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    कमर का बढ़ता घेरा है खतरे की घंटी! जानिए कैसे 'पेट का मोटापा' बन रहा है गंभीर बीमारियों की जड़

    Updated: Tue, 07 Apr 2026 12:56 PM (IST)

    मोटापा दैनिक जीवन की सहजता ही नहीं छीनता, बल्कि यह डायबिटीज, ब्लडप्रेशर, कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को जन्म भी दे सकता है। ...और पढ़ें

    पेट के पास बढ़ती चर्बी सिर्फ लुक नहीं, सेहत बिगाड़ती है (Picture Courtesy: Freepik)

    पेट के पास बढ़ती चर्बी सिर्फ लुक नहीं, सेहत बिगाड़ती है (Picture Courtesy: Freepik)

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। ब्लडप्रेशर, हार्ट रेट और डायबिटीज के नंबरों के आधार पर अपनी सेहत को लेकर आप आश्वस्त हो रहे हैं, तो थोड़ा रुकिए। अपनी कमर का आकार भी मापिए, अगर यह पहले से अधिक हो गया है, तो तय मानिए शरीर में एक नई समस्या ने घुसपैठ शुरू कर दी है। 

    पेट के आसपास जमा होती चर्बी मोटापे के ऐसे अनियंत्रित जाल में फंसा सकती है, जहां से निकलना कतई आसान नहीं है। आज दुनियाभर में करोड़ों लोग मोटापे से बाहर आने के लिए दवाओं और थेरेपी का सहारा ले रहे हैं। कुछ लोग तो स्लिम दिखने के लिए शार्टकट उपाय के तौर पर बिना मेडिकल निगरानी के खुद से ही दवाएं ले रहे हैं, यह तो और गंभीर मामला है। 

    मैक्स अस्पताल के एंड्रोक्राइनोलाजी और डायबिटीज विभाग के ग्रुप चेयरमैन डॉ. अंबरीश मित्तल बताते हैं कि डायबिटीज, ब्लडप्रेशर, हार्ट डिजीज, फैटी लिवर, कैंसर जैसी बीमारियां सीधे तौर पर मोटापे से जुड़ती हैं। इन सभी का शुरुआती बिंदु ही मोटापा है। खानपान का गलत तरीका देश की अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित करता है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 की यह चेतावनी बताती है कि बढ़ता मोटापा और अस्वस्थ खानपान न केवल व्यक्ति विशेष, बल्कि देश की आर्थिक सेहत को भी जोखिम डालता है।

    कैसे रुकेगा यह मोटापा?

    अगर मोटापे को रोकना है तो शुरुआत बचाव उपायों से करनी होगी। जीवनशैली में सुधार करना होगा। अपने आहार, व्यायाम, नींद को लेकर अनुशासित बनना होगा। यह सिलसिला बचपन से ही शुरू हो, तो बेहतर है। क्योंकि, बच्चे ओवरवेट नहीं होंगे, तो बड़े भी नहीं होंगे। जिन लोगों के लिए मोटापा बीमारी बन चुका है, उन्हें दवाओं की जरूरत होती है। वजन कम होगा, तो हार्टअटैक, फैटी लिवर, स्लीप एप्नियां जैसे जोखिम भी कम होंगे। 

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    डॉ. मित्तल चेताते हैं कि जो लोग बिना मेडिकल सुपरविजन या डाक्टर की सलाह के बगैर दवाएं ले रहे हैं या जिन्हें बाहरी दिखावे या अपने लुक के लिए दवाओं को लेना है, वे इनके संभावित दुष्प्रभाव के लिए भी तैयार रहें। कोई भी दवा खुद से नहीं बल्कि हमेशा डाक्टर की निगरानी में ही लेनी चाहिए।

    कमर के पास फैट खतरे का संकेत

    पेट के पास जमा होती चर्बी मेटाबोलिक और कार्डियोवैस्कुलर खतरों का संकेत हो सकती है। आमतौर पर हेल्थ सिस्टम में मोटापे को बीएमएआइ के आधार पर मापा जाता है, पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे बीमारियों की सही पहचान नहीं हो पाती। भारतीयों के बीएमआइ में मामूली वृद्धि होने के बावजूद पेट के पास मोटापा अधिक देखने में आता है। अगर बीएमआइ बढ़ने के साथ कमर का घेरा भी बढ़ रहा है, तो यह सेहत की अधिक चिंताजनक तस्वीर दिखाता है। 

    'पेट के मोटापे' में पेट के अंदर अत्यधिक वसा के जमाव के साथ लिवर तथा पैंक्रियास में भी वसा की मात्रा बढ़ी हुई होती है। चूंकि, यह आंतरिक अंगों की समस्या से जुड़ा है, इसलिए सामान्य मोटापे की तुलना में यह अधिक जोखिमभरा हो सकता है। 

    भारत में हर 10 में से लगभग छह महिलाएं (30-49 साल की उम्र) पेट के मोटापे से ग्रस्त हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में लगभग 40 प्रतिशत महिलाओं और 12 प्रतिशत पुरुषों में कमर का घेरा क्रमश: 80 सेमी. और पुरुषों में 94 सेमी. तक पहुंच चुका है। पेट के पास जमा होती चर्बी के पीछे शहरी जीवनशैली, गलत खानपान, घंटों बैठे रहने जैसे अनेक कारण जिम्मेदार होते हैं।

    Obesity (2)

    (AI Generated Image)

    कितनी प्रभावी है वेट लॉस की दवा?

