फिट दिखने के धोखे में न रहें, अब 20-30 की उम्र में ही साइलेंट किलर बन रहा है हाई ब्लड प्रेशर
मात्र 20-30 की उम्र में ही अनियमित रक्तचाप एक मौन महामारी का रूप ले रहा है। कम उम्र में भले ही इसे नजरअंदाज करना आसान हो, पर आगे चलकर यह जिंदगी के लिए ...और पढ़ें

युवाओं में क्यों बढ़ रही है बीपी की समस्या? (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। स्वस्थ दिखने और स्वस्थ होने के बीच एक बड़ा अंतराल आ चुका है। आप सामान्य स्वास्थ्य जांच, जैसे ब्लडप्रेशर चेक करें और रेंज सामान्य से (120/80) काफी ऊपर या नीचे नजर आ जाए, तो यह बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकता है। उम्र कम है तो भले परेशानी महसूस न हो, पर इसे नजरअंदाज करना मुसीबत को आमंत्रण देना है।
दशकभर पहले तक हाई ब्लडप्रेशर बुजुर्गों या बीमारग्रस्त लोगों की समस्या मानी जाती थी, पर अब 20-30 की उम्र में ही यह गिरफ्त में ले रही है। दरअसल, यह अचानक आई समस्या नहीं है, बल्कि वर्षों की दिनचर्या की देन है। घंटों बैठना, चीनी और नमक की अधिकता वाला भोजन, स्क्रीन से जुड़ाव और काम का तनाव अब बहुत भारी पड़ने जा रहा है। कुल मिलाकर कहें तो फिट दिखना सेहतमंद होने की गारंटी नहीं है।
ब्लडप्रेशर केवल बढ़ती उम्र की ही देन नहीं
अगर आप हफ्ते में तीन-चार दिन व्यायाम कर भी रहे हैं, लेकिन पैकेज्ड फूड, कैफीन और अपर्याप्त नींद का सामना कर रहे हैं, तो उम्र की परवाह किए बगैर हाई ब्लडप्रेशर आपको गिरफ्त में ले सकता है। पहले 40 की उम्र तक लोग हाई बीपी से बेखबर रहते थे, लेकिन अब डाक्टर किशोरों में भी हाईपरटेंशन का इलाज कर रहे हैं। यह इसलिए भी चिंताजनक है, क्योंकि ऐसी उम्र में बीपी जब तक नुकसान नहीं पहुंचा देता, तब तक यह साइलेंट बना रहता है।
सोच से अधिक चिंताजनक है यह समस्या
एक रिपोर्ट की मानें तो हर 10 में से तीन भारतीय वयस्क हाई बीपी का शिकार हो चुके हैं। जब तक परेशानी महसूस नहीं होती, आमतौर पर लोग इसे चेक नहीं करते। भारत में बढ़ते कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों और स्ट्रोक के पीछे मुख्य कारण ही हाई ब्लडप्रेशर है।
खबरें और भी
संभव है कि 20 की उम्र में ब्लडप्रेशर का उतार-चढ़ाव परेशान न करे, लेकिन 40 की उम्र में हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक की नींव यह जरूर तैयार कर रहा है। लंबे समय तक नजरअंदाज करने का परिणाम किडनी फेल होने, आंखों की रोशनी छिनने, स्ट्रोक, डिमेंशिया के रूप में भी आ सकता है।
बीपी के चेतावनी संकेत
उच्च रक्तचाप में शुरुआती लक्षण नहीं होने के कारण ही इसे 'साइलेंट किलर' कहा जाता है। हालांकि, कुछ मामलों में चेतावनी को देखा जा सकता है, जैसे-
- धुंधलापन दिखना
- थकान या भ्रम की स्थिति में आना
- सिरदर्द (अक्सर सुबह के समय में)
- सीने में दर्द या सांस लेने में कठिनाई
