्छी तरह पक जाने पर इसे गरमा-गरम सफेद चावल के साथ परोसें!
(लेखक- डॉ. एम.सी. वशिष्ठ. केरल)