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दिल की सेहत के लिए संजीवनी बना 'पुष्करमूलादि क्वाथ'! आधुनिक दवाइयों के साथ लेने से मिटेगी स्टेबल एंजाइना की समस्या

Published: Sun, 16 Aug 2026 08:00 AM (IST)

'पुष्करमूलादि क्वाथ' नामक आयुर्वेदिक औषधि से करीब 88% मरीजों को मिला सीने के दर्द से छुटकारा।

"पुष्करमूलादि क्वाथ" पर शोध (Image Source: AI Generated)

"पुष्करमूलादि क्वाथ" पर शोध (Image Source: AI Generated)

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शैलेश अस्थाना, वाराणसी। दिल की बीमारी आज पूरी दुनिया में मृत्यु और विकलांगता का एक प्रमुख कारण है। इसमें स्टेबल एंजाइना एक ऐसी स्थिति है जिसमें हृदय तक पर्याप्त खून नहीं पहुंचने के कारण मरीज को सीने में दर्द, सांस फूलने और धड़कन तेज होने जैसी समस्याएं होती हैं। 

काशी हिंदू के विश्वविद्यालय चिकित्सा विज्ञान संस्थान में आयुर्वेद संकाय के काय चिकित्सा विभाग में हुए एक शोध में इस रोग में "पुष्करमूलादि क्वाथ" के चमत्कारिक लाभ देखने को मिले हैं। मानक आधुनिक उपचार के साथ यह आयुर्वेदिक औषधि देने से मरीजों के लक्षणों में कई गुना अधिक सुधार देखने को मिला। सांस फूलने की समस्या तो पूरी तरह ही समाप्त हो गई। 

40 मरीजों के दो समूहों पर हुआ शोध

विभागाध्यक्ष प्रो. राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि इस शोध में स्टेबल एंजाइना से पीड़ित 40 मरीजों को शामिल किया गया। सभी मरीजों को दो समूहों में विभाजित किया गया। पहले समूह के 20 मरीजों को केवल आधुनिक चिकित्सा के अनुसार मानक उपचार दिया गया जबकि दूसरे समूह 20 मरीजों को उसी आधुनिक उपचार के साथ पुष्करमूलादि क्वाथ भी तीन महीने तक दिया गया। सभी मरीजों की प्रत्येक महीने तक नियमित जांच एवं फॉलोअप किया गया। 

सांस फूलने की समस्या पूरी तरह खत्म, सामान्य धड़कन वाले मरीज बढ़े

तीन माह बाद परीक्षण में सामने आया कि केवल आधुनिक उपचार लेने वाले मरीजों के समूह में गंभीर सांस फूलने वाले मरीज 31.6% से घटकर 5.3% पर आए तो पुष्करमूलादि क्वाथ लेने वाले समूह में गंभीर सांस फूलने वाले मरीजों की संख्या शून्य हो गई। इसी तरह आधुनिक उपचार वाले समूह में धड़कन की गंभीर समस्या 63.2% से घटकर 10.5% रही तो पुष्करमूलादि क्वाथ वाले समूह में यह समस्या 61.1% से घटकर 11.1% रही लेकिन सामान्य धड़कन वाले मरीजों की संख्या 33.3% से बढ़कर 61.1% हो गई। 

कोलेस्ट्राल में सुधार, 88.8 फीसद को सीने में दर्द से पूर्णतया आराम

दोनों समूहों में कुल कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड, एलडीएल, वीएलडीएल तथा एचडीएल में सुधार देखा गया, लेकिन पुष्करमूलादि क्वाथ लेने वाले मरीजों में यह सुधार अधिक स्पष्ट और बेहतर रहा। इससे हृदय रोग के जोखिम कारकों को कम करने की संभावना दिखी। यही नहीं ईसीजी जांच में भी कई मरीजों में सुधार मिला। इको जांच में आधुनिक उपचार पद्धति लेने वाले मरीजों की हृदय की पंपिंग क्षमता सामान्य सीमा में बनी रही जबकि पुष्करमूलादि क्वाथ लेने वाले समूह में हल्का अतिरिक्त सुधार भी देखा गया। 

केवल माडर्न मेडिसिन लेने वाले मरीजों में से 57.9% मरीजों को सीने के दर्द से लगभग राहत मिली, जबकि पुष्करमूलादि क्वाथ लेने वाले समूह में 88.8% मरीजों को सीने में होने वाले दर्द से पूर्णतया आराम मिला। प्रो. प्रसाद ने बताया कि बड़े स्तर पर और अधिक मरीजों पर अध्ययन कर इन परिणामों की और पुष्टि की जा सकती है। यह शोध कार्य विभाग की छात्रा डा. दिव्या चौधरी ने प्रो. प्रसाद व माडर्न मेडिसिन के प्रो. दीपक गौतम के सफल निर्देशन में पूर्ण किया।

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