- नाक से खून आना (बहुत ही कम मामलों में ऐसा देखने में आता है)।
समझें बीपी के अपने नंबर को
ब्लडप्रेशर को दो नंबरों में रिकार्ड किया जाता है। पहला नंबर, जो अधिक होता है, उसे सिस्टोलिक ब्लडप्रेशर कहते हैं, यह ऐसा दबाव है जो हृदय के पूरे शरीर में रक्त पंप करने के दौरान धमनियों पर पड़ता है। दूसरा नंबर, जो कम होता है, उसे डायस्टोलिक ब्लडप्रेशर कहते हैं, यह धड़कनों के बीच जब दिल आराम करता है, तो धमनियों में पड़ने वाला दबाव होता है।
लगातार उच्च रक्तचाप बने रहने को हाईपरटेंशन कहा जाता है। सामान्य ब्लडप्रेशर की रेंज 120/80 या कम होती है। हाईपरटेंशन के पहले स्टेज में सिस्टोलिक रेंज 130 से 139 तक या डायस्टोलिक रेंज 80 से 89 तक पहुंच जाती है। जब सिस्टोलिक की रेंज 140 से ऊपर पहुंच जाती है तो उससे हाईपरटेंशन की स्टेज 2 मान लिया जाता है।
30 की उम्र में बीपी होने के पीछे कारण
- पारिवारिक कारण- बीपी की समस्या के पीछे अक्सर फैमिली हिस्ट्री जुड़ी होती है, ऐसे में कम उम्र में समस्या सामने आ सकती है।
- क्रोनिक बीमारी- डायबिटीज, किडनी और स्लीप एप्निया जैसी आम क्रोनिक समस्याओं के चलते हाईपरटेंशन की समस्या हो सकती है।
- मोटापा- अतिरिक्त वजन होने से हृदय को अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिससे बीपी बढ़ता है।
- गर्भावस्था- गर्भकाल के दौरान रक्तचाप में वृद्धि हो सकती है। हालांकि, यह बाद में सही हो जाती है।
- दवाओं का दुष्प्रभाव- कुछ दवाओं और कोकीन जैसे गैर कानूनी ड्रग्स के चलते बीपी बढ़ सकता है।
- शिथिल दिनचर्या- शारीरिक सक्रियता नहीं होने से हाईपरटेंशन का जोखिम बढ़ता है।
- खराब खानपान- अधिक वसा, अधिक सोडियम और भोजन में फाइबर की कमी से बीपी बढ़ता है।
- धूमपान और अल्कोहल- कैफीन, अल्कोहल व धूमपान से बीपी व कैंसर का जोखिम रहता है।
- तनाव और खराब नींद- नींद पूरी नहीं होने, स्लीप एप्निया और तनाव के चलते यह समस्या हो सकती है। प्रतिदन से सात से आठ घंटे की अच्छी नींद और तनाव रहित दिनचर्या आवश्यक है।
कारणों को समझें
- अक्सर लोग स्वास्थ्य जांच बहुत देर से (30 वर्ष की उम्र के बाद) कराते हैं।
- केवल मोटापे पर ही ध्यान (दुबले मरीज छूट जाते) देना समाधान नहीं है।
- युवाओं में सही जीवनशैली को लेकर जागरूकता का अभाव दिखता है।
- स्कूल/ कालेज बीपी की जांच की सुविधा नहीं होने, तनावजन्य हाईपरटेंशन को 'एंग्जायटी' समझने जैसे कारणों से यह समस्या गंभीर हो रही है।
5 तरीकों से कंट्रोल रहेगा ब्लडप्रेशर
- अपने नंबर को जानें- बीपी से बचाव की शुरुआत यही से होती है। ज्यादातर लोगों को बीपी के नंबर के बारे में पता ही नहीं होता।
- पर्सनल रिस्क को समझें- यह समस्या जेनेटिक, पर्यावरणीय कारकों, वजन या खराब नींद किसी भी कारण से हो सकती है। इसे जानने का प्रयास करें।
