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    हार्ट अटैक और स्ट्रोक से बचने का रामबाण है स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, 30 साल पुरानी स्टडी का बड़ा दावा!

    Updated: Fri, 05 Jun 2026 02:43 PM (IST)

    एक स्टडी में दावा किया गया है कि स्ट्रेंथ ट्रेनिंग दिल के दौरे और स्ट्रोक दोनों ही खतरे को कम करती है। ...और पढ़ें

    स्ट्रेंथ ट्रेनिंग डेली रूटीन का हिस्सा हो तो अटैक के खतरे को टाला जा सकता है (Image Source: Freepik)

    स्ट्रेंथ ट्रेनिंग डेली रूटीन का हिस्सा हो तो अटैक के खतरे को टाला जा सकता है (Image Source: Freepik)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली: हार्ट अटैक और स्ट्रोक के बढ़ते मामले अब इस बात पर सोचने को मजबूर कर रहे हैं कि आखिर इससे बचने का रामबाण तरीका क्या है। इसे लेकर हाल ही में एक स्टडी सामने आई है, जिसमें दावा किया गया है कि स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से दिल के दौरे और स्ट्रोक दोनों ही खतरे को कम किया जा सकता है। 

    स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से कैसे कम होता है हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा? 

    ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन की करीब 30 साल पुरानी स्टडी में यह दावा किया जा रहा है कि 90 से 120 मिनट की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से जान का खतरा बहुत हद तक टल जाता है। दूसरे शब्दों में कहें तो यह स्टडी स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के माध्यम से एक सेहतमंद जिंदगी की ओर इशारा करती है। 

    इस स्टडी में तो यह भी कहा गया है कि अगर इसमें एरोबिक एक्सरसाइज को भी जोड़ दिया जाए तो इससे फायदे और भी बढ़ जाते हैं। हावर्ड की स्टडी कहती है कि स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को दिनचर्या का हिस्सा बनाने से दिल की बीमारी का खतरा 19% और दिमाग से जुड़ी बीमारी का 27% तक खतरा कम हो जाता है। 

    इसके अलावा, जो लोग हर हफ्ते एरोबिक एक्टिविटी और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग दोनों करते हैं उनमें यह खतरा और भी कम देखा गया है। वैसे भी एरोबिक एक्सरसाइज से व्यक्ति ज्यादा उम्र में भी यंग दिखता है यह बात जगजाहिर है। पर यहां जानने वाली बात यह है कि मांसपेशियों को मजबूत करने की एक्सरसाइज से भी जान का खतरा टल जाता है। 

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    एक लाख से ज्यादा महिलाओं पर की गई स्टडी

    यह स्टडी पिछले 30 साल में कुल 147,374 पर की गई है जिसमें 31,540 पुरुष और 115,834 महिलायें शामिल हैं। इसमें हिस्सा लेने वालों पर हर दो साल में एक क्विज किया गया। इन लोगों ने इन 30 सालों में हर हफ्ते स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और एरोबिक एक्सरसाइज की थी। जहां एक तरफ एरोबिक एक्सरसाइज में ब्रिस्क वॉकिंग, रनिंग, जॉगिंग, स्विमिंग, साइकलिंग, टेनिस, स्क्वाश जैसी एक्सरसाइज शामिल थीं तो वहीं स्ट्रेंथ ट्रेनिंग में वेट लिफ्टिंग, प्रेस अप्स, स्क्वैट्स और लंजेस शामिल थीं। 

    वहीं, इस स्टडी में भाग लेने वाले लोगों की औसत उम्र 54 थी। सबसे खास बात जिन लोगों ने स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को अपने डेली रूटीन का हिस्सा बनाया वो अपनी उम्र से छोटे लगे, वजन भी कंट्रोल में रहा और उनका लाइफस्टाइल भी दूसरों के मुकाबले हेल्दी था। 

    इस स्टडी के दौरान 3-4 लोगों ने हफ्ते भर में 150 मिनट से ज्यादा स्ट्रेंथ ट्रेनिंग की, जबकि करीब 46% लोगों ने थोड़ी बहुत। वहीं, 30 सालों के अंदर 35,798 लोगों की मृत्यु हो गई। ऐसे में यह स्टडी इस नतीजे पर पहुंची हैं कि अगर स्ट्रेंथ ट्रेनिंग हफ्ते में करीब 90-119 मिनट तक की जाए तो इससे जान का खतरा 13% तक कम हो जाता है। इसके अलावा, 120 मिनट से ज्यादा किए जाने पर कोई बड़े फायदे नहीं देखे गए हैं।  

    स्ट्रेंथ ट्रेनिंग किन बीमारियों से बचाने में है फायदेमंद? 

    90-119 मिनट तक स्ट्रेंथ ट्रेनिंग दिल की बीमारी से होने वाली मौतों को करीब 19% तक कम कर देती है और इससे 27% न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का खतरा टलता है। इसके अलावा, डेली रूटीन में 1-29 मिनट हफ्ते के हिसाब से यह एक्सरसाइज की जाए तो यह कैंसर से शरीर की सुरक्षा 21% तक करती है और हर हफ्ते 30–59 मिनट तक स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करने से 18% तक कैंसर से शरीर सुरक्षित रहता है। 

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    Source:

    Pubmed