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    गुजरात में बढ़ा Chandipura Virus का खतरा! बच्चों में दिखे ये लक्षण तो हो जाएं सावधान; वरना पड़ेगा पछताना

    Updated: Mon, 20 Jul 2026 07:34 PM (IST)

    गुजरात में चांदीपुरा वायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे बच्चों की मौतें हुई हैं। डॉक्टर मानसून में सतर्क रहने की अपील कर रहे हैं और माता-पिता क ...और पढ़ें

    गुजरात में चांदीपुरा वायरस का बढ़ता (Picture Credit- AI Generated)

    गुजरात में चांदीपुरा वायरस का बढ़ता (Picture Credit- AI Generated)

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    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। गुजरात में इन दिनों चांदीपुरा वायरस के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। यहां कई बच्चें लगातार इस वायरस की चपेट में आ रहे हैं। बीते दिनों यहां इस वायरस की वजह से तीन बच्चों की मौत हुई थी। वहीं, अब पांच साल के एक और बच्चे की मौत की खबर सामने आ रही है। 

    लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए अब डॉक्टर और पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट्स माता-पिता से सतर्क रहने की अपील कर रहे हैं। खासकर मानसून के दिनों में, जब यह वायरस फैलाने वाले कीड़े ज्यादा एक्टिव हो जाते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल में जानते हैं इस वायरस और इसके कुछ ऐसे लक्षणों के बारे में, जिन्हें पहचानकर समय रहते बच्चों का बचाव किया जा सकता है। 

    क्या है चांदीपुरा वायरस?

    चांदीपुरा वायरस कोई नया संक्रमण नहीं है, लेकिन यह खतरनाक इसलिए माना जाता है क्योंकि यह बहुत तेजी से फैल सकता है, खासकर बच्चों में। गंभीर मामलों में इसके लक्षण बहुत कम समय में बिगड़ सकते हैं और दिमाग व नर्वस सिस्टम से जुड़ी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकते हैं।

    यह वायरस रैब्डोविरिडे (Rhabdoviridae) परिवार का एक वायरस है। सबसे पहले साल 1965 में महाराष्ट्र राज्य के चांदीपुरा गांव में इसकी पहचान होने की वजह से इसका नाम चांदीपुरा वायरस पड़ा। यह वायरस एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (AES) का कारण बनता है, जिसमें दिमाग में सूजन आती है और यह एक गंभीर स्थिति भी साबित होती है। 

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    चांदीपुरा वायरस कैसे फैलता है?

    यह वायरस मुख्य रूप से संक्रमित सैंड फ्लाई के काटने से फैलता है। यह मक्खी असल में खून पीने वाले बहुत ही छोटे कीड़े होते हैं। इसके अलावा कुछ स्टडीज से यह भी पता चला है कि वायरस फैलाना वाले टिक्स यानी एक तरह के कीड़े की भी इस वायरस को फैलाने में भूमिका हो सकती है। 

    हालांकि, सैंड फ्लाई ही इसकी मुख्य कैरियर मानी जाती है। इसके अलावा अभी ऐसा कोई भी सबूत नहीं मिला है, जिससे यह पता चला है कि चांदीपुरा वायरस खांसने, छींकने या शारीरिक संपर्क से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में सीधे फैलता है। 

    चांदीपुरा वायरस के लक्षण

    यह वायरस खतरनाक इसलिए माना जाता है, क्योंकि इसके लक्षण आमतौर पर अचानक ही दिखाई देते हैं और बहुत कम समय में ही गंभीर हो सकते हैं। इसके कुछ प्रमुख लक्षणों में निम्न शामिल हैं- 

    किन लोगों को है ज्यादा खतरा?

    यह वायरस किसी को भी अपना शिकार बना सकता है, लेकिन कुछ खास लोगों को इसका खतरा ज्यादा होता है, जो निम्न हैं-  

    • बच्चे, खासकर 15 साल से कम उम्र के बच्चे
    • ऐसी जगहों पर रहने वाले लोग, जहां सैंड फ्लाई पाई जाती हैं
    • कम साफ-सफाई वाले इलाकों में रहने वाले लोग 
    • ज्यादा कीड़े-मकोड़ों वाले इलाकों में रहने वाले परिवार

    कैसे करें बचाव?

    • सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें
    • बाहर जाते समय शरीर को अच्छी तरह से ढंकने वाले कपड़े पहनें
    • कीड़े भगाने वाली दवा का इस्तेमाल करें
    • घर, आस-पास की जगह और नालियों को साफ रखें, ताकि कीड़े न पनप सकें। 
    • ऐसी जगहों पर जाने से बचें, जहां सैंड फ्लाइज आम हैं
    • अगर बच्चे को तेज बुखार, उल्टी, दौरे या असामान्य सुस्ती महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। 

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