    वजन घटाने वाली दवाएं उन हार्मोन की नकल करती हैं जो हमारी भूख को दबाते हैं। ये हार्मोन शरीर को पेट भरने का संकेत देते हैं। इनमें सबसे आम हैं 'ग्लूकागान-लाइक पेप्टाइड 1' (जीएलपी-1) और 'ग्लूकोज-डिपेंडेंट इंसुलिनोट्रोपिक पालीपेप्टाइड' (जीआइपी)। ये दवाएं कोशिकाओं की सतह पर मौजूद कुछ खास अणुओं से जुड़ जाती हैं, जिन्हें जीएलपी-1 और जीआइपी रिसेप्टर कहा जाता है। 

    ये रिसेप्टर शरीर को यह बताने में अहम भूमिका निभाते हैं कि उसे अब और खाने की जरूरत नहीं है। आमतौर पर, शुरुआती कुछ हफ्तों के भीतर ही इन दवाओं का असर शुरू हो जाता है। हालांकि, इन दवाओं की मंजूरी केवल मोटापे से पीड़ित लोगों के लिए ही होती है, पर स्लिम दिखने के चक्कर में एक नया और निजी बाजार तैयार हो गया है।

    कब तक लेनी होती है दवा?

    मोटापे से परेशान व्यक्ति को इन दवाओं का सेवन लंबे समय तक करना पड़ सकता है। वैज्ञानिक अध्ययन से पता चलता है कि इलाज की औसत अवधि 39 हफ्तों की होती है। अगर किसी को लगता है कि वे अपनी इच्छाशक्ति से वजन कम कर लेंगे, तो ऐसा नहीं होता।

    एक स्टडी में पाया गया है कि वजन घटाने वाली दवाएं बंद करने के बाद वजन फिर से बढ़ने की रफ्तार चार गुणा तक तेज हो सकती है। इसलिए जरूरी है कि ऐसी दवाओं का प्रयोग हमेशा डॉक्टर की निगरानी में किया जाए, तो बेहतर है।

    • 2.7 करोड़ भारतीय बच्चों और किशोरों (5 से 19 वर्ष) के मोटापाग्रस्त होने का अनुमान है 2030 तक, यह वैश्विक आंकड़ों का 11 प्रतिशत है।
    • फास्ट फूड, अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड, फैट व शुगर की अधिकता वाले बेवरेज, नमक के अधिक सेवन से बढ़ रही है मोटापे की समस्या।
    • 3.4 प्रतिशत हो चुकी है अधिक वजन वाले बच्चों (पांच वर्ष से कम) की संख्या 2.1 प्रतिशत से बढ़कर 2019 से 2021 के बीच।
    • 8.3 करोड़ हो सकती है देश में  सामान्य से अधिक वजन वाले बच्चों की संख्या 2035 तक, जो 2020 में 3.3 करोड़ थी।
    • 40 गुणा बढ़ गया अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड का बाजार 2006 (0.9 बिलियन डालर) से 2019 (38 बिलियन डालर) के बीच।

    भारत में मोटापे की समस्या (नवीनतम एनएफएचएस के अनुसार)

    महिलाएं   24 प्रतिशत
    पुरुष  23 प्रतिशत

    अलग-अलग स्तरों पर हो बदलाव

    खानपान में बदलाव

    • संपूर्ण आहार- भोजन की थाली में सब्जियां, फल, मोटे अनाज, लीन प्रोटीन (मछली, बींस, पोल्ट्री आदि)
    • हाइ-कैलोरी पर नियंत्रण- स्नैक्स, फ्राइड, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और शुगर को कंट्रोल करना जरूरी है।
    • संतुलित प्रोटीन- प्लेट में प्रोटीन की मात्रा संतुलित हो और पेट भरने का संकेत मिलने पर रुक जाएं।
    • हाइड्रेट रहें- कैलोरी कम रखने के लिए शुगर वाले ड्रिंक्स के बजाय पानी का प्रयोग करना हमेशा बेहतर होता है।
    • भोजन स्किप न करें- एक टाइम भोजन छोड़ने पर आप दोबारा जरूरत से अधिक भोजन कर सकते हैं, इसलिए जरूरी है थोड़ा-थोड़ा करके दो बार में खाएं।

