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क्या शुगर या बीपी के मरीज कर सकते हैं अंगदान? जानिए Organ Donation को लेकर क्या कहता है मेडिकल साइंस

By Dr. H. S. BhatyalEdited By: Nikhil Pawar
Updated: Thu, 13 Aug 2026 02:24 PM (IST)

भारत में अंगदान से जुड़े कई भ्रम हैं, खासकर शुगर या बीपी के मरीजों को लेकर। आइए, डिटेल में जान लीजिए इनकी सच्चाई।

क्या कोई पुरानी बीमारी आपको अंगदान से रोक सकती है? (Image Source: AI-Generated)

क्या कोई पुरानी बीमारी आपको अंगदान से रोक सकती है? (Image Source: AI-Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारत में हर साल अंग न मिल पाने के कारण लगभग 5 लाख से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा देते हैं। मौतों के इस इतने बड़े आंकड़े के पीछे का मुख्य कारण है- समाज में जागरूकता की कमी और कई तरह के भ्रम।

जी हां, समाज में सबसे बड़ा मिथक यह है कि "अगर मुझे कोई बीमारी है, तो मैं अपने अंग दान नहीं कर सकता।" हालांकि, मेडिकल साइंस इस भ्रांति को पूरी तरह से नकारता है।

आज 13 अगस्त को मनाए जा रहे विश्व अंगदान दिवस (World Organ Donation Day 202) पर आपका एक छोटा-सा फैसला किसी की बुझती हुई जिंदगी में फिर से रोशनी भर सकता है। आइए इस विषय से जुड़े वैज्ञानिक तथ्यों को आसान भाषा में समझते हैं।

organ donation

(Image Source: Magnific)

एक बीमारी का मतलब पूरा शरीर अनफिट होना नहीं है

अगर आपको डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर जैसी कोई समस्या है, तो मुमकिन है कि इसका असर आपकी किडनी पर पड़ा हो, लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि आपके शरीर के बाकी अंग भी अस्वस्थ हैं। आपके अन्य अंग जैसे लिवर, दिल, फेफड़े और आंखें पूरी तरह से स्वस्थ हो सकती हैं और किसी जरूरतमंद की जान बचाने के काम आ सकती हैं। इसे मेडिकल भाषा में 'ऑर्गन-स्पेसिफिक इवैल्यूएशन' कहा जाता है।

मृत्यु के समय होने वाले मेडिकल टेस्ट्स से होता है सही फैसला

आपकी मौजूदा बीमारियों के आधार पर आपको पहले से ही अंगदान के लिए 'अयोग्य' नहीं माना जा सकता। जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, तब मेडिकल विशेषज्ञों की एक पूरी टीम ब्लड टेस्ट और ऑर्गन फंक्शन की जांच करती है। इस जांच के बाद केवल उन्हीं अंगों को निकाला जाता है, जो मरीज के लिए 100% सुरक्षित और स्वस्थ पाए जाते हैं।

किन बीमारियों में अंगदान करना संभव नहीं है?

मेडिकल दिशा-निर्देशों के मुताबिक, केवल 2 से 3 ही ऐसी गंभीर स्थितियां हैं, जिनमें अंगदान पूरी तरह से वर्जित है:

  • एक्टिव मेटास्टेटिक कैंसर यानी ऐसा कैंसर जो शरीर में फैल चुका हो
  • गंभीर एक्टिव इंफेक्शन, जैसे कि एक्टिव सेप्सिस

इन गंभीर स्थितियों को छोड़कर, अगर किसी व्यक्ति ने पहले कैंसर या किसी अन्य बड़ी बीमारी का इलाज कराया है और वह अब स्वस्थ हो चुका है, तो वह भी मृत्यु के बाद अपने अंगों या टिशू का दान कर सकता है।

एक अकेला इंसान दे सकता है 8 लोगों को जीवनदान

क्या आप जानते हैं कि एक 'ब्रेन-डेड' व्यक्ति अंगदान के जरिए 8 लोगों को नया जीवन दे सकता है? इतना ही नहीं, टिशू डोनेट करके वह 50 से ज्यादा लोगों के जीवन को बेहतर भी बना सकता है।

एक फैसला जो दे सकता है नई उम्मीद

नेशनल ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार, आपकी उम्र या मेडिकल कंडीशन चाहे जो भी हो, कोई भी व्यक्ति अंगदाता बनने का संकल्प ले सकता है।

(डॉ. एच. एस. भट्याल, बीएलके मैक्स अस्पताल के यूरोलॉजी, किडनी ट्रांसप्लांट और रोबोटिक सर्जरी विभाग के सीनियर डायरेक्टर व एचओडी हैं।)

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