'गुड' और 'बैड' स्ट्रेस में क्या है फर्क? खतरनाक तनाव से बचने के 5 सबसे असरदार तरीके
किसी काम को ज्यादा फोकस के साथ करने, समय पर पूरा करने के लिए थोड़ा स्ट्रेस तो जरूरी है, लेकिन इसका लंबे समय तक बने रहना अनहेल्दी हो सकता है। ...और पढ़ें

गुड स्ट्रेस के फायदे और बैड स्ट्रेस से बचने के 5 आसान तरीके (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। मीटिंग से पहले सीने में भारीपन, पहली डेट से पहले पेट में खलबली या किसी डैडलाइन से पहले पसीने आना, ऐसा स्ट्रेस शायद आपने भी महसूस किया होगा? लेकिन क्या आपको पता है इस तरह का थोड़ा स्ट्रेस होना आपको नुकसान नहीं फायदा ही पहुंचता है।
मैनेजेबल स्ट्रेस को गुड स्ट्रेस की कैटेगरी में रखा गया है जोकि फोकस बढ़ाता है आपको मोटिवेट करता है और दबाव में भी काम करना सिखाता है। यही स्ट्रेस अगर लंबा और लगातार बना रहे तो वह बैड स्ट्रेस की श्रेणी में आ सकता और आपकी सेहत के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। आइए, गुड स्ट्रेस और बैड स्ट्रेस की इस पहेली को समझें और हेल्दी तरीके से इससे निपटने के 5 तरीकों के बारे में जानें।
स्ट्रेस हेल्दी या अनहेल्दी ऐसे जानें
इसका पता लगाने के लिए आपको खुद से ही दो सवाल करने होंगे:
- क्या वह स्ट्रेस आपको प्रेरित करता या थका देता है
- काम खत्म होने के बाद आप राहत महसूस करते हैं या तनाव उसके बाद भी बना रहता है
अगर काम खत्म होने के बाद आपका स्ट्रेस चला जाता है और आपको खुशी महसूस होती है तो वह हेल्दी की कैटेगरी में आएगा। वहीं, काम का स्ट्रेस खत्म होते ही फिर से स्ट्रेस महसूस होने लगे तो यह आपकी सेहत के लिए नुकसानदायक है और यह बैड स्ट्रेस है।
इस तरह लड़ें बैड स्ट्रेस से
- सबसे पहले जानें: जब तक सिरदर्द, शरीर में हल्कापन, चिड़चिड़ाहट जैसे लक्षण नजर नहीं आने लगते लोगों को पता ही नहीं चलता कि वो स्ट्रेस में हैं। इसलिए जितनी जल्दी हो सके अपने स्ट्रेस को पहचानें।
- माइक्रो-ब्रेक्स भी काफी हैं: स्ट्रेस दूर करने के लिए पूरा दिन आराम करने की जरूरत नहीं, बस कुछेक पल भी आपको राहत दे सकते हैं। 5 मिनट का माइक्रो-ब्रेक भी आपके स्ट्रेस को हल्का कर सकता है, मेंटल फॉग को हटा सकता है और ज्यादा फोकस के साथ काम करने में मदद कर सकता है।
- मूवमेंट भी जरूरी है: फिजिकल मूवमेंट भी आपके तनाव को दूर करने के लिए जरूरी होता है। इससे कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हॉर्मोन को कम करने और ब्रेन में फील-गुड केमिकल बढ़ाने में मदद मिलती है।
- अकेले में न झेलें स्ट्रेस: कई बार अकेलापन भी स्ट्रेस को बढ़ाने का काम करता है, इसलिए अपने दोस्तों और शुभचिंतकों से कनेक्शन बनाए रखें। अपने दिल की बात उनसे करें, हो सके तो अपना स्ट्रेस भी उनसे बांटें। आपको महसूस होगा कि आप अकेले नहीं हैं।
- रूटीन में लाएं कुछ बदलाव: अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ ऐसी चीजों को शामिल करें जो आपको सुकून पहुंचाते हों। जैसे अपनी कोई मनपसंद रेसिपी बनाना, किताब पढ़ना या सोने से पहले जर्नल लिखना।