- दिल के लिए सेहतमंद आहार- केले, संतरा, पालक, हरी पत्तेदार सब्जियां दिल की सेहत के लिए बेहतर हैं।
- सक्रियता- एरोबिक व्यायाम हृदय मजबूत करता है। आइसोमेट्रिक व्यायाम ब्लड वेसल्स को लचीला बनाता है, जिससे ब्लड फ्लो सुधरता है। इससे तनाव भी कम होता है।
- दवाओं का रहे ध्यान- इलाज का उद्देश्य ब्लड प्रेशर को 130/80 एमएम एचजी से नीचे रखना है। अक्सर, इसके लिए दवा की जरूरत होती है। डाक्टर असरदार, जेनेरिक आप्शन बता सकते हैं।
युवाओं में कैसे रुके यह समस्या
बचाव हमेशा उपचार से बेहतर होता है, ध्यान रखें छोटे-छोटे बदलाव ब्लड प्रेशर जैसी समस्या में बड़ा समाधान साबित हो सकते हैं।
- आहार- फाइबर, अनाज, ताजे फल-सब्जियों को भोजन में शामिल करें। नमक, पैकेटबंद और तले भोजन से दूरी बनाएं।
- तनाव से बचें- प्राणायाम, काम के दौरान ब्रेक या आनंद देने वाली गतिविधियों में शामिल होने का प्रयास करें।
- अच्छी नींद- प्रतिदिन सात से आठ घंटे की अच्छी नींद हार्मोन और रक्तचाप दोनों को संतुलित रखती है।
- नियमित व्यायाम- प्रतिदिन 30 मिनट व्यायाम का लक्ष्य रखें, टहलना, साइकिल चलाना, योग दिल को सेहतमंद रखेगा।
कब मिलें डाक्टर से
अगर आपने अभी तक ब्लडप्रेशर चेक नहीं किया है, तो अभी जरूर करें। 18 वर्ष की उम्र के बाद साल में एक बार जरूर इसकी जांच करानी चाहिए। परिवार में किसी को बीपी की समस्या है या अन्य रिस्क फैक्टर है या फिर बार बार सामान्य से अधिक बीपी दर्ज हो रहा है, तो चिकित्सक से अवश्य मिलना चाहिए।
आदतों में करें कुछ सामान्य बदलाव
- स्क्रीन टाइम कम करें, बाहर निकलें।
- वजन नियंत्रित रखें।
- कैफीन कम करें। पर्याप्त पानी पीने की आदत डालें।
- पोटैशियम युक्त आहार-जैसे केले, पालक, शकरकंद को भोजन में शामिल करें।
- नमक की अधिकता और जंक फूड से बचें।
- रोज 45 मिनट ध्यान-व्यायाम की आदत बनाएं।
- इससे ब्लडप्रेशर सही रहने के साथ-साथ ताजगी और ऊर्जावान महसूस करेंगे।
युवाओं में महामारी बनता हाई ब्लडप्रेशर
डॉ. भुवन चंद्र तिवारी प्रोफेसर एवं एचओडी, लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ बताते हैं हाई बीपी अब 20 वर्ष के उम्र में भी देखने में आ रहा है। जांच नहीं करने से अधिकांश लोग इससे अनजान बने रहते हैं। इससे 30-45 वर्ष में ही हार्ट अटैक, 40 में स्ट्रोक, 30 में किडनी फेल्योर जैसी समस्याएं उभर रही हैं। यह समस्या शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों को समान रूप से प्रभावित कर रही है। तीन कारण जिम्मेदार हैं-
मेटाबालिक जीवनशैली : मुख्य कारण
- मैदा, प्रोसेस्ड फूड, ज्यादा नमकीन
- मीठे पेय पदार्थ, देर रात भोजन
- मोबाइल/स्क्रीन आधारित जीवन आदि।
तनाव व नींद : सबसे तेजी से बढ़ता कारण
- प्रतियोगी परीक्षाएं, कोचिंग दबाव
- देर रात मोबाइल, गेमिंग
- छह घंटे से कम नींद आदि
आरंभिक जीवन प्रोग्रामिंग: भारतीय विशेषता
- जन्म के समय कम वजन
- बचपन में कुपोषण