दिखने में पतले, लेकिन अंदर तो नहीं छिपी चर्बी? हार्ट अटैक और डायबिटीज का शिकार बना देगा स्किनी फैट
सिर्फ बाहर से पतला दिखना फिट होने की निशानी नहीं है। शरीर के अंदर छिपा फैट भी बीमारियों को न्यौता दे सकता है। ...और पढ़ें

नॉर्मल वजन के बावजूद शरीर में हो सकता है एक्स्ट्रा फैट (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अक्सर हम अच्छी सेहत का पैमाना वजन को मानते हैं। अगर वजन सामान्य है, तो हम मान लेते हैं कि हम पूरी तरह फिट हैं। लेकिन मेडिकल साइंस की भाषा में एक शब्द बहुत तेजी से उभर रहा है, 'नॉर्मल वेट ओबेसिटी', जिसे बोलचाल में 'स्किनी फैट' भी कहा जाता है।
इसका मतलब है कि बाहर से देखने में व्यक्ति पतला है, लेकिन उसके शरीर में फैट का प्रतिशत बहुत ज्यादा और मांसपेशियों की मात्रा बहुत कम है। यह स्थिति भी बाहर से दिखने वाले मोटापे जितनी ही या शायद उससे भी ज्यादा खतरनाक हो सकती है क्योंकि यह चुपचाप शरीर को अंदर से खोखला करती है। आइए डॉ. मोहित शर्मा (सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अमृता हॉस्पिटलस फरीदाबाद) से जानें इस बारे में।
क्या है स्किनी फैट और यह क्यों डरावना है?
आमतौर पर हम मोटापे को मापने के लिए BMI का सहारा लेते हैं। लेकिन BMI केवल वजन और लंबाई का अनुपात बताता है, यह नहीं कि उस वजन में फैट कितना है और मांसपेशियां कितनी। खतरा तब शुरू होता है जब यह फैट हमारी त्वचा के नीचे न होकर हमारे इंटरनल ऑर्गन्स, जैसे- लिवर, पैनक्रियाज और दिल के आसपास जमा होने लगता है। इसे विसरल फैट कहते हैं। यह फैट मेटाबॉलिक रूप से बहुत एक्टिव होता है और शरीर में सूजन पैदा करने वाले केमिकल रिलीज करता है।
डायबिटीज और हार्ट डिजीज का सीधा कनेक्शन
जब अंगों के आसपास चर्बी जमा होती है, तो शरीर की इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ने लगती है।
- डायबिटीज- इंसुलिन सही से काम नहीं कर पाता, जिससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ने लगता है और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा पैदा हो जाता है।
- हार्ट डिजीज- हाई बॉडी फैट खराब कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को कम करता है। इससे आर्टरीज में ब्लॉकेज पैदा होती है, जो हार्ट अटैक या स्ट्रोक की वजह बनती है।
भारतीयों के लिए ज्यादा खतरा
भारतीयों के लिए यह भी गंभीर है। शोध बताते हैं कि दक्षिण एशियाई लोगों में Thin Outside and Fat Inside (TOFI) यानी बाहर से पतले, अंदर से मोटे होने की प्रवृत्ति ज्यादा होती है। द लांसेट डायबिटीज एंड एंडोक्राइनोलॉजी में पब्लिश रिसर्च के अनुसार, भारतीयों में कम BMI पर भी पश्चिमी देशों की तुलना में ज्यादा बॉडी फैट पाया जाता है। यही कारण है कि भारत में सामान्य वजन वाले लोगों में भी डायबिटीज और ब्लड प्रेशर की समस्या तेजी से बढ़ रही है।
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इसके पीछे मुख्य कारण क्या हैं?
सेडेंटरी लाइफस्टाइल- घंटों एक जगह बैठकर काम करना मांसपेशियों को कमजोर बनाता है।
- खराब खान-पान- भारतीय डाइट में रिफाइंड कार्ब्स बहुत ज्यादा मात्रा में है और प्रोटीन क कम, जो मांसपेशियों के विकास को रोकती है।
- तनाव और नींद की कमी- ये दोनों कोर्टिसोल हार्मोन को बढ़ाते हैं, जो पेट के आसपास फैट जमा करने के लिए जिम्मेदार है।
- सिर्फ कार्डियो पर ध्यान देना- वजन कम करने के लिए लोग सिर्फ दौड़ते हैं, जबकि स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के बिना मांसपेशियां नहीं बनतीं।
वजन नहीं, बॉडी कंपोजिशन सुधारें
अगर आपका वजन नॉर्मल है लेकिन पेट के पास हल्का सा घेरा दिख रहा है या आप जल्दी थक जाते हैं, तो संभल जाएं।
- स्ट्रेंथ ट्रेनिंग- हफ्ते में कम से कम 3 दिन वेट लिफ्टिंग या बॉडीवेट एक्सरसाइज करें। यह मांसपेशियों को बढ़ाएगा और फैट घटाएगा।
- प्रोटीन बढ़ाएं- अपनी डाइट में दालें, पनीर, अंडे या सोया शामिल करें।
- चीनी और मैदा छोड़ें- प्रोसेस्ड फूड और मीठे ड्रिंक्स विसरल फैट के सबसे बड़े सोर्स हैं।
- नियमित जांच- केवल वजन न मापें, बल्कि कमर के घेरे और ब्लड शुगर की समय-समय पर जांच कराएं।