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उम्मीद टूटने पर क्यों होती है गहरी मायूसी? वैज्ञानिकों ने खोज निकाला दिमाग का 'एंटी-रिवॉर्ड सेंटर'

Published: Tue, 09 Jun 2026 08:15 AM (IST)

वैज्ञानिकों ने दिमाग में एक 'निराशा मीटर' की खोज की है, जो उम्मीदें पूरी न होने पर एक्टिव होता है।

वैज्ञानिकों ने खोजीं वे खास कोशिकाएं जो तय करती हैं हमारी उदासी (Image Source: AI-Generated)

वैज्ञानिकों ने खोजीं वे खास कोशिकाएं जो तय करती हैं हमारी उदासी (Image Source: AI-Generated) 

HighLights

  1. ओरेगन विश्वविद्यालय ने दिमाग में 'निराशा मीटर' खोजा

  2. यह 'एंटी-रिवॉर्ड सेंटर' निराशा की भावना दर्ज करता है

  3. खोज से अवसाद, नशे की लत के इलाज में मदद

प्रेट्र, नई दिल्ली। क्या कभी ऐसा हुआ है कि आपने किसी अच्छी चीज की उम्मीद की हो, लेकिन वह न मिली हो और आप गहरी निराशा में डूब गए हों? हम सभी के साथ ऐसा होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे दिमाग में एक खास 'निराशा मीटर' काम करता है?

जी हां, ओरेगन विश्वविद्यालय के तंत्रिका विज्ञानियों ने दिमाग की कुछ ऐसी कोशिकाओं का पता लगाया है जो निराशा की भावना को दर्ज करने का काम करती हैं। यह अहम रिसर्च जानी-मानी विज्ञान पत्रिका 'करंट बायोलॉजी' में प्रकाशित हुई है।

disappointment brain cells

(Image Source: AI-Generated)

चूहों पर हुए शोध में सामने आई सच्चाई

इस बात का पता लगाने के लिए शोधकर्ताओं ने चूहों के मस्तिष्क का बारीकी से अध्ययन किया। उन्होंने न्यूरॉन्स के एक ऐसे विशिष्ट समूह की पहचान की, जो ठीक उस वक्त अत्यधिक सक्रिय हो जाते हैं जब जानवर को किसी 'इनाम' की उम्मीद होती है, लेकिन उसे उम्मीद से बहुत कम या फिर कुछ भी नहीं मिलता।

इस निष्कर्ष से यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है कि हमारे मस्तिष्क की कुछ विशेष कोशिकाएं खास तौर पर निराशा की भावना को पहचानने और उसे हमारे दिमाग में रिकॉर्ड करने के लिए ही डिज़ाइन की गई हैं।

मस्तिष्क का 'एंटी-रिवॉर्ड सेंटर'

इस खोज के लिए विज्ञानियों ने दिमाग की गहराई में स्थित एक छोटी और बेहद प्राचीन संरचना का अध्ययन किया, जिसे 'लैटरल हैबेनुला' कहा जाता है। यह क्षेत्र हमारी नकारात्मक भावनाओं को प्रोसेस करने का मुख्य केंद्र है। पिछले अध्ययनों के अनुसार, इस क्षेत्र को मस्तिष्क का 'एंटी-रिवॉर्ड सेंटर' भी कहा जाता है।

जब भी हमारे साथ कोई अप्रत्याशित नकारात्मक घटना घटती है- जैसे अचानक से कोई सजा मिलना या मिलने वाला ईनाम अचानक रुक जाना- तो दिमाग का यह हिस्सा तुरंत सक्रिय हो जाता है।

हालांकि, शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया है कि 'लैटरल हैबेनुला' क्षेत्र में कई अलग-अलग प्रकार के न्यूरॉन्स पाए जाते हैं। विज्ञानियों द्वारा अब तक इस क्षेत्र के भीतर मौजूद अलग-अलग कोशिकाओं की सटीक भूमिकाओं को पूरी तरह से परिभाषित नहीं किया गया है।

अवसाद और नशे की लत के इलाज में जगी नई उम्मीद

यह खोज केवल निराशा को समझने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह चिकित्सा विज्ञान के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है। शोधकर्ता प्रोफेसर एमिली सिल्वेस्ट्राक के अनुसार, निराशा के प्रति संवेदनशील इन खास कोशिकाओं की मैपिंग करने से भविष्य में दवाओं की एक बिल्कुल नई श्रेणी तैयार की जा सकेगी। इससे अवसाद और व्यसन जैसे तंत्रिकामनोवैज्ञानिक विकारों का काफी बेहतर इलाज संभव हो सकेगा।

प्रोफेसर सिल्वेस्ट्राक कहती हैं, "यदि आप किसी तंत्रिकामनोवैज्ञानिक स्थिति का अध्ययन कर रहे हैं, तो आपको यह जानना बेहद आवश्यक है कि स्थिति को ठीक करने के लिए किन कारकों को अपनाना चाहिए। इसलिए, यदि हमें यह पता चल जाए कि अवसाद में एक विशेष प्रकार की कोशिका प्रभावित होती है, तो विज्ञानी ऐसी बेहतरीन दवाएं तैयार कर सकते हैं जो केवल उसी कोशिका को अपना लक्ष्य बनाएं और अन्य स्वस्थ कोशिकाओं को प्रभावित होने से बचा लें।"

आसान शब्दों में कहें तो, इस 'निराशा मीटर' की पहचान होने के बाद भविष्य में डिप्रेशन जैसी गंभीर बीमारियों की ऐसी सटीक दवाएं बन सकेंगी, जो सीधे बीमारी की जड़ पर वार करेंगी और उनके साइड इफेक्ट्स भी न के बराबर होंगे।

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