    शारीरिक गतिविधि

    • 150 मिनट का लक्ष्य- हर सप्ताह में कम के कम 150 से 300 मिनट मध्यम से तीव्रता वाली एक्सरसाइज करने का प्रयास करना चाहिए।
    • स्ट्रेंथ ट्रेनिंग- मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए हफ्ते में कम के कम दो दिन स्ट्रेंथ जरूरी है।
    • रोजाना की गतिविधि- सीढ़ियां चढ़ने, टहलने या कुछ काम खड़े होकर करने की आदत सेहत के लिए लाभप्रद हो सकती है।

    खुद से बढ़ाएं जागरूकता

    • मोटापे को नियंत्रण में रखने के लिए भोजन की मात्रा, एक्टिविटी का नोट बना सकते हैं।
    • हार्मोन को संतुलित रखने और भूख को नियंत्रित रखने के लिए सात से नौ से घंटे की नींद जरूरी है।
    • तनाव को कम करने के लिए गहरी सांस लेने, प्राणायाम करने और सुबह की सैर जैसे उपाय लाभप्रद हैं।
    • स्वजन, मित्र या स्वास्थ्य पेशेवर आपको मोटिवेट और जागरूक कर सकते हैं।

    बचपन से ही करें सही आदतों का विकास

    डॉ. अंबरीश मित्तल, चेयरमैन, एंडोक्राइनोलाजी एवं डायबिटीज, मैक्स हेल्थकेयर, दिल्ली बताते हैं कि भारत में एक चौथाई वयस्कों का वजन सामान्य से अधिक हो चुका है। महिलाओं में केवल एब्डोमेनल ओबिसिटी या सेंट्रल ओबिसिटी को लें, तो 40 प्रतिशत से अधिक महिलाओं में यह समस्या देखी जा रही है। मोटापा का मतलब है कि शरीर में जमा अतिरिक्त फैट (वसा), शरीर को नुकसान पहुंचाता है। 

    मोटापे को रोकने के लिए जीवनशैली में सुधार करना होगा। इसकी शुरुआत बचपन से ही करनी होगी। अगर ये सोचेंगे कि अभी बच्चा है, खाने-पीने दीजिए, वजन थोड़ा बढ़ भी जाएगा, तो कुछ नहीं होगा। यह सोच गलत है, क्योंकि, यही आदत आगे चलकर यही नुकसानदेह साबित होती है। मोटापे को रोकने के लिए जो दवाईंया खोजी गई हैं, वे बीमारी के उपचार के लिए हैं। कई बार कोशिश करने के बाद भी लोग आदतों को नहीं बदल पाते हैं। अगर खानपान पर नियंत्रण नहीं है, तो सारे प्रयास बेकार चले जाते हैं। इसलिए छोटे-छोटे सुधार करने होंगे।

    स्लिम दिखने का शार्टकट हो सकता है जानलेवा

    एक नया ट्रेंड तेजी से उभरा है मौनजारो ब्राइड्स। दरअसल, दुल्हन बनने की तैयारी करने वाली लड़कियां और कुछ लड़के भी शादी से पहले वजन घटाने के लिए जिम या डाइट के बजाय इंजेक्शन का सहारा ले रहे हैं। दिल्ली, मुंबई और हैदराबाद जैसे शहरों के वेलनेस क्लीनिक प्री-वेडिंग ट्रांसफार्मेशन पैकेज में मौनजारो और वेगोवी जैसे इंजेक्शन शामिल कर रहे हैं, जिनमें न्यूट्रिशन गाइडेंस और हल्के वर्कआउट भी जोड़े जा रहे हैं।

    डॉक्टरों के अनुसार, लगभग 20 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो सीधे बताते हैं कि उन्हें कितने समय में वजन कम करना है। एली लिली की दवा मौनजारो और नोवो नार्डिस्क की वेगोवी ऐसे लोगों के बीच में लोकप्रिय हो रही है।

    2030 तक हो सकता है 86 करोड़ का बाजार

    साल2030 मोटापे को कम करने वाली दवाओं का बाजार 86 करोड़ तक पहुंच सकता है। यहां तक कि सस्ते जेनेरिक विकल्प भी बाजार में आने लगे हैं, जिससे बड़ी संख्या में लोगों तक इसकी पहुंच बन गई है।

    समझें डॉक्टरों की चेतावनी

    डॉक्टरों की मानें तो दवाएं उन लोगों के लिए हैं, जो मोटापे या उससे जुड़ी बीमारियों जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या स्लीप एप्निया से पीड़ित हैं। इनका उपयोग केवल विशेषज्ञ डॉक्टर की निगरानी में ही होना चाहिए।