क्या है 'फैटी पैंक्रियाज डिसऑर्डर', जिसे डॉक्टर्स ने माना नई बीमारी; बन सकता है डायबिटीज और कैंसर की वजह
क्या आपने कभी सोचा था कि आपकी पैंक्रियाज में जमा होने वाला फैट किसी बड़ी बीमारी का संकेत हो सकता है? ...और पढ़ें

दुबले-पतले लोगों को भी अपना शिकार बना रहा है 'फैटी पैंक्रियाज डिसऑर्डर' (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपने कभी 'फैटी लिवर' की तरह 'फैटी पैंक्रियाज' के बारे में सुना है? दरअसल, कई सालों तक बड़े-बड़े डॉक्टर भी इस बात को लेकर उलझन में थे कि हमारे पैंक्रियाज में जमा होने वाली चर्बी कोई आम बदलाव है, या फिर किसी खतरे की घंटी, लेकिन अब यह कन्फ्यूजन हमेशा के लिए खत्म हो गई है।
दुनिया भर के विशेषज्ञों ने पहली बार यह मान लिया है कि पैंक्रियाज में ज्यादा फैट जमा होना कोई मामूली बात नहीं, बल्कि एक अलग बीमारी है। इसे 'फैटी पैंक्रियाज डिसऑर्डर' का नाम दिया गया है। ब्रिटिश जर्नल ऑफ कैंसर में छपे इस अहम फैसले को 'मेलबर्न कंसेंसस' कहा जा रहा है। आइए इस आर्टिकल में समझते हैं कि यह नई बीमारी क्या है और हमें इससे क्यों सावधान रहना चाहिए।

(Image Source: Magnific)
पैंक्रियाज में फैट जमा होना कोई मामूली बात नहीं
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि पैंक्रियाज में अत्यधिक फैट का जमाव कोई मामूली बात नहीं है। इसके कारण तीन गंभीर समस्याओं का जोखिम काफी बढ़ सकता है:
- पैंक्रियाटाइटिस
- पैंक्रियाटिक कैंसर
- टाइप-2 डायबिटीज
नॉर्मल फैट और 'फैटी पैंक्रियाज डिसऑर्डर' में क्या फर्क है?
पैनल ने पैंक्रियाज के अंदर मौजूद फैट की मात्रा और फैटी पैंक्रियाज डिसऑर्डर के बीच के फर्क को साफ किया है। उम्र बढ़ने के साथ पैंक्रियाज में थोड़ा-बहुत फैट आना एक नेचुरल प्रक्रिया है, लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब यह फैट हद से ज्यादा बढ़ जाता है।
इस स्टेज में पैंक्रियाज के मूल ढांचे और उसके काम करने की क्षमता को नुकसान पहुंचने लगता है। अंगों में सूजन आ जाती है और स्कारिंग की शिकायत होने लगती है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आनुवंशिक कारणों, खराब पर्यावरण या गलत लाइफस्टाइल के चलते यह बीमारी एकदम दुबले-पतले लोगों को भी अपना शिकार बना सकती है।
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जांच में आने वाली मुश्किलें
अल्ट्रासाउंड के जरिए पैंक्रियाज के फैट को मापना बहुत मुश्किल काम है। वहीं, MRI स्कैन काफी महंगे होते हैं और इनका इस्तेमाल ज्यादातर शोध कार्यों तक ही सीमित है। इसी वजह से विशेषज्ञों की टीम ने इसकी जांच के लिए 'MRI-बेस्ड प्रोटॉन डेंसिटी फैट फ्रैक्शन' तकनीक की सिफारिश की है।
भारत के लिए क्या हैं इस रिसर्च के मायने?
चूंकि भारत में डायबिटीज के मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं, इसलिए यह रिसर्च यहां के लिए बेहद अहम है। भारत में अब तक हुई अपनी तरह की एकमात्र स्टडी से यह साबित हुआ है कि शरीर में लिवर और पैंक्रियाज, दोनों जगहों पर फैट एक साथ बढ़ता है। अगर कोई व्यक्ति अपनी टाइप-2 डायबिटीज को नियंत्रित करना चाहता है या उसे वापस सामान्य स्थिति में लाना चाहता है, तो उसे इन दोनों अंगों का फैट कम करना ही होगा।
पैंक्रियाटिक फैट से कैसे पाएं छुटकारा?
रिपोर्ट में सबसे अच्छी बात यह बताई गई है कि इस जिद्दी फैट को लाइफस्टाइल में बदलाव करके कम किया जा सकता है:
- डाइट और कैलोरी कंट्रोल: मोटापे के शिकार लोग अगर अपनी रोज की डाइट से 500 कैलोरी की कटौती करें या अपना कुल वजन 6 से 10 प्रतिशत तक घटा लें, तो काफी पॉजिटिव रिजल्ट मिल सकते हैं।
- खान-पान और एक्सरसाइज: कम कार्बोहाइड्रेट और हाई प्रोटीन वाली डाइट, या 'मेडिटेरेनियन स्टाइल डाइट' लेना फायदेमंद है। इसके साथ ही, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और नियमित एरोबिक एक्सरसाइज जरूर करनी चाहिए।
- दवाइयों का प्रभाव: शोधकर्ताओं ने यह भी पाया है कि कुछ विशेष दवाएं इसमें कारगर हैं। 3 से 6 महीने तक उपयोग करने पर GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट्स और SGLT2 इन्हिबिटर्स जैसी दवाओं से पैंक्रियाटिक फैट में लगभग 1.6 प्रतिशत और 1.4 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
Source: British Journal of Cancer