फूड लेबलिंग के नए नियम बदल देंगे आपकी खरीदारी का तरीका, 'फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग' पर हो रहा विचार
क्या आप जानते हैं कि जो पैकेज्ड फूड आप खरीद रहे हैं, वह आपकी सेहत के लिए कितना सुरक्षित है? बता दें, इसी बात को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक ...और पढ़ें

पैकेज्ड फूड पर 'फ्रंट लेबल' क्यों है जरूरी? (Image Source: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बाजार से अपना पसंदीदा स्नैक खरीदते समय, क्या आप कभी उसे पलटकर पीछे लिखे बारीक अक्षरों को पढ़ते हैं? शायद नहीं!
अक्सर हम स्वाद के चक्कर में यह भूल जाते हैं कि उस पैकेट में कितनी चीनी या फैट छिपा है, लेकिन अब यह 'छिपा हुआ सच' जल्द ही आपके सामने होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) को निर्देश दिया है कि खाने के पैकेट के बिल्कुल सामने (फ्रंट-ऑफ-पैक) चेतावनी या जानकारी देने पर विचार किया जाए। आइए, डिटेल में समझते हैं इसके बारे में।

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क्या है 'फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग'?
सुप्रीम कोर्ट जिस नियम की बात कर रहा है, उसे 'फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग' कहा जाता है। इसका सीधा मतलब यह है कि किसी भी खाने के पैकेट के सामने वाले हिस्से पर यह साफ-साफ लिखा होना चाहिए कि उस प्रोडक्ट में चीनी, नमक और फैट की मात्रा कितनी है। अभी तक यह जरूरी पोषण जानकारी पैकेट के पीछे बहुत छोटे अक्षरों में छिपी होती है, जिसे पढ़ना अक्सर मुश्किल होता है।
एक नजर में मिलेगी पूरी जानकारी
इस बदलाव का सीधा फायदा हम और आप जैसे ग्राहकों को होगा। जब पैकेट के सामने ही चीनी और फैट की जानकारी लिखी होगी, तो सामान खरीदते समय हम तुरंत समझ पाएंगे कि वह खाना हमारी सेहत के लिए सही है या नहीं। हमें जानकारी ढूंढने के लिए पैकेट को पलटने या बारीक अक्षरों को पढ़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

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बीमारियों से बचाव में मिलेगी मदद
जब लोगों को यह पता होगा कि वे कितनी मात्रा में नमक, चीनी या फैट का सेवन कर रहे हैं, तो वे अपनी सेहत को लेकर ज्यादा जागरूक हो सकेंगे। पैक्ड फूड का चुनाव सावधानी से करने पर मोटापे और दिल से जुड़ी बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है और FSSAI को एक महीने का समय दिया है। इस दौरान प्राधिकरण को कोर्ट को यह बताना होगा कि वह इस नियम को कैसे लागू करेगा और इसके लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।