रोजाना कॉफी पीने वालों में कम रहता है डिमेंशिया का खतरा, वैज्ञानिकों ने बताया कितनी मात्रा है सही
एक नई रिसर्च के मुताबिक, रोजाना कॉफी पीने से डिमेंशिया का खतरा काफी कम हो जाता है। ...और पढ़ें

कॉफी की चुस्की आपके ब्रेन सेल्स को रखती है एक्टिव (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
एएनआई, नई दिल्ली। हम में से बहुत से लोगों के दिन की शुरुआत एक गरमा-गरम एस्प्रेसो या कैपेचीनो से होती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी यह रोजाना की आदत आपको एक बहुत बड़ी बीमारी से बचा सकती है?
जी हां, हाल ही में सामने आए एक अध्ययन से यह पता चला है कि रोजाना दो से तीन कप कॉफी पीने से उम्र बढ़ने के साथ डिमेंशिया का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।

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कैसे काम करती है कॉफी?
शोधकर्ताओं के अनुसार, कॉफी में मौजूद कैफीन हमारे दिमाग की कोशिकाओं को सक्रिय रखने में बेहद मददगार है। इतना ही नहीं, यह अल्जाइमर से जुड़ी सूजन और दिमाग में जमा होने वाले हानिकारक प्लाक को भी कम करने में सहायता करता है। इसका मतलब यह है कि रोजाना कॉफी पीने की आदत आपको सिर्फ ताजगी और ऊर्जा ही नहीं देती, बल्कि आपके दिमाग की रक्षा भी करती है।
क्या कहता है 43 साल लंबा अध्ययन?
इस बात को साबित करने के लिए अमेरिका में एक बहुत बड़ा शोध किया गया। इस शोध में 1,31,821 नर्सों और स्वास्थ्य कर्मियों को शामिल किया गया। इन सभी लोगों पर पूरे 43 सालों तक नजर रखी गई। जब यह अध्ययन शुरू हुआ, तब प्रतिभागियों की उम्र 40 वर्ष के आसपास थी। अध्ययन के दौरान लगभग 11,033 लोगों (यानी कुल लोगों का 8 प्रतिशत) में डिमेंशिया की समस्या देखी गई।
हालांकि, शोधकर्ताओं ने एक बहुत ही दिलचस्प बात नोटिस की। जो लोग नियमित रूप से कैफीनयुक्त कॉफी या चाय का सेवन करते थे, उनमें डिमेंशिया विकसित होने की संभावना काफी कम थी। इस आदत का सबसे अधिक फायदा 75 वर्ष और उससे कम आयु के वयस्कों में देखा गया।
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हर चीज की बुरी है अति
विज्ञानियों ने इसके फायदों के साथ-साथ एक जरूरी सलाह भी दी है। उनका कहना है कि मध्यम मात्रा में कॉफी या चाय पीना ही फायदेमंद है। अगर आप यह सोचकर बहुत ज्यादा कॉफी पीने लगेंगे कि इससे ज्यादा फायदा होगा, तो यह गलत है। हद से ज्यादा कॉफी पीने से इसका यह सुरक्षात्मक प्रभाव कम होने लगता है।