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    कहीं आपकी नसें भी तो चुपके-चुपके नहीं हो रहीं डैमेज? शरीर के अंदर ही छिपे हो सकते हैं इसके 3 कारण

    Updated: Sun, 04 Jan 2026 11:41 AM (IST)

    क्या आप जानते हैं कई बार हमारे शरीर में ऐसे फैक्टर छिपे होते हैं, जो धीरे-धीरे हमारी नसों को नुकसान (Nerve Damage) पहुंचाते हैं और हमें पता भी नहीं चल ...और पढ़ें

    कैसे करें नर्व डैमेज की पहचान? (Picture Courtesy: Freepik)

    कैसे करें नर्व डैमेज की पहचान? (Picture Courtesy: Freepik)

    HighLights

    1. नसें हमारे शरीर के सबसे सेंसिटिव हिस्सों में से एक हैं

    2. नर्व डैमेज के कारण शरीर में कई परेशानियां शुरू हो सकती हैं

    3. शरीर में छिपे कई वजहों से नर्व डैमेज हो सकते हैं

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। नर्वस हमारे शरीर के सबसे सेंसिटिव हिस्सों में से एक है। हालांकि, तब भी हम इनकी सेहत पर कम ही ध्यान देते हैं (Nerve Damage Signs)। हम अक्सर खुद को बाहरी चोट या नुकसान से बचाने की कोशिश करते हैं, लेकिन कई बार हमारे शरीर के अंदर ही परेशानी की जड़ छिपी होती है। 

    आज हम ऐसी 3 कारणों की बात करने वाले हैं, जो चुपके-चुपके हमारे नर्वस को डैमेज कर सकते हैं और हमें पता भी नहीं चलता। इसलिए इनसे सावधानी बरतने की जरूरत होती है। आइए जानें इन कारणों (Causes of Nerve Damage) के बारे में। 

    हाई ब्लड शुगर 

    डायबिटीज या लगातार बढ़ा हुआ शुगर लेवल नसों को नुकसान पहुंचाने वाला सबसे बड़ा कारण है, जिसे मेडिकल भाषा में 'डायबिटिक न्यूरोपैथी' कहा जाता है। जब ब्लड में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है, तो यह नसों को पोषण देने वाली छोटी ब्लड वेसल्स की दीवारों को कमजोर कर देता है। इसके अलावा, बढ़ा हुआ शुगर नसों के सुरक्षात्मक परत को भी नष्ट करने लगता है। इसके सामान्य लक्षण हैं- अक्सर पैरों और हाथों में झुनझुनी, जलन, सुन्नपन या सुई चुभने जैसा अहसास होना।

    क्रॉनिक इंफ्लेमेशन 

    इंफ्लेमेशन यानी सूजन शरीर का एक इम्यून रिसपॉन्स है, लेकिन जब यह लंबे समय तक बनी रहती है, तो यह परेशानी की वजह बन जाता है। खराब लाइफस्टाइल, जंक फूड और स्ट्रेस की वजह से शरीर में साइटोकिन्स का स्तर बढ़ जाता है। ये नर्व टिश्यूज पर हमला करते हैं, जिससे नसों में सूजन आ जाती है और वे सिग्नल भेजने की क्षमता खोने लगती हैं। इसलिए क्रॉनिक इंफ्लेमेशन से बचने के लिए अपनी डाइट में एंटी-इन्फ्लेमेटरी फूड्स, जैसे- हल्दी, अदरक, ओमेगा-3 फैटी एसिड और हरी पत्तेदार सब्जियां शामिल करें।

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    विटामिन-बी की कमी 

    विटामिन-बी कॉम्प्लेक्स, खासतौर से बी1, बी6 और बी12, नसों के स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी हैं। विटामिन-बी12 नसों के ऊपर 'माइलिन' परत बनाने में मदद करता है। अगर यह परत हट जाए, तो नसें डैमेज होने लगती हैं। विटामिन-बी की कमी का सबसे मुख्य कारण है शाकाहारी खाना। साथ ही, पाचन तंत्र की समस्याओं या कुछ दवाओं के कारण भी इसका अब्जॉर्प्शन ठीक से नहीं हो पाता। इसके कारण मांसपेशियों में कमजोरी, याददाश्त कम होना और बैलेंस न बना पाने जैसी समस्याएं होने लगती हैं।

    Vitamin B12 Deficiency Symptoms

    इन खतरों से कैसे बचें?

    • नियमित जांच- अगर आपको डायबिटीज है, तो साल में कम से कम दो बार अपना HbA1c टेस्ट जरूर करवाएं।
    • सही खान-पान- प्रोसेस्ड शुगर और रिफाइंड कार्ब्स को कम करें। विटामिन-बी के लिए अंडे, डेयरी प्रोडक्ट्स और डॉक्टर की सलाह पर सप्लीमेंट्स लें।
    • फिजिकल एक्टिविटी- रोजाना कम से कम 30 मिनट की सैर ब्लड सर्कुलेशन को सुधारती है, जिससे नसों को भरपूर ऑक्सीजन मिलती है।
    • स्ट्रेस मैनेजमेंट- मेडिटेशन और गहरी सांस लेने वाले एक्सरसाइज क्रॉनिक इंफ्लेमेशन को कम करने में फायदेमंद हैं।

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