कार्डियोलॉजिस्ट ने बताई महिलाओं में हार्ट अटैक से जुड़ी 3 जरूरी बातें, इस उम्र के बाद बढ़ता है खतरा
हार्ट अटैक महिलाओं में मृत्यु का अहम कारण है। चिंता की बात यह है कि महिलाएं अक्सर इसके लक्षणों को अनदेखा कर देती हैं। ...और पढ़ें

जरूर जानें हार्ट अटैक से जुड़ी ये बातें (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। घर और ऑफिस की जिम्मेदारियों के बीच महिलाएं अक्सर अपनी सेहत, खासकर अपने दिल को नजरअंदाज कर देती हैं। नतीजा? महिलाओं में होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण आज हार्ट अटैक बन चुका है।
हम अक्सर सोचते हैं कि यह अचानक होने वाली घटना है, लेकिन असल में खराब लाइफस्टाइल और तनाव के बीच यह बीमारी चुपके से शरीर में जगह बना रही होती है। सबसे खतरनाक बात यह है कि महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण पुरुषों से बिल्कुल अलग होते हैं और इन्हें अक्सर मामूली थकान या गैस समझकर टाल दिया जाता है।
इसी भ्रम को दूर करने के लिए, इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट और फंक्शनल मेडिसिन एक्सपर्ट, डॉ. संजय भोजराज महिलाओं में हार्ट अटैक से जुड़ी 3 ऐसी जरूरी बातें शेयर कर रहे हैं, जो हर महिला के लिए लाइफसेवर साबित हो सकती हैं।
यह अचानक नहीं होता
हार्ट अटैक कभी भी अचानक नहीं आता। इसके पीछे लाइफस्टाइल से जुड़े कई कारण होते हैं, जिन्हें अक्सर अनदेखा किया जाता है।
- थकान- मल्टीटास्किंग, दिनभर की थकान और रात को पूरा आराम न मिलना दिल को बीमार बनाता है।
- नींद की कमी और मेटाबॉलिक स्ट्रेस- नींद पूरी न होना और वजन का अचानक बढ़ना दिल पर दबाव डालता है।
- इमोशनल डिस्ट्रेस- इमोशनल स्ट्रेस सीधे तौर पर आर्टरीज में सूजन पैदा करता है, जिससे हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ता है।
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मेनोपॉज के बाद बढ़ता जोखिम
मेनोपॉज महिलाओं के जीवन का वह पड़ाव है, जहां दिल की बीमारियों का जोखिम अचानक कई गुणा बढ़ जाता है। इसके पीछे कारण एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी है। यह हार्मोन आर्टरीज को फ्लेक्सिबल रखता है और गुड कोलेस्ट्रॉल को बनाए रखने में मदद करता है। मेनोपॉज आमतौर पर 45 साल की उम्र के बाद शुरू होता है।
मेनोपॉज के बाद जैसे ही एस्ट्रोजन का स्तर गिरता है, ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है, कोलेस्ट्रॉल का स्तर बिगड़ता है और आर्टरीज में स्टिफनेस आ जाता है। अगर पिछले वर्षों में जीवनशैली खराब रही है, तो जोखिम और भी ज्यादा बढ़ जाता है।
इलाज में देरी
आंकड़े चौंकाने वाले हैं कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं की हार्ट अटैक के एक साल के अंदर मृत्यु होने की संभावना ज्यादा होती है। इसके मुख्य कारण हैं-
- अस्पष्ट लक्षण- महिलाओं को अक्सर सीने में दर्द की जगह जबड़े में दर्द, पीठ में दर्द, जी मचलने या सांस लेने में तकलीफ महसूस होती है। इस वजह से वे अस्पताल जाने में देरी करती हैं।
- इलाज में चूक- कई बार एक्सपर्ट्स भी महिलाओं के लक्षणों को पैनिक अटैक या एसिडिटी समझकर गंभीरता से नहीं लेते।
- रिकवरी की चुनौतियां- महिलाएं अक्सर घर की जिम्मेदारियों के कारण अपनी रिकवरी पर उतना ध्यान नहीं दे पातीं जितना पुरुष देते हैं।
बचाव के लिए क्या करें?
- नियमित जांच- 35 की उम्र के बाद नियमित रूप से लिपिड प्रोफाइल, ब्लड प्रेशर और शुगर की जांच कराएं।
- स्ट्रेस मैनेजमेंट- नियमित रूप से योग और मेडिटेशन करें।
- लक्षणों को पहचानें- अगर आपको असामान्य सांस फूलना या अकारण थकान महसूस हो, तो उसे नजरअंदाज न करें।