क्या आपका बच्चा अंदर ही अंदर परेशान है? ये 5 संकेत बताते हैं कि वो छिपा रहा है अपनी एंग्जायटी
हमें लगता है कि बचपन का मतलब तो सिर्फ खेल-कूद और बेफिक्री है, भला इन छोटे बच्चों को क्या टेंशन हो सकती है! लेकिन सच्चाई इससे काफी अलग है। ...और पढ़ें

अगर आपका बच्चा दिखा रहा है ये 5 लक्षण, तो वो एंग्जायटी का शिकार हो सकता है (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। माता-पिता होने के नाते हम हमेशा अपने बच्चों को खुश और सुरक्षित देखना चाहते हैं, लेकिन कई बार बच्चे अंदर ही अंदर किसी बात से बहुत परेशान होते हैं और हमें इस बात की भनक तक नहीं लगती। जी हां, एंग्जायटी या तनाव सिर्फ बड़ों को नहीं, बच्चों को भी होता है।
सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि बच्चे अक्सर अपनी परेशानी को शब्दों में बयां नहीं कर पाते। वे डरते हैं कि कहीं माता-पिता नाराज न हो जाएं या उन्हें समझ न पाएं। ऐसे में, उनकी घबराहट उनके व्यवहार के जरिए बाहर आने लगती है। आइए, फोर्टिस हॉस्पिटल, फरीदाबाद में न्यूरोलॉजी के डायरेक्टर डॉ. विनीत बंगा से जानते हैं वो 5 अहम संकेत जो बताते हैं कि आपका बच्चा शायद अपनी एंग्जायटी आपसे छिपा रहा है।

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नींद या भूख में अचानक बदलाव
अगर आपका बच्चा रात में ठीक से सो नहीं पा रहा है, उसे बार-बार डरावने सपने आ रहे हैं, या वह रात को अचानक उठकर बैठ जाता है, तो यह चिंता का विषय है। इसके अलावा, अगर उसने अचानक से खाना-पीना बहुत कम कर दिया है या बहुत ज्यादा खाने लगा है, तो यह इस बात का इशारा है कि अंदर ही अंदर कुछ उसे खाए जा रहा है। एंग्जायटी सबसे पहले हमारी इसी बेसिक रूटीन पर असर डालती है।
छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन या गुस्सा
क्या आपका शांत और खुशमिजाज बच्चा आजकल छोटी-छोटी बातों पर रोने लगता है या बहुत जल्दी गुस्सा हो जाता है? जब बच्चे अंदर से डरे हुए, परेशान या उलझन में होते हैं, तो वे अपनी भावनाएं संभाल नहीं पाते। ऐसे में उनका तनाव गुस्से, जिद या चिड़चिड़ेपन के रूप में बाहर निकलने लगता है।
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बिना किसी बीमारी के शारीरिक परेशानी
कई बार एंग्जायटी सिर्फ दिमाग तक सीमित नहीं रहती, उसका असर सीधे तौर पर शरीर पर भी दिखता है। अगर बच्चा अक्सर स्कूल जाने से पहले, किसी टेस्ट के दिन या घर से बाहर जाते समय बार-बार पेट दर्द, सिरदर्द या उल्टी आने की शिकायत करता है, और डॉक्टर को जांच में कोई बीमारी नहीं मिलती, तो यह उसके स्ट्रेस का एक बड़ा संकेत हो सकता है।
दोस्तों और परिवार से दूरी बनाना
अगर आपका बच्चा अचानक से अपने पसंदीदा खेलों में हिस्सा लेना बंद कर दे, अपने जिगरी दोस्तों से मिलने से कतराने लगे या परिवार के साथ बैठने के बजाय ज्यादातर समय अपने कमरे में अकेले बिताना पसंद करे, तो ध्यान दें। एंग्जायटी इंसान को भीड़ से काटकर अकेला कर देती है।

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पढ़ाई में फोकस की कमी
एंग्जायटी की वजह से बच्चे के दिमाग में एक साथ बहुत सी बातें और डर चलते रहते हैं। ऐसे में उसका ध्यान भटकना बहुत आम बात है। अगर अचानक से उसके स्कूल के मार्क्स गिरने लगें, उसे अपना रोज का होमवर्क पूरा करने में बहुत ज्यादा समय लगने लगे, या वह एक जगह टिक कर बैठ न पाए, तो उसे डांटने के बजाय उसकी परेशानी समझने की जरूरत है।
माता-पिता के तौर पर आप क्या करें?
अगर आपको अपने बच्चे में इनमें से कुछ संकेत नजर आएं, तो तुरंत घबराएं या गुस्सा न करें। अपने बच्चे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं और उनसे दोस्त की तरह प्यार से बात करें। उन्हें यह एहसास दिलाएं कि चाहे जो हो जाए, आप हमेशा उनके साथ हैं।
उनसे सीधा पूछने के बजाय घुमा-फिराकर उनके दिनभर के बारे में पूछें। अगर फिर भी आपको लगे कि बच्चा बहुत ज्यादा परेशान है और स्थिति आपके काबू से बाहर है, तो किसी अच्छे चाइल्ड काउंसलर या मनोवैज्ञानिक से मदद लेने में बिल्कुल न हिचकिचाएं। आपका सही समय पर दिया गया प्यार और सपोर्ट बच्चे की बड़ी से बड़ी परेशानी को आसानी से दूर कर सकता है।