जब एक एक्सपर्ट ने ही तोड़ दिए डाइट के 3 सबसे बड़े नियम... फिटनेस की राह हो गई और भी आसान
अक्सर हम फिटनेस पाने के लिए कड़े अनुशासन और खुद पर पाबंदियां लगाने को सही मानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कभी-कभी नियमों को तोड़ना ही सेहत की असल ...और पढ़ें

क्या आप भी मान रहे हैं ये 3 पुराने डाइट रूल्स? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपने कभी सोचा है कि फिटनेस का रास्ता हमेशा बोरियत और पाबंदियों से ही क्यों गुजरता है? हम में से ज्यादातर लोग कार्ब्स छोड़ने, पानी के गिलास गिनने और अपनी फेवरेट मिठाई को देखकर मन मारने को ही 'हेल्दी लाइफस्टाइल' मान लेते हैं, लेकिन मशहूर न्यूट्रिशनिस्ट नमामी अग्रवाल ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है।
जी हां, उन्होंने फिटनेस के उन 3 'अटूट' नियमों को तोड़ दिया जो हमें सालों से डरा रहे थे, और नतीजा? फिटनेस पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गई। आइए, विस्तार से जानते हैं इस बारे में।

(Image Source: Freepik)
कार्ब्स से डरना छोड़ें
ज्यादातर लोग फिटनेस के नाम पर सबसे पहले अपनी डाइट से 'कार्ब्स' को पूरी तरह हटा देते हैं। एक्सपर्ट का मानना है कि कार्बोहाइड्रेट से डरने की जरूरत नहीं है। इसकी जगह हमें यह समझने पर ध्यान देना चाहिए कि हम कितनी मात्रा में और किस समय कार्ब्स खा रहे हैं। जब आप सही समय पर सही मात्रा का चुनाव करते हैं, तो फिटनेस का सफर बोझ नहीं लगता है।
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माइंडफुल ईटिंग अपनाएं
अक्सर डेजर्ट या अपनी पसंद का मीठा खाने के बाद लोग गिल्ट महसूस करने लगते हैं, लेकिन असली फिटनेस मीठा छोड़ने में नहीं, बल्कि उसे खाने के तरीके में है। खुद को कोसने के बजाय 'माइंडफुल एन्जॉयमेंट' यानी पूरी जागरूकता के साथ स्वाद लेकर खाना शुरू करें। जब आप खुशी से खाते हैं, तो वह आपके मानसिक और शारीरिक संतुलन को बेहतर बनाता है।
शरीर की जरूरत को समझें
हम अक्सर खुद को मजबूर करते हैं कि हमें दिन भर में इतने गिलास पानी पीना ही है। एक्सपर्ट ने इस नियम को भी पीछे छोड़ दिया है। अब पानी के गिलास गिनने के बजाय अपने शरीर की आवाज यानी 'प्यास' को सुनना शुरू करें। आपका शरीर खुद जानता है कि उसे कब और कितने पानी की जरूरत है।
असल सेहत किसी कड़े अनुशासन का नाम नहीं है, बल्कि यह अपने शरीर के साथ एक कोमल और गहरी समझ विकसित करने का नाम है। जब आप अपने शरीर की जरूरतों को समझने लगते हैं, तो फिटनेस की मेहनत अपने आप कम हो जाती है और नतीजे बेहतर मिलने लगते हैं।